डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के तेजी से विस्तार के साथ सूचना युद्ध (Information Warfare) और संगठित दुष्प्रचार अभियानों का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेष रूप से नॉर्थ-ईस्ट भारत जैसे संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में ऑनलाइन नैरेटिव निर्माण, राजनीतिक ध्रुवीकरण और क्षेत्रीय असंतोष को प्रभावित करने वाले डिजिटल नेटवर्क गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। इस जांच के दौरान “Voice of North East India (VONEI)” नामक एक डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म और उससे जुड़े कथित कॉलमनिस्ट नेटवर्क का विस्तृत विश्लेषण किया गया, जिसमें कई संदिग्ध तकनीकी, सोशल मीडिया और कंटेंट पैटर्न सामने आए।
रिपोर्ट के अध्ययन में पाया गया कि VONEI स्वयं को “स्वतंत्र”, “विश्वसनीय” और “नॉर्थ-ईस्ट की वास्तविक आवाज़” बताने वाला मीडिया संस्थान प्रस्तुत करता है। हालांकि इसके प्रकाशित लेखों, सोशल मीडिया गतिविधियों, कथित कॉलमनिस्ट प्रोफाइल्स और डिजिटल नेटवर्क संरचना के विश्लेषण में कई गंभीर विरोधाभास दिखाई दिए। प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित बड़ी संख्या में लेखों में सुरक्षा संकट, मानवाधिकार उल्लंघन, राजनीतिक विफलता, सैन्यीकरण और क्षेत्रीय असंतोष जैसे विषयों को लगातार एक समान वैचारिक फ्रेमिंग के साथ प्रस्तुत किया गया। कई लेखों और पोस्ट्स में भावनात्मक भाषा, चयनात्मक तथ्य और संस्थाओं के प्रति अविश्वास बढ़ाने वाले नैरेटिव्स का उपयोग देखा गया, जिससे यह आशंका मजबूत होती है कि यह केवल स्वतंत्र पत्रकारिता नहीं, बल्कि एक संगठित narrative-building ecosystem का हिस्सा हो सकता है।
नॉर्थ-ईस्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस प्रकार के दुष्प्रचार नेटवर्क का प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है, क्योंकि यहां पहचान, क्षेत्रीय अस्मिता, जातीय तनाव और राजनीतिक संवेदनशीलता से जुड़े मुद्दे पहले से ही अत्यंत नाजुक रहे हैं। ऐसे में भ्रामक सूचनाएं, सांप्रदायिक फ्रेमिंग और अलगाववादी नैरेटिव सामाजिक अविश्वास को बढ़ाने, संस्थाओं के प्रति संदेह पैदा करने और ऑनलाइन ध्रुवीकरण को मजबूत करने का माध्यम बन सकते हैं।
इस रिपोर्ट का उद्देश्य किसी व्यक्तिगत विचारधारा पर टिप्पणी करना नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, फेक मीडिया नेटवर्क्स और कथित कॉलमनिस्ट इकोसिस्टम के माध्यम से संचालित संभावित दुष्प्रचार तंत्र की कार्यप्रणाली को तथ्यों, कंटेंट पैटर्न और डिजिटल विश्लेषण के आधार पर सामने लाना है।
फेक मीडिया संस्थान और कॉलमनिस्टः
हमारी जांच में नॉर्थ-ईस्ट को लेकर एक संगठित डिजिटल इकोसिस्टम की संरचना सामने आती है, जिसके केंद्र में “Voice of North East India” नामक प्लेटफॉर्म दिखाई देता है। यह प्लेटफॉर्म स्वयं को नॉर्थ-ईस्ट से जुड़ी खबरों, विचारों और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर केंद्रित मीडिया संस्थान के रूप में प्रस्तुत करता है, जबकि इसके डिजिटल कंटेंट और प्रकाशित कॉलम्स के विश्लेषण में कई संदिग्ध पैटर्न सामने आए। अध्ययन के दौरान पाया गया कि प्लेटफॉर्म की वेबसाइट और उससे जुड़े सोशल मीडिया हैंडल्स पर प्रकाशित कई लेख, पोस्ट और कथित विश्लेषण एक समान वैचारिक दिशा में संचालित होते दिखाई देते हैं, जिनमें अलगाववादी फ्रेमिंग, राजनीतिक ध्रुवीकरण और संवेदनशील क्षेत्रीय मुद्दों को उकसाऊ तरीके से प्रस्तुत करने के संकेत मिलते हैं।
