मीडिया या मिशन? दिली हुसैन और 5Pillars के डिजिटल इकोसिस्टम की पड़ताल

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दिली हुसैन उर्फ मुहम्मद दिलावर हुसैन मुस्लिम ब्रदरहुड की दुनिया का एक चर्चित और प्रभवशाली नाम है। वह उन चुनिंदा कथित पत्रकारों में शामिल हैं, जिनकी मौजूदगी मुस्लिम जगत से जुड़ी लगभग हर बड़ी बहस, मुद्दे और खबर में दिखाई देती है। पेशे से पत्रकार दिली हुसैन ब्रिटेन स्थित मुस्लिम मीडिया प्लेटफॉर्म 5Pillars के सह-संस्थापक और डिप्टी एडिटर हैं।  इसके साथ ही उनके आर्टिकल, टिप्पणियाँ, इंटरव्यू और ओपनियन अंतराष्ट्रीय स्तर पर अरब और खाड़ी देशों के कई मीडिया प्लेटफार्म पर पब्लिश होते है। वैचारिक रूप से दिली हुसैन इस्लाम की कट्टर विचारधारा सलाफ़ी वहाबी से संबंध रखते हैं

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फिलिस्तीन, कश्मीर, रोहिंग्या संकट, उइगर मुसलमान, इस्लामोफोबिया, पश्चिमी विदेश नीति और मुस्लिम अधिकारों जैसे मुद्दे पर वह एक मुखर आवाज के तौर पर जाने जाते है। उनकी पहचान केवल एक पत्रकार के रूप में नहीं है, बल्कि एक ऐसे कमेंटेटर के रूप में भी है जो खबरों को अपने वैचारिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करते हैं।

यही वजह है कि दिली हुसैन को पारंपरिक अर्थों में तटस्थ पत्रकार कहना पूरी तरह उचित नहीं होगा। उनके कंटेंट और सार्वजनिक हस्तक्षेपों को देखते हुए उन्हें एक एडवोकेसी जर्नलिस्ट (Advocacy Journalist) के रूप में समझना अधिक उपयुक्त प्रतीत होता है। यानी ऐसे पत्रकार के रूप में, जो सिर्फ रिपोर्टिंग नहीं करता बल्कि जिन मुद्दों को महत्वपूर्ण मानता है, उनके पक्ष में वैचारिक और सार्वजनिक हस्तक्षेप भी करता है।

  1. दिली हुसैन और उनकी पत्रकारिता

दिली हुसैन ने अपनी पत्रकारिता की शुरुआत 2009 में नॉर्विच स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया से पॉलिटिक्स में BA (ऑनर्स) की डिग्री हासिल कर 2010 में ‘बेडफोर्डशायर ऑन संडे’ अखबार से की। इस दौरान उन्होने प्रिंट जर्नलिज्म में NCTJ सर्टिफिकेट कोर्स पूरा किया। 2012 में उन्होने अखबार को छोड़कर एक साल बाद 2013 में रोशन मुहम्मद सालेह के साथ मिलकर 5Pillars की स्थापना की, जो आज ब्रिटेन और मुस्लिम जगत के सबसे चर्चित वैकल्पिक मीडिया प्लेटफॉर्म्स में गिना जाता है।

बांग्लादेशी मूल के दिली हुसैन सिर्फ की पत्रकारिता 5Pillars तक ही सीमित नहीं है। वह स्काई न्यूज, चैनल-4, BBC, CNN, टॉक टीवी और BBC रेडियो जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मध्य-पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और ब्रिटिश मुसलमानों से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। इसके अलावा Middle East Eye पर नियमित रूप से उनके कॉलम पब्लिश होते रहते है। उनके लेख Al Jazeera English, Ceasefire Magazine तथा Foreign Policy Journal जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया हाउस में भी प्रकाशित हो चुके है। अपने करियर के दौरान, दिली ने 13 से ज़्यादा देशों से रिपोर्टिंग की है। उनकी प्रमुख रिपोर्टिंग में 2020 में तुर्किये के हागिया सोफिया को दोबारा मस्जिद में परिवर्तित किए जाने की कवरेज, 2022 में अफगानिस्तान पर अमेरिकी कब्जे की पहली बरसी पर ग्राउंड रिपोर्टिंग और 2024 में बांग्लादेश तथा सीरिया में राजनीतिक उथल-पुथल के बाद की जमीनी स्थिति पर की गई रिपोर्टिंग शामिल है।

