सोशल मीडिया पर पंजाब से जुड़ा एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि जालंधर के सिख एक्टिविस्ट सिमरनजीत सिंह की गोली मारकर हत्या इसलिए कर दी गई क्योंकि वह आम नागरिक इलाकों के पास भारतीय सेना की नई तैनाती का विरोध कर रहे थे।

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सोशल साईट X (पूर्व ट्विटर) पर वेरिफाइड यूजर टैक्टिकल ट्रिब्यून ने लिखा कि “सिख एक्टिविस्ट सिमरनजीत सिंह की जालंधर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। वह आम इलाकों के पास भारतीय सेना की नई तैनाती का विरोध कर रहे थे।”

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इसके अलावा एक अन्य वेरिफाइड यूजर इनसाइट्स ऑपरेशन ने भी ऐसा ही दावा किया है।
फैक्ट चेक:

Source: The New Indian Exspress
वायरल दावे की जांच के लिए DFRAC ने गूगल पर दावे से जुड़े कुछ कीवर्ड सर्च किये। इस दौरान हमें दावे के सबंध में द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में बताया गया कि “जालंधर के एक RTI एक्टिविस्ट, सिमरनजीत सिंह, जिन्होंने हाल ही में विवादित बेअदबी विरोधी कानून के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, को फगवाड़ा के चाहेरू गांव में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के बाहर बाइक सवार दो युवकों ने गोली मार दी। जालंधर पुलिस ने उन्हें दो गनमैन दिए थे। हालांकि, खबर है कि वह बिना सिक्योरिटी के जा रहे थे, तभी उन पर करीब से गोली चलाई गई और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के पीछे का असली मकसद अभी साफ नहीं है।”

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इसके अलावा हमें आगे की जांच में टाईम्स ऑफ इंडिया की घटना से जुड़ी एक अन्य रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में बताया गया कि “जालंधर के आरटीआई कार्यकर्ता सिमरनजीत सिंह की शनिवार तड़के फागवारा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई। उन पर करीब से गोली चलाई गई थी। कपूरथला एसएसपी गौरव तोरा ने बताया कि दो गोलियां उनके सिर को भेदकर निकल गईं। पुलिस ने उसके पास से एक .32 बोर की पिस्तौल और उसकी फॉर्च्यूनर गाड़ी से एक 12 बोर की राइफल बरामद की। सिमरनजीत के दो मोबाइल फोन भी उसके पास ही पड़े थे। एसएसपी ने कहा कि उनकी गाड़ी सही तरीके से खड़ी थी और ऐसा प्रतीत नहीं होता कि उन्हें रास्ते में रोका गया हो। उन्होंने कहा, “हम सीसीटीवी फुटेज प्राप्त कर रहे हैं और आरोपी की तलाश के लिए अन्य जानकारी जुटा रहे हैं।” जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगला ने भी घटनास्थल का दौरा किया और जांच की निगरानी शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग की मदद भी ली जाएगी। सिमरनजीत ने विभिन्न विवादास्पद मुद्दों पर आरटीआई आवेदन दायर किए और पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालयों में जनहित याचिकाएं दायर कीं। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें भी दर्ज कराई थीं। हाल ही में उन्होंने जागृत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब (संशोधन) अधिनियम 2026 की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की। पिछले साल अगस्त में उन्होंने पंजाब अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति के खिलाफ एक जनहित याचिका भी दायर की थी।”

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इसके अलावा हमें इंडिया टुडे की भी रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट में बताया गया कि “पुलिस ने शनिवार को बताया कि पंजाब में एक राइट टू इन्फॉर्मेशन (RTI) एक्टिविस्ट की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। सिमरनजीत सिंह पर कपूरथला जिले में जालंधर-लुधियाना हाईवे पर लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के पास चहेरू के पास हमला हुआ। सूत्रों के मुताबिक, जालंधर के रहने वाले सिंह ही टारगेट लग रहे थे और हमले में उन्हें कई गोलियां लगीं। हत्या के पीछे का असली मकसद अभी साफ नहीं है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीमें मौके पर पहुंचीं और जांच शुरू की। हमलावरों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने की कोशिशें जारी हैं। जालंधर रेंज के DIG नवीन सिंगला ने कहा कि जांच करने वालों को मौके से एक .32-बोर की पिस्टल और एक 12-बोर की राइफल मिली है। सुराग जुटाने और घटनाओं के क्रम को फिर से बनाने के लिए आसपास के इलाके के CCTV फुटेज की भी जांच की जा रही है। एक केस दर्ज कर लिया गया है, और पुलिस हत्या के मकसद और हालात का पता लगाने के लिए सभी मुमकिन एंगल से जांच कर रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, हमलावरों और घटनाओं के क्रम के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।”

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इस बीच, जालंधर रेंज के DIG नवीन सिंगला ने मीडिया को बताया कि “पुलिस को सतनामपुरा इलाके में गोली लगने के निशान वाली एक लाश मिलने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर मृतक की पहचान RTI एक्टिविस्ट सिमरनजीत सिंह के रूप में हुई। पुलिस को घटनास्थल पर एक फॉर्च्यूनर वाहन मिला, जिससे वह वहां पहुंचे थे। अधिकारियों ने मौके से एक .32 बोर की पिस्टल और एक 12 बोर की राइफल भी बरामद की। DIG के अनुसार हत्या, आर्म्स एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया तथा जांच के लिए कई पुलिस टीमें गठित की गईं। बाद में पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी शरणजीत सिंह को फगवाड़ा बाईपास से गिरफ्तार करने का दावा किया।”
उल्लेखनीय है कि उपरोक्त मीडिया रिपोर्टों में कहीं भी इंडियन आर्मी, सेना की नई तैनाती अथवा सैन्य प्रतिष्ठानों के विरोध का उल्लेख नहीं किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सिमरनजीत सिंह की हत्या के पीछे के कारणों की जांच जारी है और अब तक किसी भी आधिकारिक एजेंसी ने इस घटना को भारतीय सेना की गतिविधियों से जोड़कर नहीं देखा है।
निष्कर्ष:
DFRAC के फैक्ट चेक से स्पष्ट है कि सिख एक्टिविस्ट सिमरनजीत सिंह की हत्या को भारतीय सेना की नई तैनाती के विरोध से जोड़ने वाला दावा भ्रामक है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों, पुलिस बयानों और अब तक सामने आई जानकारी में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जो इस दावे की पुष्टि करता हो। इसलिए वायरल दावा तथ्यों से समर्थित नहीं है।

