सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिसकर्मियों को भीड़ पर लाठीचार्ज करते देखा जा सकता है। इस वीडियो को पश्चिम बंगाल का बताया जा रहा है और दावा किया जा रहा है कि बांग्लादेश जिंदाबाद का नारा लगाने पर पुलिस ने मुस्लिम युवकों की पिटाई की।

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सोशल साईट X (पूर्व ट्विटर) पर वेरिफाइड यूजर पुष्पराज शर्मा ने वायरल वीडियो को शेयर कर लिखा कि पश्चिम बंगाल में कुछ शांतिदूत बांग्लादेश जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे…. लेकिन वो भूल गए थे कि अब मोमिना बानो की सरकार नहीं है शुभेंदु अधिकारी की सरकार है…. पुलिस ने जो खातिरदारी की है उसे देखकर आनंद आ गया.…

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वहीं एक अन्य वेरिफाइड यूजर ओखोमिया जियोरी ने वायरल वीडियो को शेयर कर लिखा – नया पश्चिम बंगाल, नई ऊर्जा से भरी पश्चिम बंगाल पुलिस आज बांग्लादेशी समर्थकों के ख़िलाफ़ एक्शन मोड में है।

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इसके अलावा एक अन्य यूजर फ़ाईटर 3.0 ने वायरल वीडियो को ऐसे ही दावे के साथ शेयर किया है। हालांकि यूजर ने अपने दावे में अपशब्दों का भी प्रयोग किया।
फैक्ट चेक:

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वायरल वीडियो के साथ किये गए दावे की जांच के लिए DFRAC ने वीडियो को कीफ्रेम में कन्वर्ट कर रिवर्स सर्च किया। इस दौरान हमें ऐसा ही एक वीडियो फेसबुक पर मिला। 26 सितंबर 2025 को यूजर अहमदउद्दीन द्वारा पोस्ट किये गए इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा मिला कि “उत्तर प्रदेश: बरेली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया।”

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आगे की जांच में हमें यूट्यूब पर वीडियो से सबंधित द ट्रिब्यून की मीडिया रिपोर्ट मिली। 01 अक्टूबर 2025 को पब्लिश इस रिपोर्ट के साथ कैप्शन में लिखा गया कि “बरेली (उत्तर प्रदेश): पुलिस ने 26 सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान लाठीचार्ज का वीडियो फुटेज जारी किया है। ये प्रदर्शन “आई लव मुहम्मद” विवाद के कारण भड़के थे। वीडियो में देखा जा सकता है कि शुक्रवार की नमाज़ के बाद जब पत्थरबाज़ी शुरू हुई, तो पुलिस का सामना बेकाबू भीड़ से हुआ। प्रदर्शनकारियों के हिंसक हो जाने से शहर में तनाव फैल गया, जिसके चलते प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़े। प्रशासन ने शांति बहाल करने और संवेदनशील इलाकों में आगे किसी भी तरह की अशांति को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है।”

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इसके अलावा घटना से सबंधित हमें एक अन्य चैनल न्यूज़ 9 लाइव की मीडिया रिपोर्ट मिली। 26 सितंबर 2025 को पब्लिश इस रिपोर्ट के साथ दिये कैप्शन में बताया गया कि “बरेली में ‘आई लव मोहम्मद’ विरोध प्रदर्शनों के बाद हिंसा भड़क उठी। कई इलाकों में पत्थरबाज़ी हुई, जिसके बाद पुलिस और अतिरिक्त बल को व्यवस्था बहाल करने के लिए लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा।”

अंत में हमने वायरल वीडियो के प्रमुख फ्रेम निकालकर उनका मिलान X पर साझा किए गए वीडियो और YouTube पर उपलब्ध News9 Live की रिपोर्ट से किया। तुलना में दोनों वीडियो में कई समान दृश्य तत्व दिखाई दिए—बाईं ओर लगा हरा साइनबोर्ड, बीच में नीले रंग का बंद शटर, सामने काला हेलमेट पहने पुलिसकर्मी, दाईं ओर बिजली के खंभे पर लगा पीला बोर्ड और ऊपर बनी मेहराबदार इमारत। इन सभी बिंदुओं की स्थिति और संरचना दोनों वीडियो में पूरी तरह मेल खाती है।

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वहीं, यह वीडियो इससे पहले लखनऊ में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के लिए प्रदर्शन करते मुस्लिमों पर पुलिस लाठीचार्ज का बताकर शेयर किया गया था, जिसका DFRAC की टीम ने फैक्ट चेक किया था, जिसे इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ा जा सकता है। हमने उस वक्त फैक्ट चेक में पाया था कि यूपी पुलिस की फैक्ट चेक यूनिट ने भी वायरल वीडियो को बरेली में 26 सितंबर 2025 की घटना का बताया था। हमने उस वक्त लखनऊ में टाइम्स हेडलाइन के पत्रकार अबू अशरफ जीशान से भी संपर्क किया था और जीशान ने इस वीडियो को लखनऊ की घटना का होने से इनकार किया था।
निष्कर्ष:
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो पश्चिम बंगाल का नहीं है। जांच में पाया गया कि यह वीडियो बरेली, उत्तरप्रदेश का है, जहां सितंबर 2025 में “आई लव मोहम्मद” प्रकरण में प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था।

