Youm-e-Istehsal

यौम-ए-इस्तेहसालः पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा जारी, लेकिन कमजोर पड़ा नैरेटिव

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5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के तहत प्राप्त विशेष संवैधानिक प्रावधानों को समाप्त कर दिया था। इस फैसले के बाद पाकिस्तान ने इसे अपने कश्मीर नैरेटिव का प्रमुख मुद्दा बना लिया और हर साल 5 अगस्त को ‘यौम-ए-इस्तेहसाल’ यानी ‘शोषण दिवस’ के रूप में मनाना शुरू कर दिया। उसके लिए यौम-ए-इस्तेहसाल महज एक प्रतीकात्मक दिवस नहीं है, बल्कि यह उसके कश्मीर-केंद्रित प्रोपेगेंडा कैंपेन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर साल इस दिन पाकिस्तान सरकार और उसके राजनीतिक नेतृत्व की ओर से बयान जारी किए जाते हैं, विदेशों में स्थित पाकिस्तानी एंबेसियों और हाई कमीशनों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तथा सोशल मीडिया पर अलग-अलग हैशटैग, पोस्ट, वीडियो और अन्य कंटेंट के जरिए भारत के खिलाफ नैरेटिव को एम्प्लीफाई करने की कोशिश की जाती है।

पिछले वर्षों की तरह इस बार भी 5 अगस्त को पाकिस्तान ने यौम-ए-इस्तेहसाल को अंतरराष्ट्रीय मंचों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उठाने की कोशिश की। हालांकि, इस साल के सोशल मीडिया ट्रेंड का विश्लेषण एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करता है। यौम-ए-इस्तेहसाल से जुड़े कंटेंट और पोस्टिंग की मात्रा में पिछले वर्षों की तुलना में भारी कमी दिखाई देती है। हालांकि पाकिस्तान का आधिकारिक नैरेटिव और प्रोपेगेंडा अभियान पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन सोशल मीडिया पर उसकी सक्रियता और व्यापकता पहले की तुलना में कमजोर पड़ती नजर आती है।

ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पाकिस्तान इस साल यौम-ए-इस्तेहसाल के जरिए कौन-सा नैरेटिव चला रहा है, बल्कि यह भी है कि इस नैरेटिव की डिजिटल पहुंच और प्रभाव कितना रह गया है? क्या वर्षों से दोहराए जा रहे दावों और हैशटैग्स ने अपनी प्रभावशीलता खोनी शुरू कर दी है? क्या यौम-ए-इस्तेहसाल अब पाकिस्तान के लिए एक नियमित औपचारिकता भर रह गया है? और जब पाकिस्तान कश्मीर के नाम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाता है, तो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में मौजूद राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियां उसके इस नैरेटिव से कितना मेल खाती हैं?

इन्हीं सवालों के आधार पर यह रिपोर्ट यौम-ए-इस्तेहसाल के बहाने पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा एजेंडे, विदेशों में स्थित पाकिस्तानी एंबेसियों की भूमिका, सोशल मीडिया पर कमजोर पड़ते नैरेटिव और POK की जमीनी हकीकत का विश्लेषण करती है। इस रिपोर्ट के प्रमुख बिन्दू इस प्रकार हैं-

  1. यौम-ए-इस्तेहसाल और पाकिस्तानी एजेंडा
  2. प्रोपेगेंडा के केंद्र में पाकिस्तानी एंबेसियां
  3. फीका पड़ा यौम-ए-इस्तेहसाल का नैरेटिव
  4. यौम-ए-इस्तेहसाल का वार्षिक पैटर्न
  5. यौम-ए-इस्तेहसाल और POK की सच्चाई!

1. यौम-ए-इस्तेहसाल और पाकिस्तानी एजेंडाः

इस वर्ष सोशल मीडिया पर इस डिजिटल कैंपेन के तहत खास तौर पर तीन प्रमुख हैशटैग का इस्तेमाल देखने को मिला, जो #YoumeIstehsal, #KashmirBanegaPakistan और #یوم_سیاہ_5_اگستहैं। इन तीनों हैशटैग्स के जरिए अलग-अलग लेकिन आपस में जुड़े संदेशों को एम्प्लीफाई किया गया। हालांकि सोशल मीडिया पर यह हैशटैग्स प्रभावी नहीं रहे। इन तीनों हैशटैग्स के तहत किए गए पोस्ट का विश्लेषण करने पर कुल 161 पोस्ट सामने आए। आंकड़ों से स्पष्ट है कि इस डिजिटल कैंपेन का सबसे बड़ा हिस्सा #YoumeIstehsal के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा।  #YoumeIstehsal के तहत कुल 108 पोस्ट किए गए, जो तीनों हैशटैग्स की कुल पोस्टिंग का लगभग 67 प्रतिशत है। इस हैशटैग के तहत अधिकतम पोस्ट पाकिस्तानी एंबेसियों, कॉन्सुलेट्स और प्रॉक्सी मीडिया संस्थानों की ओर से किए गए। पोस्ट में 5 अगस्त 2019 के फैसले को ‘इस्तेहसाल’के रूप में प्रस्तुत करते हुए भारत विरोधी राजनीतिक और भावनात्मक नैरेटिव को आगे बढ़ाया गया। इन पोस्टों में आधिकारिक बयानों, ग्राफिक्स, वीडियो क्लिप और तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया।

