आजाद डिजिटल (Azaad Digital) पाकिस्तान का एक बहुभाषी डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है, जो अंग्रेज़ी, उर्दू और चीनी भाषाओं में समाचार, विश्लेषण और फैक्ट-चेक सामग्री प्रकाशित करता है। विश्वभर में उर्दू भाषी पाठकों तक अपनी पहुँच बनाने के उद्देश्य से इस मीडिया नेटवर्क ने उर्दू भाषा के लिए अलग से आजाद उर्दू (Azaad Urdu) नामक प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया है। आजाद उर्दू स्वयं को एक स्वतंत्र, तथ्य-आधारित और निष्पक्ष डिजिटल न्यूज़ मंच के रूप में प्रस्तुत करता है। वेबसाइट के अनुसार इसका उद्देश्य पाकिस्तान, दक्षिण एशिया और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से जुड़ी खबरें, विश्लेषण और तथ्य-जांच पाठकों तक पहुँचाना है। इस प्लेटफ़ॉर्म पर विशेष रूप से भारत, जम्मू-कश्मीर, भारत-पाकिस्तान संबंध, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और तथाकथित “फैक्ट-चेक” से जुड़ी सामग्री नियमित रूप से प्रकाशित की जाती है। वेबसाइट की संपादकीय नीति संतुलित और जिम्मेदार पत्रकारिता का दावा करती है। हालांकि, उपलब्ध लेखों, शीर्षकों, प्रयुक्त शब्दावली और रिपोर्टिंग शैली के अध्ययन से पता चलता है कि भारत और जम्मू-कश्मीर से जुड़े विषयों पर इसकी कवरेज में प्रो-पाकिस्तान और एंटी-इंडिया दृष्टिकोण दिखाई देता है। इस रिपोर्ट में हम निम्नबिन्दुओं के आधार को कवर करेंगे।
- आज़ाद उर्दू की वेबसाईट और सोशल मीडिया अकाउंट
- भारत से जुड़ी खबरों का विश्लेषण
- जम्मू-कश्मीर कवरेज का विश्लेषण
- फेक और भ्रामक दावों की जांच
- निष्कर्ष
- आज़ाद उर्दू की वेबसाईट और सोशल मीडिया अकाउंट

Source: azadurdu.pk
आजाद उर्दू की आधिकारिक वेबसाइट Azaad Urdu है, जिसका डोमेन .pk (पाकिस्तान कंट्री कोड टॉप-लेवल डोमेन) के अंतर्गत पंजीकृत है। वेबसाइट का डोमेन नाम azaadurdu.pk है। वेबसाईट का टाईटल آزاد اردو – آزادی کی پرواز यानि आज़ाद उर्दू – आज़ादी की उड़ान है। वेबसाईट का होस्टिंग सर्वर IP: 77.37.83.221, होस्टिंग लोकेशन: नीदरलैंड्स, तथा होस्टिंग प्रदाता: IPFFM – Internet Provider Frankfurt GmbH है। वेबसाइट पर नियमित रूप से ट्राफिक पाकिस्तान, भारत, खाड़ी देशों, यूरोप, अमेरिका और कनाडा आता है। ScamAdviser ने साइट को “very likely not a scam” बताया है। साइट की Tranco रैंक अपेक्षाकृत कम है, जिससे संकेत मिलता है कि यह एक niche (विशिष्ट विषयों वाली) समाचार वेबसाइट है, न कि अत्यधिक लोकप्रिय वैश्विक मीडिया पोर्टल।

