Ken-Betwa protest

फैक्ट चेकः केन-बेतवा विरोध प्रदर्शन का वीडियो मणिपुर में सेना द्वारा महिलाओं पर बर्बरता का बताकर भ्रामक दावा किया गया

Fact Check hi Featured Misleading

केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में ग्रामीणों, किसानों और आदिवासियों ने कई दिनों तक प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुआवजा, गलत सर्वे, और कम पुनर्वास राशि दिए जाने का आरोप लगाया था। प्रदर्शनकारियों ने नदी के किनारे ‘चिता आंदोलन’ और जल सत्याग्रह किया गया था, जिसके कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर भी वायरल हुए थे।

इस बीच सोशल मीडिया पर इसी प्रदर्शन से जुड़े एक वीडियो को मणिपुर का बताकर शेयर किया गया है। इस वीडियो में कुछ पुलिसकर्मियों को एक बुजुर्ग महिला को कथित तौर पर घसीटकर ले जाते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो को एक यूजर ने शेयर कर दावा किया है कि यह मणिपुर का वीडियो है, जहां भारतीय सेना द्वारा महिलाओं के साथ बर्बरता की जा रही है। कोमल तिवारी नामक यूजर ने वीडियो को शेयर करते हुए अंग्रेजी भाषा में कैप्शन लिखा, जिसका हिन्दी अनुवाद है, ‘भारतीय सेना मणिपुर के लोगों के साथ “आतंकवादियों” जैसा बर्ताव क्यों करती है? R&AW प्रमुख पराग जैन मणिपुर को जलने दे रहे हैं। सत्ता शायद हमेशा न रहे, लेकिन लोग इस बर्बरता को नहीं भूलेंगे, सर।’

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फैक्ट चेकः

DFRAC की टीम ने जांच में पाया कि यह वीडियो मणिपुर का नहीं है। कई डिजिटल मीडिया संस्थानों ने इस वीडियो को केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में आंदोलन कर रही महिला को कथित तौर पर पुलिस द्वारा घसीटे जाने का बताकर शेयर किया है। वहीं, DFRAC की टीम ने Public Vani News से संपर्क किया, तो उन्होंने भी हमें बताया कि वायरल वीडियो मध्य प्रदेश के छतरपुर का है।

हमारी टीम ने जांच के लिए सबसे पहले वायरल वीडियो को की-फ्रेम्स में कन्वर्ट किया, फिर इन फ्रेम्स को गूगल लेंस की मदद से रिवर्स इमेज सर्च किया। हमें यह वीडियो मध्य प्रदेश के डिजिटल मीडिया संस्थान Public Vani News के फेसबुक पेज पर 31 जुलाई को पोस्ट मिला। इस पोस्ट के साथ जानकारी दी गई है, ‘वृद्ध आदिवासी महिला पर पुलिसिया जोर शर्मनाक है | Ken Betwa Link Project छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध के दौरान पुलिस कार्रवाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है. वीडियो में एक बुजुर्ग आदिवासी महिला को पुलिसकर्मियों द्वारा हटाते हुए देखा जा सकता है. प्रदर्शनकारी दावा कर रहे हैं कि वे जल सत्याग्रह, अनशन और चिता आंदोलन के माध्यम से अपनी ज़मीन, जंगल, घर और उचित मुआवज़े की मांग कर रहे थे.’

आगे की जांच में हमने पाया कि इस वीडियो को कई अन्य डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्मस द्वारा भी केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़ा बताया गया है। पब्लिक एप पर इस वीडियो के साथ जानकारी दी गई है, ‘बिजावर: केन-बेतवा लिंक परियोजना के चिता आंदोलन: महिलाओं को घसीटने का वीडियो वायरल, आदिवासी परिवारों ने उठाए सवाल.. आंदोलन कारी अमित भटनागर ने शुक्रवार की सुबह करीब 10 बजे केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों के ‘चिता आंदोलन’ के दौरान महिलाओं को पुलिस द्वारा कथित रूप से घसीटे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर जाती किया है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि वे अपने जल, जंगल, जमीन और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।’

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वहीं इस संदर्भ में और ज्यादा जानकारी के लिए हमारी टीम ने Public Vani News से संपर्क किया। उन्होंने वीडियो के साथ किए गए वायरल दावे का खंडन किया और बताया कि यह वीडियो मध्य प्रदेश के छतरपुर का है।

निष्कर्षः

DFRAC के फैक्ट चेक से साफ है कि वायरल वीडियो के साथ किया गया दावा भ्रामक है। यह वीडियो मणिपुर का नहीं है। कई डिजिटल मीडिया रिपोर्ट्स में इस वीडियो को केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा बताया गया है।

Claim ReviewBrutality against women by Indian Army in Manipur
Claimed ByX UserKomal Tiwari
Fact CheckMisleading

Our Sources:

  1. Facebook video of Public Vani News, Posted on July 31st, 2026
  2. Coverage of Public News on July 31st, 2026
  3. Public Vani News Statement to DFRAC