भारत की मेजबानी में 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, वैश्विक शासन में सुधार, व्यापार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वास्थ्य, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और जलवायु जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली घोषणा-पत्र को स्वीकार किया गया और आतंकवाद की निंदा के साथ वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए बहुपक्षीय सहयोग पर जोर दिया गया।
हालांकि, इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के समानांतर सोशल मीडिया पर BRICS सम्मेलन को लेकर फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं का एक समानांतर नैरेटिव भी देखने को मिला। सम्मेलन से संबंधित पुरानी तस्वीरों और वीडियो को नए संदर्भ में पेश करने से लेकर AI-generated तस्वीरों को वास्तविक बताने तक कई तरह की फेक और भ्रामक सूचनाएं सोशल मीडिया पर प्रसारित की गईं। इन दावों का पैटर्न यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के बीच सोशल मीडिया पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने, पुराने कंटेंट को गलत संदर्भ से जोड़ने और AI-generated सामग्री के जरिए भ्रम पैदा करने की कोशिशें की गईं।
पाकिस्तानी हैंडल्स का प्रोपेगेंडाः
सोशल मीडिया पर Anushi Tiwari Indian नामक पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा हैंडल है। यह हैंडल लगातार भारत की घटनाओं पर भ्रामक तरीके से शेयर करता रहता है। इस यूजर ने एक्स बायो में अपनी लोकेशन उत्तर प्रदेश दिया है, लेकिन एक्स पर दी गई जानकारी के मुताबिक यह साउथ एशिया से संचालित होता है। यह अकाउंट अगस्त 2025 में बनाया गया था, तब से लेकर अब तक इसने 5 बार अपना यूजरनेम चेंज किया है। वहीं War Analyst नामक एक यूजर है, जो पाकिस्तान से संचालित होता है। यह यूजर भी लगातार भारत के खिलाफ फेक और भ्रामक सूचनाएं शेयर करता है। इस अकाउंट को भारत में विथहेल्ड कर दिया गया है।

BRICS पर भ्रामक सूचनाओं का फैक्ट चेकः
अनुशी तिवारी ने एक वीडियो के साथ दावा किया कि दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर युवाओं पर बल प्रयोग किया। एक महिला प्रदर्शनकारी के बाल पकड़कर खींचे गए। हमने जांच में पाया कि यह दावा भ्रामक है। वायरल वीडियो दिल्ली का नहीं है। यह वीडियो आंध्र प्रदेश के तिरुपति में पैरा-मेडिकल छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग करने का है।

अनुशी तिवारी ने एक वीडियो के साथ दावा किया कि ब्रिक्स इवेंट के दौरान, “कॉकरोच” नाम के एक भारतीय संगठन ने दिल्ली की ओर मार्च शुरू किया। प्रदर्शनकारियों को रोकने में पुलिस नाकाम रही और वे दिल्ली में घुस गए। हमने वायरल वीडियो की जांच में पाया कि यह दावा गलत है। दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान ऐसा कोई प्रदर्शन नहीं हुआ है। वहीं जांच में हमने पाया कि वायरल वीडियो वर्ष 2024 में किसानों के प्रदर्शन का है।

एक वीडियो के साथ दावा किया गया कि दिल्ली में BRICS सम्मेलन के दौरान युवाओं ने प्रदर्शन किया, जिन्हें पुलिस ने बलपूर्वक हटा दिया। हमने जांच में इस दावे को भ्रामक पाया। वायरल वीडियो हाल-फिलहाल का नहीं है। यह वीडियो 20 जुलाई को CJP प्रदर्शन के दौरान का है।

जब दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारियां चल रही थीं, उस दौरान अनुशी तिवारी ने एक दावा किया कि दिल्ली के उप-राज्यपाल ने सुरक्षा कारणों से ब्रिक्स सम्मेलन को किसी दूसरी जगह आयोजित करने की गृह मंत्रालय से सिफारिश की थी। हमने जांच में इस दावे को फेक पाया था। उप-राज्यपाल ने ऐसी कोई सिफारिश या रिपोर्ट नहीं सौंपी थी।

War Analyst ने एक वीडियो के साथ दावा किया कि भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान नट्स खाने के वायरल वीडियो पर तीखे सवाल पूछे गए। हमने वायरल वीडियो की जांच में पाया कि यह दावा भ्रामक है और वायरल वीडियो डिजिटली अल्टर्ड है। ओरिजिनल वी़डियो में रणधीर जायसवाल से ऐसा कोई सवाल नही पूछा गया था।

हमने अपनी जांच के दौरान पाया कि कुछ भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स भी थे, जिन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भ्रामक सूचनाएं शेयर की। पीएम मोदी की एक वीडियो के साथ दावा किया गया कि ब्रिक्स सम्मेलन में जैसे ही पीएम मोदी ने बोलना शुरु किया, उनकी माइक बंद कर दी गई।
हमने जांच में पाया कि वायरल वीडियो दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन का नहीं था। यह वीडियो ब्राजील में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन का था। हमने यह भी पाया कि पीएम मोदी की माइक नहीं बंद की गई थी और उन्होंने ब्रिक्स में अपना संबोधन किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का एक वीडियो BRICS सम्मेलन का बताकर यह दावा किया गया कि पीएम मोदी ने खुद की तस्वीर का बना छायाचित्र जिनपिंग को गिफ्ट किया।
हमने जांच में पाया कि वायरल वीडियो BRICS सम्मेलन का नहीं है। यह वीडियो वर्ष 2019 में शी जिनपिंग के भारत दौरे का है। तमिलनाडु में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक-दूसरे को तोहफ़े दिए। शी ने मोदी को एक चीनी सजावटी प्लेट भेंट की जिस पर मोदी की तस्वीर बनी थी, वहीं मोदी ने जिनपिंग को हाथ से बुनी रेशम की शॉल दी, जिस पर जिनपिंग की तस्वीर की कढ़ाई की गई थी।

एक वीडियो के साथ दावा किया गया कि ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के पैर छुए और उनसे आशीर्वाद लिया। DFRAC की जांच में वायरल दावा फेक पाया गया। हमने जांच में पाया कि पीएम मोदी ने पेजेशकियान के पैर नहीं छुए थे और उनका वायरल वी़डियो AI-जनेरेटड था।

निष्कर्षः
BRICS सम्मेलन के दौरान सोशल मीडिया पर फेक और भ्रामक सूचनाओं का प्रसार देखने को मिला। कई यूजर्स ने पुराने, एडिटेड और संदर्भ से हटे हुए कंटेंट को सम्मेलन से जोड़कर साझा किया। इन पोस्ट के जरिए भारत और सम्मेलन से जुड़े घटनाक्रमों को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई।