  • 5Pillars

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अप्रैल 2013 में रोशन मुहम्मद सालेह और दिली हुसैन द्वारा स्थापित 5Pillars खुद को एक स्वतंत्र मुस्लिम मीडिया प्लेटफॉर्म के रूप में प्रस्तुत करता है। वेबसाइट के अनुसार इसकी स्थापना ऐसे समय में हुई, जब इसके संस्थापकों का मानना था कि मुख्यधारा का पश्चिमी मीडिया मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं देता। 5Pillars की टैगलाइन है— “What are Muslims thinking?” जो इसके संपादकीय दृष्टिकोण और लक्षित दर्शक वर्ग की झलक पेश करती है।

उपलब्ध सार्वजनिक अभिलेखों के अनुसार 5Pillars का संचालन 5PILLARS MEDIA LTD नामक कंपनी द्वारा किया जाता है, जिसे 1 जुलाई 2015 को यूनाइटेड किंगडम में पंजीकृत किया गया था। कंपनी का रजिस्ट्रेशन नंबर 09665756 है तथा इसका पंजीकृत कार्यालय Suite 702, Crown House, North Circular Road, London, NW10 7PN में स्थित है। कंपनी का आधिकारिक वर्गीकरण “Media Representation Services” के अंतर्गत किया गया है।

कंपनी के नियंत्रण संबंधी रिकॉर्ड बताते हैं कि 5Pillars के सह-संस्थापक रोशन मुहम्मद सालेह कंपनी के प्रमुख नियंत्रक (Person with Significant Control) हैं और उनके पास 75 प्रतिशत से अधिक स्वामित्व एवं मतदान अधिकार हैं। वहीं दिली हुसैन भी पूर्व में कंपनी के महत्वपूर्ण शेयरधारकों और निदेशकों में शामिल रहे हैं।

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5Pillars की कंटेंट रणनीति मुख्य रूप से चार स्तरों पर संचालित होती है। पहला, समाचार रिपोर्टिंग; दूसरा, राजनीतिक और वैचारिक विश्लेषण; तीसरा, वीडियो और पॉडकास्ट के माध्यम से विस्तृत चर्चा; और चौथा, सोशल मीडिया के जरिए उन्हीं विषयों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाना। इस मॉडल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा Blood Brothers Podcast है, जिसकी मेजबानी स्वयं दिली हुसैन करते हैं। यह पॉडकास्ट केवल इंटरव्यू या चर्चा का मंच नहीं, बल्कि 5Pillars के वैचारिक विस्तार और दर्शक जुड़ाव का प्रमुख माध्यम बन चुका है। वेबसाइट पर प्रकाशित लेख अक्सर बाद में वीडियो, पॉडकास्ट, सोशल मीडिया पोस्ट और डिजिटल अभियानों के रूप में भी सामने आते हैं। इस प्रकार एक ही विषय को विभिन्न माध्यमों से बार-बार प्रसारित कर उसके प्रभाव और पहुंच को बढ़ाया जाता है।

तकनीकी और रणनीतिक दृष्टि से देखें तो 5Pillars की सबसे बड़ी ताकत उसका मल्टी-प्लेटफॉर्म वितरण नेटवर्क है। वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री कुछ ही समय में X, Facebook, Instagram, YouTube, Telegram और पॉडकास्ट प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से हजारों-लाखों लोगों तक पहुंच जाती है। यही कारण है कि 5Pillars को केवल एक मीडिया वेबसाइट नहीं बल्कि एक “Narrative Distribution Network” के रूप में भी देखा जाता है, जहां समाचार, विचार, डिजिटल प्रभाव और समुदाय आधारित सक्रियता एक साथ काम करते हैं।

  • दिली हुसैन का X अकाउंट

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दिली हुसैन X (पूर्व ट्विटर) पर अप्रेल 2012 से ही एक्टिव है। उनके 1.81 लाख (181K) से ज्यादा फॉलोवर है। पिछले एक दशक में उन्होंने इस प्लेटफॉर्म पर मुस्लिम मुद्दों, अंतरराष्ट्रीय राजनीति, मानवाधिकार और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों पर एक मजबूत डिजिटल पहचान बनाई है। भारत से जुड़े मामलों में भी उनकी सक्रियता देखने को मिलती है। उनके पोस्टों में कश्मीर, भारतीय मुसलमानों से जुड़े मुद्दे, सांप्रदायिक हिंसा, धार्मिक स्वतंत्रता और हिंदुत्व राजनीति जैसे विषय प्रमुखता से दिखाई देते हैं। हालांकि इन मुद्दों को उठाते हुए उन्होने फेक और भ्रामक खबर भी फैलाई।

