Skip to content Skip to sidebar Skip to footer

फैक्ट-चेक: क्या भारत में सिर्फ हिंदू मंदिर ही टैक्स देते हैं, जानें इस दावे की सच्चाई?

26 सितंबर,2021 को, ट्विटर पर कई ब्लू-टिकधारी यूजर्स ने भारत में मंदिर के टैक्स देने के मुद्दे का विरोध जताते हुए #FreeTemples हैशटैग चलाया। यूजर्स ने दावा किया कि भारत में केवल हिंदू मंदिरों को ही टैक्स देना पड़ता है, लेकिन चर्च और मस्जिदों से टैक्स नहीं वसूला जाता। एल्विश यादव, गौरव गोयल, गौरव तनेजा, अंशुल सक्सेना नामी ब्लूटिकधारी यूजर्स ने इस हैशटैग पर ट्वीट किए, हैशटैग चलाने वाले लोगों ने विशेष रूप से तमिलनाडु सरकार पर सवाल दाग़े।

फैक्ट चेक:

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स प्रावधान के तहत, एक साल में 40 लाख से अधिक (तेलंगाना को छोड़कर) का औसत कारोबार करने वाली किसी भी संस्था को खुद को जीएसटी के तहत पंजीकृत कराना होगा। और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के अनुसार, किसी भी धार्मिक निकाय को उस मानदंड को पूरा करने पर टैक्स का भुगतान करने से छूट नहीं है। हालांकि कुछ रियायत जरूर हैं लेकिन वह सभी धर्मों पर लागू होती हैं। चूंकि कई धार्मिक स्थलों का प्रबंधन ट्रस्ट द्वारा किया जाता है और वे केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में मौजूद रहने के अलावा कई अन्य गतिविधियों का संचालन करते हैं, टैक्स उन सभी पर लागू होता है। टैक्स का लाभ प्राप्त करने के लिए, ट्रस्ट को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 12AA के तहत पंजीकृत होना चाहिए, यदि वे धर्मार्थ सेवाएं प्रदान करते हैं।
यह दावा पहले 2017 में किया गया था जब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने केवल कर देने वाले मंदिरों के खिलाफ सवाल उठाए थे।

चूंकि दावा तब भी वायरल हुआ और अब भी वायरल हो रहा है, भारतीय वित्त मंत्रालय ने 2017 में इसे स्पष्ट करने के लिए एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की।

इसलिये यह कहना कि सिर्फ मंदिर ही टैक्स देते हैं, और बाकी धर्मों के धार्मिक स्थलों से टैक्स नहीं वसूला जाता यह गलत है, भ्रामक है, झूठा है, और समाज में अलगाव एंव असंतोष को बढ़ावा देने वाला है।