फैक्ट चेक: भारत को 99 साल की लीज़ वाली स्वतंत्रता का वायरल पत्र फेक है

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सोशल मीडिया पर एक कथित पत्र वायरल है, जिसे ब्रिटेन के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा 14 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू को लिखा हुआ बताया जा रहा है। पत्र में दावा किया गया है कि भारत को 15 अगस्त 1947 से 99 साल की लीज पर स्वतंत्रता दी गई थी। पत्र को बकिंघम पैलेस के लेटरहेड वाला बताया गया है।

वायरल लेटर को शेयर करते हुए एक पाकिस्तानी यूजर ने लिखा, ‘मेरे दोस्त “अज़ीज़ कलामाती” की मदद से मुझे यह “हिस्टोरिकल फैक्ट” शेयर करते हुए खुशी हो रही है। बर्मा के “लॉर्ड लुइस माउंटबेटन” ने 15 अगस्त 1947 को भारतीय प्रधानमंत्री “पंडित जवाहरलाल नेहरू” को जो लेटर लिखा था, उसमें कहा गया था कि UK ने भारत को 99 साल की लीज़ पर दिया है। इसका मतलब है कि UK भारत का असली मालिक है और 99 साल की लीज़ खत्म होने के बाद इसे वापस ले लेगा, जो 15 अगस्त 2046 को खत्म होगी। नहीं तो, कब्ज़े का एग्ज़िक्यूशन हेग में ICJ (इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस) में किया जाएगा। जैसे तुर्की और K.S.A. के बीच साइन की गई 99 साल की लीज़ भी अब खत्म हो चुकी है।’ (हिंदी ट्रांसलेशन)

वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा कि भारत की लीज़ 99 बर्ष की थी।

फैक्ट चेक:

DFRAC के टीम ने जांच में पाया कि वायरल कथित पत्र फेक है और इसका कोई विश्वसनीय ऐतिहासिक या अभिलेखीय रिकॉर्ड मौजूद नहीं मिला। वहीं, इतिहासकार और लेखक अशोक कुमार पांडेय ने भी वायरल पत्र को फेक करार दिया है।

हमारी टीम ने वायरल लेटर के संदर्भ में Indian Independence Act, 1947 देखा। हमने पाया कि इसमें स्पष्ट रूप से भारत और पाकिस्तान को स्वतंत्र डोमिनियन बनाए जाने का उल्लेख है। एक्ट में भारत की स्वतंत्रता को 99 साल की लीज पर देने का कोई उल्लेख या प्रावधान नहीं है।

वहीं हमने पाया कि वायरल पत्र में एक और ऐतिहासिक विसंगति है। 1947 में ब्रिटेन के सम्राट किंग जॉर्ज VI थे, जबकि पत्र में “Her Majesty” का संदर्भ दिया गया है। इसके अलावा, पत्र में “Stability” जैसे शब्द की गलत स्पेलिंग “Stasllity” भी इसकी प्रामाणिकता पर सवाल खड़े करती है।

लिंक– 1 और 2

वहीं हमने वायरल पत्र की कई AI–डिटेक्टर टूल्स से जांच की, जिसमें परिणाम सामने आया कि यह पत्र AI जनरेटेड है। हमने वायरल पत्र की जांच AI– डिटेक्टर टूल्स ट्रूथ स्कैन, DeepAI और image detecter से जांच की। ट्रूथ स्कैन और DeepAI की जांच में परिणाम सामने आया कि वायरल लेटर के AI– जनरेटेड होने की संभावना 93% है, वहीं image detecter की जांच में सामने आया कि यह 93% डिजिटली एडिटेड फोटो है।

हमारी टीम ने वायरल लेटर के संदर्भ में इतिहासकार और लेखक अशोक कुमार पांडेय से संपर्क किया। अशोक कुमार पांडेय ने बताया, ‘यह एक ऐसा दस्तावेज़ है जिसे इतिहास का कोई भी गंभीर पाठक देखते ही समझ सकता है कि फ़र्ज़ी है। न तो सरकारी पत्राचार में नेहरू जी के साथ पंडित’ लगाया जाता था और न ही बिना किसी फाइल नम्बर के वायसराय का पत्र बर्किंघम पैलेस के लेटरहेड से जारी हो सकता था। दुनिया के किसी देश में आज़ादी लीज़ पर दी जाने वाली चीज़ नहीं है। ऐसा लगता है कि राजनैतिक विद्वेष में स्वतंत्रता की महान लड़ाई की विरासत को बदनाम करने में वही लोग लगे हैं, जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया और अंग्रेज़ों के साथ मिलकर इसे नुक़सान पहुँचाया।’

निष्कर्ष:

सोशल मीडिया पर वायरल लॉर्ड माउंटबेटन का कथित पत्र फेक है और इसमें किया गया यह दावा कि भारत को 15 अगस्त 1947 को 99 साल की लीज पर स्वतंत्रता मिली थी, ऐतिहासिक दस्तावेजों से पुष्ट नहीं होता है।

Claim ReviewViral letter claiming India gained independence on a 99-year lease
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Our Sources:

  1. Image analysis of AI Detector tool Truth Scan
  2. Image analysis of AI Detector tool DeepAI
  3. Image analysis of AI Detector tool Image detecter
  4. Indian Independence Act, 1947
  5. Official Website royal.uk
  6. Writer and Historian Ashok Kumar Pandey statement to DFRAC