इस नेटवर्क में कई कथित “कॉलमनिस्ट” हैं, जिनकी खुद की पहचान ही संदिग्ध है, उनके नाम से वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री को वैध जनमत या स्वतंत्र विश्लेषण के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश दिखाई देती है। इन कॉलमनिस्ट में आरोखी देशमुख Aarokhi (@aarokhi), ज्योति कुमार Jyoti Kumar (@jyoti_kumarkf), नीलाक्षी राभा Nilakshi Rabha (@nilakshirabhaa), रोशीनी सेन Roshini Sen, सुषमा शर्मा Sushma Sharma और ज्यौती Jyouti (@Jyouti29) शामिल हैं। इन कॉलमनिस्ट प्रोफाइल्स के जरिए प्रकाशित कंटेंट में कई बार तथ्यों की पुष्टि के बिना दावे किए गए, चुनिंदा घटनाओं को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया गया और संवेदनशील मुद्दों को भावनात्मक और संदर्भ से अलग amplify किया गया। कुछ मामलों में एक ही नैरेटिव को अलग-अलग प्रोफाइल्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स से बार-बार प्रसारित किया गया, जिससे यह एक समन्वित डिजिटल अभियान का हिस्सा प्रतीत होता है।

क्या है वॉइस ऑफ नॉर्थ-ईस्ट इंडिया?
वेबसाइट “VONEI – Voice of North East India” स्वयं को एक आधुनिक और स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म के रूप में प्रस्तुत करती है, जो नॉर्थ-ईस्ट भारत की “वास्तविक आवाज़” सामने लाने का दावा करता है। अपने परिचय में यह प्लेटफॉर्म निष्पक्ष पत्रकारिता, तथ्यों की पुष्टि, विश्वसनीय रिपोर्टिंग और राजनीतिक या कॉर्पोरेट प्रभाव से मुक्त होने जैसे दावे करता है। सतही स्तर पर यह परिचय एक सामान्य स्वतंत्र मीडिया संस्थान की तरह दिखाई देता है, लेकिन प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित कंटेंट, कॉलम्स और सोशल मीडिया गतिविधियों के विश्लेषण में कई विरोधाभासी पैटर्न सामने आते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि “Independent Reporting” और “Authentic Stories” जैसे दावों के बावजूद प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित कई लेखों और पोस्ट्स में एकतरफा नैरेटिव, भावनात्मक भाषा और चयनात्मक तथ्यों का उपयोग दिखाई देता है।
जांच के दौरान “Voice of North East India (VONEI)” से जुड़े सोशल मीडिया नेटवर्क का विश्लेषण करने पर कई महत्वपूर्ण और संदिग्ध तथ्य सामने आए। तैयार किए गए ग्राफिकल मैप के अनुसार VONEI का फेसबुक पेज केवल भारत से ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान से भी संचालित होता दिखाई देता है। फेसबुक पेज की “Page Transparency” जानकारी में यह उल्लेख मिलता है कि पेज को मैनेज करने वाले एडमिन्स की लोकेशन भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में मौजूद है। किसी भी क्षेत्रीय भारतीय मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए यह तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना जा सकता है, विशेष रूप से तब, जब वह प्लेटफॉर्म नॉर्थ-ईस्ट जैसे रणनीतिक और संवेदनशील क्षेत्र से जुड़े राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रूप से कंटेंट प्रकाशित करता हो। इसके अतिरिक्त, VONEI का एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट भारत में “withheld” कर दिया गया है। सामान्यतः किसी अकाउंट को भारत में विथहेल्ड किए जाने का अर्थ यह होता है कि संबंधित अकाउंट या उसके कंटेंट पर कानूनी शिकायत, सरकारी आदेश या प्लेटफॉर्म की नीतियों के तहत कार्रवाई की गई है।

