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फैक्ट-चेक: फेक न्यूज़, गलत सूचनाओं के माध्यम से सुदर्शन का नफ़रत फैलाने पैटर्न जारी

8 सितंबर 2021 को सुदर्शन न्यूज और जम्मू कश्मीर नाउ चैनल ने फर्जी दावे के साथ एक पुरानी रिपोर्ट को प्रसारित किया। सुदर्शन न्यूज और जम्मू कश्मीर नाउ चैनलों ने अफगानिस्तान के पुल-ए-खुमरी जिले में हुई एक घटना अपने चैनल पर प्रसारित किया। समाचार एंकर ने दावा किया कि एक गधे के एक मस्जिद में प्रवेश करने पर हुए विवाद में 51 लोग मारे गए थे, चैनल ने सूत्रों को हवाले से बताया कि यह घटना 1 सितंबर को हुई थी। यह हिंसा दो समुदायों के बीच हुई थी, जिसमें गधे के साथ-साथ 51 लोग मारे गए थे।

सूत्रों का हवाला

चैनल ने अपने दावे को और पुख्ता बनाने के लिये दो पाकिस्तानी समाचार माध्यमों, डेली पाकिस्तान और रोज़ न्यूज़ पाकिस्तान का हवाला दिया।

फैक्ट चेक:

इस खबर के सूत्रों को देखने पर, हमें इस घटना पर रोज़ न्यूज़ की रिपोर्ट मिली, लेकिन वह रिपोर्ट 2021 में नहीं बल्कि 2020 में प्रकाशित/प्रसारित हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, घटना दो सितंबर 2020 को हुई थी जिसमें 51 लोग मारे गए थे।

अपनी पड़ताल में हमने पाया कि डेली न्यूज पाकिस्तान द्वारा भी यही दावा किया गया है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस समाचार रिपोर्ट को डेली पाकिस्तान की वेबसाइट से हटा दिया गया है, लेकिन हमने समाचार रिपोर्ट को आर्काइव किया हुआ है। इसने हमें इसमें और अधिक गहराई में जाने के लिए प्रेरित किया।

डेली पाकिस्तान से हटाई गई न्यूज रिपोर्ट

मॉर्फ्ड अखबार की कतरन से ली गई खबर

दिलचस्प बात यह थी कि अफ़ग़ानिस्तान के किसी भी समाचार मीडिया माध्यम ने इतनी बड़ी घटना को कवर नहीं किया, हमने इस बाबत अंग्रेज़ी मीडिया में भी इस ख़बर को तलाशने की कोशिश की। इसके अलावा, डेली पाकिस्तान और रोज़ न्यूज़ द्वारा लिखे गए लेखों की आगे की जांच करने पर हमने पाया कि दोनों ने बलूचिस्तान एजुकेशन नामक एक फ़ेसबुक पेज द्वारा पोस्ट की गई एक अखबार की क्लिपिंग में अपने स्रोत का पता लगाया।

उपरोक्त पोस्ट पर टिप्पणियाँ



हालांकि, हमने इस अखबार की क्लिपिंग में विसंगतियां पाईं जिसमें फोटोशॉप्ड के सबूत दिखाई साफ दे रहे हैं। InVid के मैग्नीफाइंग ग्लास टूल का इस्तेमाल करते हुए हमने पाया कि इमेज को ‘प्लांट’ किया गया है।

इस अखबार की कतरन में विसंगतियां
संख्या 5 के शीर्ष पर पिक्सेलयुक्त घन

33 नंबर भी छवि के शीर्ष पर लगाया गया लगता है

इसके अलावा, फेसबुक पोस्ट पर टिप्पणियां अत्यधिक नकारात्मक पाईं, ज्यादातर यूजर्स ने इसे फर्जी ख़बर बताया। कई लोगों ने पोस्ट की खबर की वैधता पर सवाल उठाया उपयोग की गई छवि पुरानी है।

इस विकृत छवि के साक्ष्य ने हमें लेखों में उपयोग की गई एक तस्वीर को हमने Google रिवर्स करके चेक किया तो पाया कि यह तस्वीर वास्तव में 2019 में अफगानिस्तान के जोदरी गांव में हुई बमबारी की है। इस मार्फत हमें एपी न्यूज़ का श्रोत भी मिला जिसे हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं।

डेली पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल की गई पुरानी तस्वीर
सुदर्शन न्यूज द्वारा इस्तेमाल की गई पुरानी तस्वीर
असली तस्वीर 2019 की है
जेके नाउ द्वारा इस्तेमाल की गई पुरानी छवि

सुदर्शन न्यूज की नफरत

अपनी पड़ताल में हमने पाया कि सुदर्शन न्यूज ने नफरत और गलत सूचना का एक पैटर्न बनाया हुआ है। इस न्यूज़ के बहाने पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर नाउ और सुदर्शन न्यूज का नफरत फैलाने और अपने दर्शकों को गलत सूचना देकर एक संप्रदाय विशेष को घृणा का पात्र बनाना ही मक़सद था।

इसलिए, चूंकि लेख स्वयं सत्यापित स्रोतों के साथ नहीं लिखा गया है और तथ्य यह है कि घटना के एक साल बाद दोनों चैनलों ने कहानी चलाई, इस दावे को नकली बनाता है। हम पहले सुदर्शन न्यूज पर विश्लेषण रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। आप उन्हें यहाँ और यहाँ देख सकते हैं।