सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कुछ पाकिस्तानी अकाउंट्स के द्वारा एक दावा किया जा रहा है। ‘टैक्टिकल ट्रिब्यून’ नाम के एक अकाउंट ने दावा किया है, “ईरान ने भारतीय और इज़राइली एजेंसियों को संवेदनशील डेटा लीक करने के आरोप में IRGC के एक अधिकारी अहमद ग़दीरी को गिरफ़्तार किया है।” यह दावा 7 अगस्त 2025 को पोस्ट किया गया था।
फैक्ट चेक
DFRAC ने इस वायरल दावे की जांच की और पाया कि यह ग़लत है। इस तरह का कोई मामला ईरान की सरकारी रिपोर्टों या किसी विश्वसनीय वेरिफाइड न्यूज सोर्स में नहीं मिला है।
ईरानी मीडिया आउटलेट Mizan Online की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में जासूसी के आरोप में जिन लोगों को गिरफ़्तार या फांसी दी गई है, उनमें रोज़बेह वादी, मोहम्मद अमीन महदवी शायिस्तेह और इस्माइल फिकरी शामिल हैं।
इन सभी पर इज़रायली खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए काम करने का आरोप है, लेकिन कहीं भी भारत से जुड़ी कोई बात नहीं कही गई है।
AP (एसोसिएटेड प्रेस) की एक रिपोर्ट के अनुसार, मेहदी असघरज़ादेह नामक एक अन्य व्यक्ति को फांसी दी गई है।
हालांकि, यह कार्रवाई जासूसी नहीं बल्कि ISIS से कथित संबंधों के कारण की गई थी।
किसी भी रिपोर्ट में “अहमद ग़दीरी” नाम का ज़िक्र नहीं है और न ही भारत से किसी तरह के संबंध की बात कही गई है।
जून 2025 में, ईरानी सुरक्षा एजेंसियों ने करीब 700 ईरानी नागरिकों को गिरफ़्तार किया।
इन लोगों पर आरोप था कि वे इज़रायल के एजेंट हैं। यह कार्रवाई कथित इज़रायली ड्रोन हमलों के बाद की गई थी।
इन गिरफ़्तारियों का मकसद जासूसी और तोड़फोड़ में शामिल लोगों को रोकना था।
निष्कर्ष
फैक्ट चेक के आधार पर यह स्पष्ट हो जाता है कि वायरल किया गया दावा भ्रामक है।
किसी भी रिपोर्ट में यह पुष्टि नहीं होती कि IRGC के अधिकारी अहमद ग़दीरी को भारत की खुफिया एजेंसियों को संवेदनशील जानकारी देने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है।