दूसरी ओर, #KashmirBanegaPakistan के तहत केवल 15 पोस्ट दर्ज किए गए। इनमें Pakistan Consulate General Dubai के आधिकारिक एक्स हैंडल से किए गए तीन पोस्ट भी शामिल हैं। कुल पोस्टिंग में इसकी हिस्सेदारी लगभग 9.3 प्रतिशत रही। संख्या के लिहाज से यह #YoumeIstehsal से काफी पीछे रहा, और नैरेटिव के मामले में भी पूरी तरह से फेल रहा।  

तीसरा हैशटैग #یوم_سیاہ_5_اگست यानी ‘5 अगस्त का काला दिवस’ था। इसके तहत 38 पोस्ट किए गए, जो तीनों हैशटैग्स की कुल पोस्टिंग का लगभग 23.6 प्रतिशत है। इन पोस्टों की खास बात यह रही कि इन्हें 5, 6 और 7 अगस्त के दौरान पोस्ट किया गया। उर्दू भाषा में इस हैशटैग का इस्तेमाल मुख्य रूप से पाकिस्तान के घरेलू और उर्दूभाषी सोशल मीडिया दर्शकों तक नैरेटिव पहुंचाने के लिए किया गया। इसके जरिए 5 अगस्त को ‘Black Day’ के रूप में पेश करते हुए भारत विरोधी भावनात्मक संदेश, राजनीतिक दावे और कश्मीर से जुड़े पुराने नैरेटिव को दोहराया गया।  तीनों हैशटैग्स के आंकड़ों की तुलना करने पर एक स्पष्ट hierarchy सामने आती है। #YoumeIstehsal— 108 पोस्ट, #یوم_سیاہ_5_اگست— 38 पोस्ट और #KashmirBanegaPakistan — 15 पोस्ट। यानी कुल 161 पोस्ट में अकेले #YoumeIstehsal की हिस्सेदारी दो-तिहाई से अधिक रही। इसके विपरीत, सीधे राजनीतिक नारे #KashmirBanegaPakistan की गतिविधि अपेक्षाकृत सीमित रही। यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पता चलता है कि पाकिस्तान के इस तरह के नैरेटिव को व्यापक समर्थन नहीं मिला।

हैशटैगपोस्टकुल में हिस्सेदारीप्रमुख नैरेटिव
#YoumeIstehsal10867.1%5 अगस्त को ‘इस्तेहसाल’ और भारत-विरोधी नैरेटिव
#یوم_سیاہ_5_اگست3823.6%5 अगस्त को ‘काला दिवस’ के रूप में पेश करना
#KashmirBanegaPakistan159.3%कश्मीर को पाकिस्तान से जोड़ने का राजनीतिक नारा
कुल161100%

2. प्रोपेगेंडा के केंद्र में पाकिस्तानी एंबेसियांः

पाकिस्तान ने अपने नैरेटिव को सिर्फ घरेलू राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विदेशों में स्थित अपने राजनयिक मिशनों के जरिए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ाने की कोशिश की। इस साल पाकिस्तानी एंबेसियों, हाई कमिशनों और कॉन्सुलेट्स ने अलग-अलग देशों में कार्यक्रम, सेमिनार और सभाएं आयोजित कीं और इन गतिविधियों की तस्वीरें, वीडियो तथा आधिकारिक संदेश सोशल मीडिया पर पोस्ट किए। उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट्स के तीन सेट इस इंस्टीट्यूशनल कैंपेन और उसके नैरेटिव पैटर्न को स्पष्ट करते हैं।