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वहीं आज़ाद उर्दू की सोशल मीडिया पर भी व्यापक उपस्थिति है। सोशल साईट X (पूर्व ट्विटर) पर आज़ाद उर्दू (@azaad_urdu) के 90k से अधिक फॉलोवर है। यह एक वेरिफाइड ब्लू टिक अकाउंट है। अकाउंट के बायो में जानकारी देते हुए लिखा है कि “आज़ाद डिजिटल, पाकिस्तान का लीडिंग डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म।” अकाउंट पर वेबसाइट पर प्रकाशित समाचारों के लिंक, ब्रेकिंग न्यूज़ अपडेट, राजनीतिक विश्लेषण, भारत, पाकिस्तान और कश्मीर से जुड़ी पोस्ट, फैक्ट-चेक आदि शेयर किये जाते है। फॉलोअर्स की बड़ी संख्या और नियमित पोस्टिंग यह दर्शाती है कि यह अकाउंट उर्दू भाषी दर्शकों तक व्यापक पहुँच रखता है। वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री को सोशल मीडिया के माध्यम से तेज़ी से प्रसारित किया जाता है, जिससे इसकी पहुँच और प्रभाव दोनों बढ़ जाते हैं।
- भारत से जुड़ी खबरों का विश्लेषण
आजाद उर्दू आजाद उर्दू (Azaad Urdu) की वेबसाइट पर भारत से संबंधित समाचारों, विश्लेषणों और तथाकथित फैक्ट-चेक लेखों की बड़ी संख्या प्रकाशित की जाती है। वेबसाइट पर “بھارت” (भारत) शब्द से खोज करने पर सैकड़ों लेख सामने आते हैं। ये लेख पिछले दो सालों में पब्लिश हुए है। जिससे स्पष्ट होता है कि भारत इस प्लेटफ़ॉर्म के प्रमुख संपादकीय विषयों में से एक है। इन लेखों में भारत से जुड़ी खबरों को तथ्यात्मक रिपोर्टिंग के रूप में नहीं, बल्कि एक विशेष संपादकीय फ्रेम के साथ प्रस्तुत किया जाता है। इन लेखों में भारत से जुड़ी नकारात्मक खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है। भारत की राजनीतिक, आर्थिक या सैन्य घटनाओं को लगातार विफलता के रूप में प्रसारित किया जाता है। इस दौरान “विफलता”, “प्रोपेगेंडा”, “झूठ”, “साजिश”, “आक्रामकता” और “बेनकाब” जैसे शब्दों का उपयोग भारत के लिए किया जाता है। भारत से जुड़ी कवरेज में प्लेटफार्म का एक सलेक्टिव पेटर्न देखने को मिलता है। इस कवरेज में भारत को एक विफल राष्ट्र रूप में दर्शाने की भरसक कोशिश दिखाई देती है। जो न केवल क्षेत्रीय तनाव बढ़ाता है, बल्कि गलत सूचना भी फैलाता है और विभिन्न मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। कवरेज का बड़ा हिस्सा विवाद, आलोचना और नकारात्मक घटनाओं पर केंद्रित है।

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आज़ाद उर्दू द्वारा प्रकाशित यह लेख, जिसका शीर्षक है—“भारतीय राजनेताओं का बौद्धिक दिवालियापन: मनोज तिवारी का हैरान करने वाला बयान”— भारतीय राजनीति का उपहास उड़ाने का एक स्पष्ट उदाहरण है। लेख में दावा किया गया कि Manoj Tiwari ने कहा कि “यदि हम दो रुपये को एक रुपया मान लें, तो डॉलर 45 रुपये का हो जाएगा।”

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इस कथित बयान को आधार बनाकर लेख में न केवल मनोज तिवारी की आर्थिक समझ पर प्रश्न उठाए गए, बल्कि पूरे भारतीय राजनीतिक नेतृत्व को “फिक्री दिवालियापन” (बौद्धिक दिवालियापन) का प्रतीक बताने का प्रयास किया गया। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार मनोज तिवारी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था। उन्होंने स्वयं इस दावे को फर्जी समाचार (fake news) बताया और इसका खंडन किया।

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आज़ाद उर्दू द्वारा प्रकाशित इस लेख में जनरल अनिल चौहान के बयान को इस तरह प्रस्तुत किया गया कि मानो भारत ने पाकिस्तान के सामने अपनी सैन्य हार स्वीकार कर ली हो। जबकि अनिल चौहान ने केवल यह कहा था कि संघर्ष के दौरान कुछ विमान खोए गए और उससे सीखना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने पाकिस्तान के छह विमान मार गिराने के दावे को स्वीकार नहीं किया था। लेख में “भारत की हार”, “राफेल की विफलता”, “फॉल्स फ्लैग” और “भारतीय आक्रामकता” जैसी भाषा का उपयोग कर भारत की नकारात्मक छवि बनाने की कोशिश की गई।

