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बुधवार, जून 29, 2022
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होमFact Checkफैक्ट चेक: नैनीताल की जामा मस्जिद की वायरल तस्वीर के पीछे का जानिए सच।

फैक्ट चेक: नैनीताल की जामा मस्जिद की वायरल तस्वीर के पीछे का जानिए सच।

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इंटरनेट पर एक मस्जिद की तस्वीर वायरल हो रही है। तस्वीर के साथ दावा किया गया कि ये तस्वीर नैनीताल की एक मस्जिद की है। इंटरनेट पर लोग लाउड स्पीकर को लेकर मस्जिद को निशाना बनाते हुए इस तस्वीर को बड़ी संख्या में शेयर कर रहे है। साथ ही आपत्ति जता रहे है कि लाउड स्पीकर के उपयोग की वजह से लोगों को सुबह 4 बजे जागना पड़ता है, अस्पताल में भी लोगों के लिए आराम करना मुश्किल है। जबकि 25 से 30 साल पहले यहां मस्जिद भी नहीं थी।

कई Facebook usersने इस तस्वीर को मिलते-जुलते कैप्शन के साथ शेयर किया है।

एक यूजर ने वायरल तस्वीर को शेयर करते हुए केप्शन दिया कि यह मस्जिद देवभूमि में स्थित नैनीताल में है… करीब 20-25 वर्ष पूर्व इस मस्जिद का कोई अस्तित्व नहीं था… यह किले-महलनुमा मस्जिद, विश्वप्रसिद्ध नैनीझील और सदियों पूर्व के नैना देवी के ठीक सामने स्थित है… सुबह साढ़े 4 बजे से इस मस्जिद में लगे 16 बड़े बड़े लाऊडस्पीकर आपको बगैर जगाए नहीं मानते… चूँकि यह सरोवर नगरी चारो तरफ से पर्वतों से घिरी हुई है तो प्रातः साढ़े 4 बजे इन 16 लाउडस्पीकरों की कर्णभेदी ध्वनि दिल के रोगियों, बी.पी के मरीजों और आसपास के अस्पतालों में भर्ती मरीजों के ऊपर कहर की तरह टूटती है… खास बात यह है कि यह मस्जिद खरीदी हुई ज़मीन पर नहीं है… तत्कालीन काँग्रेस सरकार ने सैकड़ों मीटर प्राईम लैंड (बेशकीमती ज़मीन) मुसलमानों को उपहार (अलॉट) में देकर… इस मस्जिद का निर्माण कराया है… भारत में हर जगह यही हाल है… पूरे भारत को कब्रों मजारों पीर दरगाह मस्जिद मदरसों से भर दिया गया है।

फैक्ट चेक:

रिवर्स सर्च इमेज से हमने पाया कि यह तस्वीर नैनीताल की एतिहासिक जामा मस्जिद की है। मस्जिद का निर्माण ब्रिटिश सेना में मुस्लिम सैनिकों के लिए किया गया था। इस्लामी वास्तुकला, सुन्दर सजावट और मीनारों को देखने से ही मस्जिद का एतिहासिकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

 

मस्जिद की तस्वीर और उसके इतिहास को Uttrakhand tourism के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी देखा जा सकता है। जिसमे बताया गया कि 1882 में नैनीताल के आसपास मुसलमानों के लिए ब्रिटिश काल के दौरान ये जामा मस्जिद बनाई गई थी। इस सबंध में  मुख्य प्रवेश द्वार पर अरबी में लिखे शिलालेख देखे जा सकते हैं। इसे 2004-2005 में पुनर्निर्मित किया गया।

निष्कर्ष:

अत: स्पष्ट है कि नैनीताल की जामा मस्जिद का निर्माण 20-25 साल पहले नहीं बल्कि 1882 में ब्रिटिश शासनकाल में हुआ था।

Claim Review : नैनीताल की जामा मस्जिद 25 साल पहले बनी थी।

दावाकर्ता: सोशल मीडिया यूजर।

फैक्ट चेक: फेक

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