  • 5 Pillars और भारत

5Pillars के न्यूज़ पोर्टल पर भारत से जुड़े 800 से अधिक लेख प्रकाशित किए जा चुके हैं। वेबसाइट के सर्च सेक्शन में “India” कीवर्ड सर्च करने पर बड़ी संख्या में समाचार, विश्लेषण और ओपिनियन लेख सामने आते हैं। इन लेखों का अवलोकन करने पर पता चलता है कि भारत संबंधी कवरेज का एक बड़ा हिस्सा भारतीय मुसलमानों, धार्मिक अल्पसंख्यकों और हिंदुत्व राजनीति से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है।

वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री में इस्लामोफोबिया, हेट क्राइम, गो-रक्षा, धार्मिक ध्रुवीकरण, बुलडोजर कार्रवाई, हिजाब विवाद, आई लव मुहम्मद अभियान, मस्जिद-मदरसों पर सरकारी कार्रवाई और कश्मीर से जुड़े मुद्दों को लगातार प्रमुखता दी गई है।

5Pillars की भारत संबंधी रिपोर्टिंग का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वह भारतीय मुसलमानों से जुड़े मुद्दों को अक्सर वैश्विक मुस्लिम विमर्श के साथ जोड़कर प्रस्तुत करता है। कई लेखों में भारत की परिस्थितियों की तुलना फिलिस्तीन, रोहिंग्या संकट, उइगर मुसलमानों और पश्चिमी देशों में इस्लामोफोबिया से की गई है। इस प्रकार स्थानीय घटनाओं को वैश्विक मुस्लिम पहचान, धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों से जुड़ी व्यापक बहस का हिस्सा बनाया जाता है। परिणामस्वरूप, भारत से जुड़ी घटनाएं केवल घरेलू सामाजिक या राजनीतिक घटनाओं के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक मुस्लिम समुदाय के अधिकारों और उत्पीड़न से जुड़े विमर्श के हिस्से के रूप में प्रस्तुत होती हैं।

  • हिज़्ब उल तहरीर और दिली हुसैन

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Hizb ut-Tahrir (HT) एक अंतरराष्ट्रीय पैन-इस्लामिस्ट (Pan-Islamist) राजनीतिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1953 में फ़िलिस्तीनी इस्लामी विद्वान तकीउद्दीन अल-नबहानी (Taqi al-Din al-Nabhani) ने पूर्वी यरुशलम में की थी। संगठन का घोषित उद्देश्य दुनिया भर के मुसलमानों को एक राजनीतिक इकाई के रूप में संगठित कर खिलाफ़त (Caliphate) की पुनर्स्थापना करना तथा शरिया आधारित शासन व्यवस्था स्थापित करना है। यह संगठन राष्ट्र-राज्य (Nation State), लोकतंत्र और पश्चिमी उदारवादी राजनीतिक व्यवस्था का घोर आलोचक है। कई देशों ने आतंकवाद और चरमपंथी विचारधारा के कारण संगठन को प्रतबंधित किया हुआ है। इन देशों में दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया सहित यूनाइटेड किंगडम, भारत, जर्मनी, बांग्लादेश, पाकिस्तान, मिस्र, रूस आदि ने विभिन्न कारणों से प्रतिबंधित किया हुआ है।

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दिली हुसैन ने 5Pillars के सह-संस्थापक और डिप्टी एडिटर के रूप में Hizb ut-Tahrir (HT) के प्रतिनिधियों को अपना मंच उपलब्ध कराया है। 2015 में आयोजित “Quiz a Muslim” कार्यक्रम की मेजबानी करते हुए दिली हुसैन ने Hizb ut-Tahrir UK के तत्कालीन प्रवक्ता Taji Mustafa को वक्ता के रूप में अपने कार्यक्रम में शामिल किया था। इसके अलावा Hizb ut-Tahrir (HT) से जुड़े विभिन्न लोगों के लेखों और विचारों को 5Pillars ने भी समय-समय पर प्रकाशित किया। जिसको लेकर दिली हुसैन की आलोचना भी हुई। इस आलोचना के बाद उन्होने Hizb ut-Tahrir (HT) से जुड़े संबंधो को लेकर नकारा। हालांकि उन्होने खिलाफ़त (Caliphate) की अवधारणा का समर्थन किया।