हमने पाया कि सरकारी/राजनयिक अकाउंट, संस्थागत समूह और व्यक्तिगत सोशल मीडिया यूजर एक ही नैरेटिव को अलग-अलग रूपों में पेश करते दिखाई देते हैं। इसमें Pakistan Consulate General Los Angeles, Pakistan Consulate General Frankfurt, Pakistan High Commission South Africa (Pretoria), Pakistan Embassy Mexico और Pakistan Embassy Ukraine की पोस्ट शामिल हैं। इन पोस्ट्स में कहीं कार्यक्रम आयोजित करने, कहीं संदेश जारी करने और कहीं यौम-ए-इस्तेहसाल पर सभा/कार्यक्रम की तस्वीरें शेयर की गई है। एक महत्वपूर्ण pattern सामने आता है कि अलग-अलग देशों में कार्यक्रम अलग हो सकते हैं, लेकिन उनका मुख्य संदेश लगभग एक जैसा है। यानी डिप्लोमैटिक मिशन स्थानीय ऑडियंस और कार्यक्रम के प्रारुप के अनुसार पैकेजिंग बदलते हैं, लेकिन मूल नैरेटिव—5 अगस्त 2019 को कश्मीर के संदर्भ में नकारात्मक घटना के रूप में प्रस्तुत करना है।

कार्यक्रम से पोस्ट तक—कैंपेन का एक समान मॉडलः 

पाकिस्तानी एंबेसियों की रणनीति का एक सामान्य मॉडल सामने आता है: कार्यक्रम आयोजित करना → आधिकारिक संदेश/भाषण → तस्वीर या वीडियो तैयार करना → X पर पोस्ट करना → हैशटैग के जरिए एम्प्लीफाई करना। इस मॉडल में राजनयिक मिशन केवल कार्यक्रमों के आयोजक नहीं बल्कि कॉन्टेंट प्रोड्यूसर्स और नरेटिव एम्प्लीफायर्स की भूमिका भी निभाते दिखाई देते हैं। कार्यक्रमों की तस्वीरें, भाषणों के वीडियो, आधिकारिक बयानों और कश्मीर से जुड़े पोस्टर्स को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ऑफलाइन डिप्लोमैटिक एक्टिविटी को ऑनलाइन इन्फॉरमेशन कैंपेन में बदला गया।

3.फीका पड़ा यौम-ए-इस्तेहसाल का नैरेटिवः

पाकिस्तानी एंबेसियों और हाई कमिशनों ने यौम-ए-इस्तेहसाल के मौके पर कई देशों में स्थित अपनी एंबेसियों में कार्यक्रम आयोजित किए और उनके वीडियो, तस्वीरें तथा आधिकारिक संदेश X पर साझा किए। लेकिन इन पोस्ट्स के व्यूज और लाइक्स का डाटा इन गतिविधियों के सीमित डिजिटल प्रभाव की ओर संकेत करता है। उपलब्ध पोस्ट्स में कई राजनयिक मिशनों के कंटेंट को कुछ दर्जन से लेकर कुछ सौ व्यूज ही मिले, जबकि लाइक्स की संख्या अधिकांश मामलों में इकाई अंक तक सीमित रही। 

Pakistan Consulate General Los Angeles की पोस्ट पर लगभग 99 व्यूज और 1 लाइक, Pakistan Consulate General Frankfurt की पोस्ट पर करीब 88 व्यूज और 1 लाइक, Pakistan High Commission South Africa की पोस्ट पर करीब 225 व्यूज और 1 लाइक, Pakistan Embassy Mexico की पोस्ट पर 271 व्यूज और 4 लाइक्स, जबकि Pakistan Embassy Ukraine की पोस्ट पर करीब 276 व्यूज और 3 लाइक्स दिखाई देते हैं। यानी अलग-अलग देशों में राजनयिक स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों के बावजूद इन पोस्ट्स पर public engagement काफी सीमित रहा। Pakistan High Commission Ghana की पोस्ट को करीब 79 व्यूज और 1 लाइक, जबकि Pakistan Consulate General Vancouver की पोस्ट को करीब 133 व्यूज और 2 लाइक मिले। Pakistan Embassy Jordan की पोस्ट को लगभग 440 व्यूज मिले, लेकिन लाइक की संख्या शून्य दिखाई देती है। वहीं Pakistan Embassy USA, Washington की पोस्ट को लगभग 2,921 व्यूज और 7 लाइक्स मिले—जो इस समूह में व्यूज के लिहाज से अपेक्षाकृत अधिक है, लेकिन इतने व्यूज के मुकाबले लाइक्स और अन्य इंप्रेशन फिर भी सीमित हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि राजनयिक मिशनों की इंस्टीट्यूशनल रीच अपने आप में व्यापक पब्लिक इंटरेस्ट या इंगेजमेंट में तब्दील नहीं हुई।