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आजाद उर्दू ने अपने इस लेख में दावा किया कि पहलगाम के मुख्य बाजार से कश्मीरी नागरिकों ने मोदी सरकार के खिलाफ “युद्ध की घोषणा” की है और पाकिस्तानी सेना के समर्थन का संदेश दिया है। इसके साथ ही अफगान नागरिकों के हवाले से कहा गया है कि वे पाकिस्तान के पक्ष में खड़े होंगे और भारत की गतिविधियों का मुकाबला करेंगे। हालांकि, इस तरह के दावे किसी स्वतंत्र, आधिकारिक या विश्वसनीय स्रोत द्वारा पुष्टि नहीं किए गए हैं। रिपोर्ट में प्रस्तुत कथन पूर्णतः प्रचारात्मक और राजनीतिक एजेंडा पर आधारित हैं, जिनमें वास्तविक तथ्यों की जगह मनगढ़ंत कथाओं और भावनात्मक अपीलों का उपयोग किया गया है।

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इस लेख में दावा किया गया कि दिल्ली में एक ब्रिगेडियर और उनके बेटे के साथ हुई मारपीट भारतीय सेना की कथित “ऑपरेशन सिंदूर” में विफलता के कारण जनता के गुस्से का परिणाम थी। जबकि उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों के अनुसार यह दावा गलत है। ब्रिगेडियर परमिंदर सिंह अरोड़ा और उनके बेटे ने दिल्ली के वसंत एन्क्लेव में कुछ लोगों को सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने से रोका था। इसी बात पर विवाद हुआ और बाद में उन लोगों ने दोनों के साथ मारपीट की। समाचार रिपोर्टों में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि घटना का संबंध “ऑपरेशन सिंदूर”, पाकिस्तान या किसी सैन्य विफलता से था। इसलिए आज़ाद उर्दू ने इस सामान्य आपराधिक घटना को भ्रामक रूप से भारत विरोधी नैरेटिव से जोड़कर प्रस्तुत किया।
- जम्मू-कश्मीर कवरेज का विश्लेषण
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आजाद उर्दू की वेबसाईट पर कश्मीर से जुड़े मुद्दों को विशेष महत्व किया जाता है। वेबसाईट पर “کشمیر” (कश्मीर) शब्द से खोज करने पर बड़ी संख्या में लेख सामने आते हैं। आज़ाद उर्दू के कश्मीर से जुड़े आर्टिकल में कश्मीर को भारतीय अवैध कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर (IIOJK) के नाम से संबोधित किया जाता है। जो पाकिस्तान सरकार, उसके विदेश मंत्रालय और पाकिस्तान-समर्थक मीडिया संस्थानों में व्यापक रूप से प्रयुक्त आधिकारिक शब्दावली का हिस्सा है। कश्मीर से जुड़ी रेपोर्टिंग में बार-बार “भारतीय कब्जा”, “कश्मीरी प्रतिरोध”, “भारतीय दमन”, “मानवाधिकार उल्लंघन”, “गैरकानूनी कार्रवाई” और “मजलूम कश्मीरी” जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है। इस दौरान भारतीय सुरक्षा बलों की कार्यवाही को दमनकारी और विवादास्पद रूप से बताने की भरसक प्रयास किया जाता है। इसके साथ ही मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे को बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत कर भारत को सवालों के कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की जाती है।
- फेक और भ्रामक दावों की जांच
4.1) फैक्ट चेक: क्या भारत ने 10 मई की सालगिरह पर अपने आर्मी चीफ और नावेल चीफ को “नौकरी से निकाल दिया”?