  • बांग्लादेश और दिली हुसैन

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बांग्लादेशी मूल के होने के कारण फिलिस्तीन और भारत के बाद दिली हुसैन की पत्रकारिता का सबसे प्रमुख विषय बांग्लादेश रहा है। 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ छात्र आंदोलन और सत्ता परिवर्तन के दौरान दिली हुसैन ने 5Pillars, Blood Brothers Podcast और X अकाउंट के माध्यम से बांग्लादेश पर बड़ी संख्या में खबरे, आर्टिकल और एनालिसिस पब्लिश किये। अपनी रेपोर्टिंग में उन्होने शेख हसीना को निशाने बनाते हुए विपक्षी नेताओं, इस्लामी संगठनों, पत्रकारों और छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आलोचना की। उन्होने अपने पॉडकास्ट और लेखों में मुस्लिम पहचान, इस्लामी पुनर्जागरण (Islamic Revival) और बांग्लादेश के भविष्य में इस्लाम की भूमिका को अपना प्रमुख विषय बनाया। इन विषयों पर उन्होने अपने Blood Brothers Podcast में इस्लामी विद्वानों, जमात-ए-इस्लामी के नेताओं, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ विमर्श और चर्चा की।

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दिली हुसैन ने बांग्लादेश की घरेलू राजनीतिक उथल-पुथल के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। दिली हुसैन के अनुसार भारत बांग्लादेश का नंबर वन दुश्मन है। उन्होने भारत पर रॉ की मदद से बांग्लादेश में अस्थिरता और अशांति फैलाने का भी आरोप लगाया।

  • फेक और भ्रामक न्यूज़

भारत से जुड़े मुद्दों पर दिली हुसैन की सक्रियता केवल टिप्पणी और आलोचना तक सीमित नहीं रही। कई मामलों में उन्होंने भारत से संबंधित घटनाओं, सांप्रदायिक मामलों और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर ऐसी सामग्री साझा की, जो बाद में भ्रामक या तथ्यात्मक रूप से गलत पाई गई। उन्होंने कई बार सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, तस्वीरें और दावों को बिना पर्याप्त सत्यापन के अपने X अकाउंट पर पोस्ट किया। विशेष रूप से हिंदुत्व, सांप्रदायिक हिंसा, भारतीय मुसलमानों और कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर उनकी पोस्टिंग में यह पैटर्न देखने को मिलता है। कई मामलों में उनके द्वारा साझा की गई सामग्री को बाद में गलत, भ्रामक या अधूरे संदर्भ वाली पाया गया।

(9.1) दलित युवक की पिटाई का वीडियो मुस्लिम युवक का बताकर किया शेयर

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दिली हुसैन ने एक युवक की पिटाई का वीडियो शेयर किया। दावा किया गया कि “मध्य प्रदेश में एक गरीब मुस्लिम मज़दूर को बेरहमी से पीटा गया, जबकि उसकी पत्नी हाथ जोड़कर रो रही थी और उनसे ऐसा रोकने की गुज़ारिश कर रही थी।”

फैक्ट चेक:

हमारी जांच में वायरल वीडियो मध्य प्रदेश के सतना का पाया गया। हालांकि पीड़ित मजदूर मुस्लिम नहीं बल्कि दलित समुदाय से है। एनडीटीवी एमपी छत्तीसगढ़ और दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार “नागौद बस स्टैंड स्थित एक बुक सेंटर की दुकान के ऊपर छत की रिपेयरिंग का कार्य चल रहा था। इसी दौरान काम कर रहे मजदूर धीरू चौधरी के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। आरोप है कि उसके बाल पकड़कर उसे जबरन घुटनों के बल बैठा दिया गया। घटना के दौरान मजदूर की पत्नी अपने पति को बचाने के लिए लगातार गुहार लगाती रही।  पुलिस ने इस घटना में हरिजन एक्ट के तहत मामला दर्ज कर किया।”