4. यौम-ए-इस्तेहसाल का वार्षिक पैटर्नः

यौम-ए-इस्तेहसाल के मौके पर सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी नैरेटिव की सक्रियता में पिछले कुछ वर्षों में लगातार गिरावट दिखाई देती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2022 में करीब 3,000 पोस्ट किए गए थे। इसके अगले वर्ष 2023 में यह संख्या घटकर करीब 250 पोस्ट रह गई, जबकि 2024 में कुल 173 पोस्ट दर्ज किए गए। सबसे बड़ी गिरावट 2022 से 2023 के बीच दिखाई देती है। करीब 3,000 पोस्ट से घटकर 250 पोस्ट रह जाने का मतलब है कि पोस्टिंग वॉल्यूम में लगभग 91.7 प्रतिशत की कमी आई। यानी एक साल के भीतर यौम-ए-इस्तेहसाल से जुड़ी सोशल मीडिया गतिविधि अपने पिछले स्तर के दसवें हिस्से से भी कम रह गई। इसके बाद 2023 से 2024 के बीच भी गिरावट जारी रही। करीब 250 पोस्ट से घटकर यह संख्या 173 पोस्ट रह गई, यानी लगभग 31 प्रतिशत की और कमी। इस तरह 2022 के करीब 3,000 पोस्ट की तुलना में 2024 के 173 पोस्ट लगभग 94 प्रतिशत कम थे। 

5. यौम-ए-इस्तेहसाल और POK की सच्चाई!

यौम-ए-इस्तेहसाल के संदर्भ में देखने पर एक महत्वपूर्ण नैरेटिव विरोधाभास सामने आता है। पाकिस्तान 5 अगस्त को भारत के खिलाफ कश्मीर-केंद्रित नैरेटिव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एम्प्लीफाई करता है, लेकिन उसी समय उसके अपने नियंत्रण वाले PoK में राजनीतिक और सामाजिक असंतोष तथा बलूचिस्तान में विरोध और सुरक्षा संकट उसकी घरेलू चुनौतियों को उजागर करते हैं। 2026 में PoK में Joint Awami Action Committee (JAAC) के नेतृत्व में लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन हुए। यह विरोध सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। जून 2026 में रावलकोट में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम 11 लोगों की मौत की रिपोर्ट सामने आई, जबकि इसके बाद भी क्षेत्र में तनाव बना रहा। जुलाई में JAAC ने मुजफ्फराबाद की ओर प्रस्तावित लॉन्ग मार्च को अस्थायी रूप से स्थगित किया। PoK की स्थिति का सबसे अहम पहलू यह है कि असंतोष सीधे स्थानीय शासन और इस्लामाबाद की भूमिका से जुड़ा हुआ है। जुलाई-अगस्त में क्षेत्रीय चुनावों के दौरान भी तनाव कम नहीं हुआ। हिंसा, सड़क बंद होने और इंटरनेट ब्लैकआउट के बीच कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान तक स्थगित करना पड़ा। यानी जिस समय पाकिस्तान 5 अगस्त को कश्मीर के नाम पर भारत के खिलाफ ‘दमन’ और ‘अधिकारों के उल्लंघन’ का प्रोपेगेंडा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा रहा था, उसी समय उसके नियंत्रण वाले PoK में लोग राजनीतिक प्रतिनिधित्व, शासन, आर्थिक सुविधाओं और अपने अधिकारों को लेकर सड़कों पर थे।

निष्कर्षः

यौम-ए-इस्तेहसाल पाकिस्तान के लिए हर साल कश्मीर-केंद्रित प्रोपेगेंडा और नैरेटिव को दोहराने का एक प्रमुख अवसर बना हुआ है। पाकिस्तान सरकार और उसके राजनयिक मिशनों ने इस दिन को भारत-विरोधी राजनीतिक अभियान के रूप में इस्तेमाल किया है। 2026 में भी पाकिस्तान ने देशभर में कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय आउटरीच की योजना बनाई और विदेशों में स्थित अपने मिशनों के जरिए इसी नैरेटिव को आगे बढ़ाया। हालांकि, पिछले उपलब्ध आंकड़ों से तुलना करने पर भी डिजिटल गतिविधि में बड़ी गिरावट दिखाई देती है—2022 में करीब 3,000 पोस्ट से घटकर 2023 में करीब 250 और 2024 में 173 पोस्ट रह गईं और 2026 में 161 पोस्ट रह गए। इससे संकेत मिलता है कि पाकिस्तान का कश्मीर नैरेटिव अभी भी मौजूद है, लेकिन उसकी डिजिटल व्यापकता कमजोर हुई है। दूसरी ओर, सबसे बड़ा विरोधाभास PoK की स्थिति में दिखाई देता है। जिस समय पाकिस्तान कश्मीर में ‘अधिकार’ और ‘आत्मनिर्णय’ का सवाल उठा रहा था, उसी समय उसके नियंत्रण वाले PoK में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आर्थिक परिस्थितियों और शासन व्यवस्था को लेकर गंभीर विरोध और हिंसा हुई, जो उसकी सच्चाई सामने लाती है और प्रोपेगेंडा की पोल खोलती है।