Source: Azad Urdu
आजाद उर्दू ने मई 09, 2026 को एक लेख प्रकाशित कर दावा किया कि भारत ने 10 मई की सालगिरह पर अपने “आर्मी चीफ” और “नावेल चीफ” को नौकरी से निकाल दिया। अपने लेख में लिखा कि – वरिष्ठ पत्रकार रिज़वान राज़ी ने, ‘सत्य की लड़ाई’ में भारत की शर्मनाक हार और शीर्ष सैन्य नेतृत्व की बर्खास्तगी का ज़िक्र करते हुए कहा है कि भारत ने 10 मई की वर्षगांठ अपने सेना प्रमुख और नौसेना प्रमुख को बर्खास्त करके मनाई। विवरण के अनुसार, वरिष्ठ पत्रकार रिज़वान राज़ी ने पिछले साल के असफल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक साल पूरे होने पर हुई सबसे बुरी विफलताओं के लिए भारतीय सेना और अक्षम मोदी पर तंज कसा। यह ध्यान देने योग्य है कि भारतीय मोदी सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की विफलता का एक साल पूरा होने पर सेना में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया है और सेना तथा नौसेना प्रमुखों को बर्खास्त कर दिया है; वहीं, सेना के पूर्व उप-प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजसुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया गया है, जबकि वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को नया नौसेना प्रमुख बनाया गया है। भारतीय मीडिया के अनुसार, लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि जनरल अनिल चौहान की जगह लेंगे, जबकि वाइस एडमिरल स्वामीनाथन एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी की सेवानिवृत्ति के बाद भारतीय नौसेना की कमान संभालेंगे। भारतीय मीडिया के अनुसार, ये नियुक्तियाँ ऐसे समय में हुई हैं जब पाकिस्तान के खिलाफ भारत द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की विफलता को एक साल पूरा हो चुका है, और इस विफलता के लिए भारतीय सैन्य नेतृत्व की कड़ी आलोचना हो रही है। भारत के जानकार हलकों का दावा है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शर्मनाक विफलता का मुख्य कारण चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान और सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी की अक्षमता और अत्यधिक राजनीतिक झुकाव था। योग्यता को सबसे ऊपर रखने के बजाय, ऐसे अधिकारियों को पदोन्नत किया गया जिन्हें पहले 4-स्टार रैंक के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता था, लेकिन उनकी धार्मिक और राजनीतिक निष्ठा उनके काम आई। यह ध्यान देने योग्य है कि पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत के माथे पर एक कलंक साबित हुआ है, जिसकी स्याही को भारत सदियों तक धोता रहेगा।
फैक्ट चेक:



लेख में किए गए दावे की जांच के लिए DFRAC ने दावे से जुड़ी खबरों का विश्लेषण किया। इस दौरान हमें ABP Live, DD News और The Times of India की रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया कि जनरल अनिल चौहान को पद से हटाया नहीं गया था। उनका कार्यकाल 30 मई 2026 को नियमित रूप से समाप्त होना था और उनके उत्तराधिकारी के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल एन. एस. राजा सुब्रमनी की नियुक्ति की गई। इसी प्रकार नौसेना में नेतृत्व परिवर्तन भी नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था। एड्मिरल दिनेश के. त्रिपाठी के निर्धारित कार्यकाल के बाद वाइस एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन को नया नावेल चीफ नियुक्त किया गया।

Source: Ids

Source: Indian Army
उल्लेखनीय है कि जनरल अनिल चौहान को “आर्मी चीफ” बताया गया है, जबकि वे भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) थे। “सीडीएस” और “आर्मी चीफ” दो अलग-अलग पद हैं। सीडीएस तीनों सेनाओं—थल सेना, नौसेना और वायु सेना—के समन्वय के लिए नियुक्त सर्वोच्च सैन्य अधिकारी होते हैं, जबकि आर्मी चीफ केवल भारतीय थल सेना के प्रमुख होते हैं। इसलिए Azaad Urdu का शीर्षक ही प्रारंभिक स्तर पर भ्रामक है।
4.2) फैक्ट चेक: क्या राजौरी सेक्टर में “फ्रीडम फाइटर्स” ने 3 भारतीय सैनिकों को मारकर 1 को पकड़ लिया?