(9.2) फैक्ट चेक: सहारनपुर घटना का वीडियो भ्रामक सांप्रदायिक दावे के साथ वायरल

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दिली हुसैन द्वारा एक वीडियो शेयर किया गया। जिसमे एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ एक युवक द्वारा मारपीट करते हुए देखा जा सकता है। दावा किया गया कि “एक गरीब, बुज़ुर्ग, दिव्यांग मुस्लिम आदमी के साथ एक हिंदुत्ववादी बदमाश ने सिर्फ़ इसलिए बेरहमी और अमानवीय तरीके से मारपीट की क्योंकि उसने नमाज़ की टोपी पहनी थी।” साथ ही उन्होने लिखा कि “भारत में हिंदू राष्ट्रवादियों द्वारा मुसलमानों को परेशान करना, डराना-धमकाना और लिंच करना रोज़ की सच्चाई बन गई है। मुसलमान कब तक इस बेइज्जती को बर्दाश्त करेंगे?”

फैक्ट चेक:

हमारी जांच में वायरल वीडियो उत्तरप्रदेश के सहारनपुर का निकला। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार “सहारनपुर जनपद के थाना कुतुबशेर क्षेत्र स्थित मानकमऊ से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली ये घटना सामने आई है। बेटे द्वारा पिता को बेरहमी से पीटने की घटना  CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में बुजुर्ग हाजी तहसीन के साथ उनके बेटे गुल्फिशान को बीच सड़क मारपीट करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में बेटे ने अपने पिता को थप्पड़ मारे और उनका गला घोंटने का भी प्रयास किया। बताया जा रहा है कि घरेलू विवाद के चलते बाप-बेटे के बीच कहासुनी हुई, जिसके बेटे ने अपने बाप पर ही हाथ उठा दिया।”

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इसके साथ ही हमें घटना के संबंध में हमें सहारनपुर पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया गया कि “प्रकरण मे थाना कुतुबशेर पुलिस द्वारा आरोपी को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। मारपीट करने वाला युवक मानसिक रूप से परेशान है। उन्होंने यह भी कहा कि पिता और पुत्र के बीच अब समझौता हो चुका है, हालांकि पुलिस ने युवक के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई की है।”

(9.3) फैक्ट चेक: अपनी बहन के साथ स्कूल से घर जा रहे मुस्लिम लड़के की पिटाई का भ्रामक दावा

दिली हुसैन ने बीच सड़क पर एक युवक की पिटाई का वीडियो शेयर कर दावा किया कि “उत्तर प्रदेश में एक मुस्लिम लड़के पर हिंदू लड़कों के एक ग्रुप ने बुरी तरह हमला किया, जब वह अपनी बहन के साथ स्कूल से घर जा रहा था। मुस्लिम लड़के को इसलिए पीटा गया क्योंकि उसने सोशल मीडिया पर पैगंबर मोहम्मद का बचाव किया था। कायरों ने लड़के की बहन पर भी हमला किया।”

फैक्ट चेक:

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वायरल वीडियो के साथ किये गए दावे की जांच के दौरान पता चला कि दिली हुसैन का दावा भ्रामक है। हापुड़ के अपर पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल के मुताबिक “28 सितंबर को एक युवती ने थाना धौलाना में शिकायत दर्ज करवाई थी कि दूसरे समुदाय के युवक द्वारा बहला-फुसलाकर उसके साथ दुष्कर्म की घटना की गई थी। जिसके बाद पुलिस द्वारा विवेचना कर आरोपी युवक को जेल भेजा गया है। इस मामले में आरोपी युवक के साथ लड़की के परिजनों द्वारा मारपीट की गई थी। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।”

  • निष्कर्ष

DFRAC के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि दिली हुसैन केवल एक पत्रकार नहीं, बल्कि वैश्विक मुस्लिम विमर्श को प्रभावित करने वाले प्रभावशाली डिजिटल व्यक्तित्व हैं। जो मुस्लिम मुद्दों पर डिजिटल मीडिया के माध्यम से अपनी बात को अंतराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से प्रसारित करने की शक्ति रखते है। भारत के मामले में वह मुसलमानों, कश्मीर, हिंदुत्व, धार्मिक स्वतंत्रता, इस्लामोफोबिया और अल्पसंख्यक तथा दलित अधिकारों के मुद्दे पर केवल रेपोर्टिंग तक ही सीमित नहीं बल्कि एक एजेंडे के तहत वैचारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते है। इसके लिए उनके द्वारा स्थानीय घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव का हिस्सा बनाया जाता है। ताकि भारत की खुली आलोचना की जा सके।