वेबसाइट का डोमेन और वेब-एड्रेसः
डोमेन इंटेलिजेंस और WHOIS डेटा के विश्लेषण में “Voice of North East India (VONEI)” वेबसाइट से जुड़े कई महत्वपूर्ण तकनीकी संकेत सामने आए हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड्स के अनुसार यह डोमेन फरवरी 2026 में रजिस्टर किया गया और इसकी वैधता 2027 तक दर्ज है। WHOIS रिकॉर्ड में रजिस्ट्रार के रूप में “HOSTINGER operations, UAB” का नाम सामने आता है, जबकि तकनीकी विवरणों में registrant location के रूप में भारत के आंध्र प्रदेश का उल्लेख दिखाई देता है। इसके अतिरिक्त रिकॉर्ड में एक संपर्क नंबर भी दर्ज है, जिसकी शुरुआत “+370” कंट्री कोड से होती है। यह कंट्री कोड लिथुआनिया (Lithuania) का है, जो इस नेटवर्क की तकनीकी संरचना को और अधिक रोचक एवं जांच योग्य बनाता है।

भारत का विवादित नक्शा पोस्टः
VONEI के फेसबुक पेज की जांच के दौरान हमने पाया कि कई पोस्ट में भारत का विवादित नक्शा पोस्ट किया गया है। दो फेसबुक पोस्ट में भारतीय नक्शे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नहीं हैं, यह सिर्फ एक त्रुटी नहीं बल्कि खास एजेंडे के तहत पोस्ट की गई सामग्री प्रस्तुत होती है।

फेक कॉलमनिस्ट की कैसे खुली पोल?
जब हमारी टीम VONEI पर कॉलम लिखने वाले लोगों की जांच कर रही थी, तब हमें ज्योति कुमार और आरोखी नामक दो एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल्स मिले, जिन्होंने VONEI की वेबसाइट के लेख को पोस्ट किया था। ज्योति कुमार ने एक पोस्ट में दावा किया था कि उन्होंने लेख लिखा है, वहीं आरोखी ने आरोखी देशमुख के नाम से लिखे लेख को शेयर किया था।

फेक प्रोपेगेंडा कॉलमनिस्ट की जियोग्राफिकल लोकेशन!
जांच के दौरान “Voice of North East India (VONEI)” नेटवर्क से जुड़े कथित कॉलमनिस्ट प्रोफाइल्स का विश्लेषण करने पर कई असामान्य और संदिग्ध डिजिटल पैटर्न सामने आए। ग्राफिकल विश्लेषण में जिन प्रोफाइल्स की पहचान की गई, उनमें Aarokhi (@aarokhi), Nilakshi Rabha (@nilakshirabhaa), Jyouti और Jyoti Kumar (@jyoti_kumarkf) जैसे अकाउंट शामिल हैं। इन सभी प्रोफाइल्स में स्वयं को भारत के अलग-अलग क्षेत्रों — विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश, असम और नॉर्थ-ईस्ट भारत — से जुड़ा दिखाया गया है। प्रोफाइल बायो और लोकेशन सेक्शन में “Arunachal Pradesh, India” और “Assam” जैसी जानकारियां दर्ज हैं, जिससे इन्हें स्थानीय और प्रामाणिक नॉर्थ-ईस्ट आधारित आवाज़ के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश दिखाई देती है। हालांकि, एक्स (पूर्व ट्विटर) पर उपलब्ध सार्वजनिक अकाउंट जानकारी में एक समान पैटर्न देखने को मिला, जहां कई अकाउंट्स के लोकेशन इंडिकेटर में “Account based in South Asia” प्रदर्शित हो रहा है। सामान्य परिस्थितियों में यह टैग केवल व्यापक क्षेत्रीय पहचान का संकेत हो सकता है, लेकिन जब कई कथित स्थानीय प्रोफाइल्स एक ही प्रकार के क्षेत्रीय डिजिटल इंडिकेटर के साथ दिखाई दें, तब यह नेटवर्क की वास्तविक लोकेशन और संचालन संरचना को लेकर प्रश्न खड़े करता है। विशेष रूप से तब, जब ये अकाउंट संवेदनशील राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर लगातार एक समान नैरेटिव प्रसारित करते दिखाई दें।
