फैक्ट चेक: क्या अरब मीडिया ने भारत द्वारा BLA को समर्थन देने की पुष्टि की? अल अरबिया के वीडियो के साथ भ्रामक दावा वायरल

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सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप बड़ी तेजी के साथ वायरल हो रही है। वायरल वीडियो क्लिप अरेबिक न्यूज़ चैनल अल अरबिया की है। इस वीडियो क्लिप के हवाले से दावा किया जा रहा है कि “पहली बार अरब मीडिया ने पुष्टि की है कि भारत पाकिस्तान के ख़िलाफ़ BLA आतंकवादियों का समर्थन कर रहा है।”

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सोशल साईट X (पूर्व ट्विटर) पर वेरिफाइड यूजर टैक्टिकल ट्रिब्यून ने लिखा कि “पहली बार अरब मीडिया ने पुष्टि की है कि भारत पाकिस्तान के ख़िलाफ़ BLA आतंकवादियों का समर्थन कर रहा है। पाकिस्तान की सेना ने पिछले 2 दिनों में 17 BLA उग्रवादियों को मार गिराया है।”

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इसके अलावा कई अन्य पाक यूजर ने भी वायरल वीडियो क्लिप को ऐसे ही दावे के साथ शेयर किया है। जिसे यहां पर क्लिक कर देखा जा सकता है।

फैक्ट चेक:

वायरल वीडियो के साथ किये गए दावे की जांच के लिए DFRAC ने सबसे पहले Ai टूल Vizard से वायरल वीडियो क्लिप को टेक्स्ट में कन्वर्ट किया। इस दौरान हमें वीडियो क्लिप की ट्रांसक्रिप्ट अरबी भाषा में इस तरह से मिली – “पाकिस्तानी सेना ने दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत में खुफिया जानकारी पर आधारित सुरक्षा ऑपरेशन की एक सीरीज़ के दौरान सत्रह आतंकवादियों को मारने की घोषणा की, जिन्हें भारत का समर्थन प्राप्त था, और ऑपरेशन के दौरान हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री ज़ब्त होने की पुष्टि की।”

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आगे की जांच में हमें वीडियो क्लिप से जुड़ा मूल वीडियो न्यूज़ चैनल अल अरबिया के फेसबुक पेज पर भी मिला। 03 जून 2026 को पोस्ट किये गए इस वीडियो को अरबी भाषा में कैप्शन देते हुए लिखा गया कि “पत्रकार ओसामा अल्ताफ: बलूचिस्तान में हालात लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं… और पाकिस्तानी सेना के बयानों में भारत के सपोर्ट वाले लोगों पर इस इलाके में आतंकवादी ऑपरेशन में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।”

Source: Arab News

इसके अलावा हमे इस सबंध में अरब न्यूज़ की भी एक अन्य रिपोर्ट मिली। 02 जून 2026 को पब्लिश इस रिपोर्ट में बताया गया कि “पाकिस्तान की सेना ने मंगलवार को कहा कि उसने दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में खुफिया जानकारी के आधार पर कई ऑपरेशन चलाकर 17 उग्रवादियों को मार गिराया है। यह कार्रवाई पिछले महीने हुए एक ट्रेन बम धमाके के बाद की गई, जिसमें 30 से ज़्यादा लोग मारे गए थे। ये ऑपरेशन 24 मई को क्वेटा (प्रांत की राजधानी) के पास सुरक्षाकर्मियों और उनके परिवारों को ले जा रही एक ट्रेन पर हुए आत्मघाती हमले के बाद शुरू किए गए थे। इस हमले की ज़िम्मेदारी अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ली थी, जो ईरान और अफ़गानिस्तान की सीमा से लगे खनिज-समृद्ध प्रांत में लंबे समय से विद्रोह कर रहा है। सेना के मीडिया विंग, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने एक बयान में कहा कि सैनिकों ने मस्तुंग, नुश्की, ज़ेहरी, खुज़दार और केच ज़िलों में छापेमारी की और 17 उग्रवादियों को मार गिराया। सेना ने इन्हें “फ़ितना-अल-हिंदुस्तान” का सदस्य बताया—यह शब्द पाकिस्तानी अधिकारी BLA उग्रवादियों के लिए इस्तेमाल करते हैं, जिनके बारे में उनका दावा है कि उन्हें भारत का समर्थन और मदद मिलती है। नई दिल्ली इस आरोप को खारिज करती है। ISPR ने कहा, “ज़बरदस्त गोलीबारी के बाद, भारत-समर्थित ‘फ़ितना-अल-हिंदुस्तान’ के 17 आतंकवादियों को जहन्नुम भेज दिया गया, जिससे इन इलाकों में सक्रिय आतंकवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।” सेना ने कहा कि सुरक्षा बलों ने उग्रवादियों से हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) भी बरामद किए। सेना ने इन उग्रवादियों पर प्रांत में हुए हमलों में शामिल होने का आरोप लगाया था। हाल के वर्षों में बलूचिस्तान में उग्रवादी हिंसा में तेज़ी आई है। इसमें आम नागरिकों, सुरक्षा बलों और अरबों डॉलर की चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) परियोजनाओं पर काम कर रहे विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए हमले शामिल हैं। सेना ने कहा कि वह “देश से विदेशी प्रायोजित और समर्थित आतंकवाद के खतरे को खत्म करने” के लिए अपने ऑपरेशन जारी रखेगी।

इस संबंध में हमने इराकी न्यूज चैनल अल अहद टीवी के संवाददाता अली येह्या से भी बातचीत की। उन्होंने वायरल दावे को लेकर स्पष्ट किया कि, “अल अरबिया की रिपोर्ट पाकिस्तान सेना के आधिकारिक बयान पर आधारित थी। रिपोर्ट में केवल सेना के दावे का उल्लेख किया गया था, जबकि भारत द्वारा BLA को समर्थन दिए जाने की कोई स्वतंत्र पुष्टि न्यूज चैनल की ओर से नहीं की गई थी।”

निष्कर्ष:

वायरल वीडियो क्लिप के साथ किया गया दावा भ्रामक है। जांच में पाया गया कि अल अरबिया ने अपनी रिपोर्ट में स्वतंत्र रूप से यह पुष्टि नहीं की कि भारत BLA का समर्थन कर रहा है। समाचार रिपोर्ट में केवल पाकिस्तानी सेना के आरोपों और बयानों का उल्लेख किया गया था। वहीं रिपोर्टों में यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत इन आरोपों को खारिज करता है।