Source: Azad Urdu
आज़ाद उर्दू ने अप्रैल 2026 को एक लेख प्रकाशित कर दावा किया कि जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में “फ्रीडम फाइटर्स” ने तीन भारतीय सैनिकों को मार दिया और एक सैनिक को जीवित पकड़ लिया। आजाद उर्दू ने अपने लेख में लिखा – कब्ज़े वाले कश्मीर के राजौरी सेक्टर में एक ताज़ा झड़प के दौरान आज़ादी के लड़ाकों ने तीन भारतीय सैनिकों को मार गिराया और एक को गिरफ़्तार कर लिया। यह घटना एक अचानक हुए हमले का नतीजा थी। रिपोर्टों के अनुसार, आज़ादी के लड़ाकों ने भारतीय सेना की टुकड़ी को निशाना बनाया; इस झड़प के दौरान तीन भारतीय सैनिक मारे गए, जबकि एक को ज़िंदा पकड़ लिया गया। इस घटना के बाद, भारतीय सेना ने पूरे इलाके को घेर लिया है और अंदरूनी तथा बाहरी रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी है; लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि पूरे इलाके में डर और दहशत का माहौल बना हुआ है। यह याद रखना चाहिए कि भारत कब्ज़े वाले कश्मीर में ज़ुल्म और बर्बरता का बाज़ार गर्म कर रहा है, और आए दिन बेगुनाह कश्मीरियों के खून से अपने हाथ रंग रहा है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस स्थिति का तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।
फैक्ट चेक:
वायरल दावे की जांच के लिए हमने राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय मीडिया में दावे से जुड़ी खबरों की पड़ताल की। लेकिन इस दौरान हमें कोई ऐसी न्यूज़ रिपोर्ट नहीं मिली। जिसमे उक्त लेख की विश्वसनीयता साबित होती हो।

Source: MOD
इस दौरान हमने रक्षा मंत्रालय से जुड़ी अप्रेल 2026 की सभी प्रेस विज्ञप्ति की भी जांच की। लेकिन इस बारे में कोई प्रेस विज्ञप्ति भी नहीं मिली।

इसके अलावा हमें इस बारे में इंडियन आर्मी की अप्रेल 2026 माह की मासिक पत्रिका “बातचीत” तथा इंडियन आर्मी के आधिकारिक ट्विटर हेंडल ADG PI – INDIAN ARMY (@adgpi) पर भी कोई जानकारी नहीं मिली।
उल्लेखनीय है कि यदि वास्तव में किसी मुठभेड़ में तीन भारतीय सैनिक मारे गए होते और एक सैनिक को बंदी बना लिया गया होता, तो यह अत्यंत गंभीर और असाधारण घटना होती। ऐसी घटना की पुष्टि सामान्यतः भारतीय सेना, रक्षा मंत्रालय और प्रमुख मीडिया संस्थानों द्वारा की जाती है। लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों में इस दावे की पुष्टि नहीं मिली।
- निष्कर्ष:
आज़ाद उर्दू (Azaad Urdu) केवल एक सामान्य न्यूज़ पोर्टल नहीं, बल्कि पत्रकारिता की आड़ में पाकिस्तान का रणनीतिक संचार (Strategic Communication) और सूचना युद्ध (Information Warfare) के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने वाला एक प्रभावशाली डिजिटल हथियार है। जिसका इस्तेमाल कर पाठकों की धारणा, भावनाओं और राजनीतिक दृष्टिकोण को भारत के विरुद्ध प्रभावित करना है। यह भारत को दमनकारी, अस्थिर और विफल राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करता है। वहीं पाकिस्तान के वैचारिक, कूटनीतिक और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाता है। इसके लिए वह फेक और भ्रामक खबरों का सहारा लेता है। खबरों की आढ़ में भारत के खिलाफ मनगढ़ंत कहानियां प्रस्तुत करता है।