विश्लेषण में यह भी पाया गया कि कुछ अकाउंट्स में हालिया username changes और सीमित डिजिटल इतिहास जैसे संकेत मौजूद हैं। उदाहरण के तौर पर Nilakshi Rabha प्रोफाइल में username परिवर्तन का रिकॉर्ड दिखाई देता है, जो कई coordinated digital operations में प्रयुक्त होने वाले पैटर्न से मेल खाता है। इसके अतिरिक्त कुछ प्रोफाइल्स के निर्माण और सक्रियता की टाइमलाइन भी लगभग समान अवधि में दिखाई देती है, जिससे यह आशंका और मजबूत होती है कि ये अकाउंट्स किसी संगठित नेटवर्क संरचना का हिस्सा हो सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि Nilakshi Rabha का एक्स अकाउंट भारत में “withheld” स्थिति में दिखाई देता है। सामान्यतः किसी अकाउंट का भारत में withheld होना यह संकेत देता है कि उस अकाउंट या उसके कंटेंट पर कानूनी शिकायत, सरकारी अनुरोध या प्लेटफॉर्म की नीतियों के तहत कार्रवाई की गई है।

किसके नाम से कितने लेख पोस्ट हैं?
VONEI से जुड़े कथित कॉलमनिस्ट नेटवर्क का कंटेंट विश्लेषण करने पर यह सामने आया कि प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में लेख कुछ सीमित प्रोफाइल्स के नाम से लगातार प्रकाशित किए गए हैं। Nilakshi Rabha के नाम से सर्वाधिक 25 लेख प्रकाशित हुए, जबकि Roshini Sen के नाम से 24, Sushma Sharma के नाम से 22, Aarokhi के नाम से 16 और Jyouti Kumar के नाम से 10 लेख पोस्ट किए गए। यह पैटर्न संकेत देता है कि प्लेटफॉर्म पर कंटेंट निर्माण और नैरेटिव वितरण कुछ चुनिंदा प्रोफाइल्स के इर्द-गिर्द केंद्रित है। विश्लेषण में सबसे महत्वपूर्ण पहलू इन लेखों के विषय और उनकी फ्रेमिंग रही। प्रकाशित लेखों के शीर्षकों में लगातार सुरक्षा संकट, मानवाधिकार उल्लंघन, राजनीतिक विफलता, सैन्यीकरण, जातीय संघर्ष, अलगाववादी असंतोष और सरकार की नीतियों के प्रति अविश्वास जैसे विषय प्रमुखता से दिखाई देते हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि इन लेखों की भाषा और संरचना सामान्य समाचार रिपोर्टिंग की तुलना में अधिक opinion-driven और narrative-centric प्रतीत होती है। कई लेखों में तथ्यात्मक घटनाओं को भावनात्मक और संघर्ष आधारित फ्रेमिंग के साथ प्रस्तुत किया गया, जिससे नॉर्थ-ईस्ट भारत को लगातार संकटग्रस्त, उपेक्षित और अस्थिर क्षेत्र के रूप में चित्रित करने का पैटर्न दिखाई देता है। विश्लेषण के दौरान यह भी देखा गया कि विभिन्न कॉलमनिस्ट प्रोफाइल्स के नाम अलग-अलग होने के बावजूद लेखों के विषय, भाषा शैली और नैरेटिव दिशा में उल्लेखनीय समानता मौजूद है। इससे यह आशंका मजबूत होती है कि यह केवल स्वतंत्र लेखकों का समूह नहीं, बल्कि एक coordinated editorial ecosystem हो सकता है, जहां अलग-अलग नामों और प्रोफाइल्स का उपयोग करके एक ही प्रकार के संदेश को व्यापक और बहु-स्रोत (multi-source) समर्थन मिलने का आभास पैदा किया जाता है। विशेष रूप से यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि जिन प्रोफाइल्स के नाम से ये लेख प्रकाशित हुए, उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स में भी संदिग्ध डिजिटल पैटर्न, South Asia आधारित अकाउंट संकेतक और कुछ मामलों में withheld status जैसी स्थितियां सामने आई हैं। इससे प्लेटफॉर्म के कंटेंट नेटवर्क और सोशल मीडिया इकोसिस्टम के बीच संभावित समन्वय की आशंका और मजबूत होती है।

वेबसाइट का कंटेंट एनालिसिसः
पर उपलब्ध लेखों और प्रकाशित कंटेंट का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि वेबसाइट केवल सामान्य न्यूज़ रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि एक विशेष प्रकार के राजनीतिक, सुरक्षा और क्षेत्रीय नैरेटिव को लगातार amplify करने का कार्य करती प्रतीत होती है। वेबसाइट पर प्रकाशित अधिकांश लेखों में नॉर्थ-ईस्ट भारत को मुख्यतः संघर्ष, सैन्यीकरण, राजनीतिक विफलता, मानवाधिकार संकट और संस्थागत दमन के फ्रेमवर्क में प्रस्तुत किया गया है।
कंटेंट विश्लेषण में सबसे प्रमुख पैटर्न “victimhood narrative” का दिखाई देता है, जहां नॉर्थ-ईस्ट भारत को लगातार “उपेक्षित”, “असुरक्षित” और “राज्य दमन” के शिकार क्षेत्र के रूप में चित्रित किया गया है। उदाहरण के तौर पर “Blood on the Frontier”, “Peace Accords or Political Deals?”, “The Architecture of Impunity” और “Elections Under Fire” जैसे लेखों में भारतीय सुरक्षा संस्थाओं, केंद्र सरकार और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मुख्यतः नकारात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। विश्लेषण में यह भी सामने आया कि वेबसाइट पर प्रकाशित लेखों में “Delhi vs Northeast” फ्रेमिंग बार-बार दिखाई देती है। कई लेखों में केंद्र सरकार को एक बाहरी और दमनकारी शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि नॉर्थ-ईस्ट की पहचान, संस्कृति और क्षेत्रीय राजनीति को “पीड़ित इकाई” के रूप में चित्रित किया गया। यह पैटर्न विशेष रूप से “From Margins to Majority” और “Peace or Fragility?” जैसे लेखों में स्पष्ट दिखाई देता है, जहां राजनीतिक घटनाओं को केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बजाय “केंद्र द्वारा नियंत्रण” और “स्थानीय पहचान के दमन” के narrative में ढाला गया।
| यूज़र / कॉलमनिस्ट | सोर्स (Platform / Profile) | लेख / कंटेंट एक्टिविटी | एनालिसिस / नेटवर्क प्रभाव |
| Nilakshi Rabha | VONEI / X – @nilakshirabhaa | 25+ लेख प्रकाशित; राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों पर लगातार सक्रिय | सैन्यीकरण, मानवाधिकार और केंद्र-विरोधी नैरेटिव को प्रमुखता; अकाउंट भारत में withheld, जिससे नेटवर्क गतिविधियों पर संदेह गहरा होता है। |
| Roshini Sen | VONEI / Social Media Profiles | 24+ लेख; क्षेत्रीय असंतोष और राजनीतिक मुद्दों पर केंद्रित | नॉर्थ-ईस्ट को उपेक्षित और अस्थिर क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत करने वाले नैरेटिव amplify; भावनात्मक फ्रेमिंग प्रमुख। |
| Sushma Sharma | VONEI / Website Columns | 22+ लेख; संस्थागत और राजनीतिक आलोचना आधारित कंटेंट | सुरक्षा संस्थाओं और सरकारी नीतियों के प्रति अविश्वास निर्माण; opinion-driven narrative का मजबूत संकेत। |
| Aarokhi | VONEI / X – @aarokhi | 16+ लेख; सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय | संघर्ष, दमन और पहचान आधारित मुद्दों को लगातार highlight; नेटवर्क के coordinated narrative ecosystem का हिस्सा प्रतीत होता है। |
| Jyouti Kumar | VONEI / X – @jyoti_kumarkf | 10+ लेख; सीमित लेकिन नियमित एक्टिविटी | क्षेत्रीय असंतोष और राजनीतिक ध्रुवीकरण से जुड़े कंटेंट साझा; अन्य प्रोफाइल्स के समान narrative patterns दिखाई देते हैं। |
| Voice of North East India (VONEI) | Website / Facebook / X | संगठित डिजिटल कंटेंट नेटवर्क; नियमित लेख और सोशल मीडिया amplification | नॉर्थ-ईस्ट को लेकर संकट, सैन्यीकरण और केंद्र-विरोधी फ्रेमिंग को लगातार amplify; फेसबुक संचालन में भारत-पाकिस्तान लोकेशन संकेत और withheld X अकाउंट नेटवर्क को संदिग्ध बनाते हैं। |
नेक्सस का दूसरे पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा प्लेटफॉर्म से जुड़ाव!
हमने जांच के दौरान पाया कि ज्योति कुमार के हैंडल ने एक पोस्टकार्ड शेयर किया है, जिसमें सेना की तैनाती की आलोचना करते हुए मणिपुर की तुलना कश्मीर से की गई है और यह नरेटिव बनाने की कोशिश की गई है कि कश्मीर और मणिपुर में सेना की तैनाती से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। हमने पाया कि इसी पोस्टकार्ड को South Asian Files नामक फेसबुक पेज से भी शेयर किया गया है। इस पोस्ट में लिखा गया है, “क्या मणिपुर को ‘कश्मीर 2.0’ में बदला जा रहा है? मणिपुर के उन हिस्सों में CRPF की अतिरिक्त तैनाती, जहाँ ईसाई समुदाय रहते हैं, एक कायरतापूर्ण कदम है। मणिपुर में 260 से ज़्यादा ईसाई अल्पसंख्यकों के नरसंहार में भारतीय सेना की संलिप्तता भी भारत में धर्मनिरपेक्षता के चेहरे पर एक बड़ा सवालिया निशान है। भारी संख्या में की गई यह तैनाती मणिपुर को एक और कश्मीर में बदल रही है — एक उभरते हुए ‘कश्मीर 2.0’ में।”

पाकिस्तान से संचालित होता है साउथ एशियन फाइल्सः
हमने साउथ एशियन फाइल्स के फेसबुक पेज की गंभीरता से जांच की। हमारी जांच में सामंने आया कि इस फेसबुक का संचालन पाकिस्तान से 10 लोगों द्वारा किया जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि इस फेसबुक पेज का कई बार नाम बदला गया है। जब 18 मार्च 2016 को यह पेज बनाया गया गया था, तब इसका Rewaj Bazar रखा गया था, आपका बता दें कि रेवाज बाज़ार पाकिस्तान के छोटे/मीडियम फैशन रिटेल ब्रांड्स के लिए एक ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है। इसके बाद इसका नाम बदलकर Zoq-e-Khatoon फिर Rewaj Bazar किया गया। आखिरी बार 16 सितंबर 2023 को इसका नाम बदलकर South Asian Files किया गया, तब से यह इसी नाम से संचालित हो रहा है। इस अकाउंट से भारत को लेकर प्रोपेगेंडा किए जाते हैं।

निष्कर्षः
इस जांच और डिजिटल विश्लेषण से यह संकेत मिलता है कि “Voice of North East India (VONEI)” केवल एक सामान्य न्यूज़ प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य नहीं कर रहा, बल्कि इसके माध्यम से नॉर्थ-ईस्ट भारत से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर एक संगठित नैरेटिव निर्माण का प्रयास दिखाई देता है। प्लेटफॉर्म के कंटेंट, कथित कॉलमनिस्ट नेटवर्क, सोशल मीडिया गतिविधियों और तकनीकी संकेतों में कई समान एवं समन्वित पैटर्न सामने आए। सैन्यीकरण, राजनीतिक असंतोष, संस्थाओं के प्रति अविश्वास और क्षेत्रीय संकट जैसे विषयों को लगातार एम्प्लीफाई किया गया। समग्र रूप से यह नेटवर्क एक संभावित डिजिटल influence ecosystem की ओर संकेत करता है, जिसकी गहन जांच आवश्यक प्रतीत होती है।

