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बुधवार, नवम्बर 30, 2022
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निर्भया केस में सबको फांसी हुई लेकिन एक दोषी मोहम्मद अफरोज बच गया? पढ़ें- फैक्ट चेक

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सोशल मीडिया साइट्स पर एक दावा किया जा रहा है कि निर्भया केस में सभी दोषियों को फांसी की सज़ा हुई मगर जिसने सबसे ज़्यादा बर्बरता की थी, उसका नाम मोहम्मद अफ़रोज़ है और उसे नाबालिग़ होने के कारण छोड़ दिया गया।

सेवा भारत न्यूज़ ने फ़ेसबुक पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की एक तस्वीर शेयर करते हुए पोस्ट किया, “सबको फांसी हुई लेकिन एक राक्षस बच गया, “#मोहम्मद_अफरोज” जिसको अरविंद केजरीवाल ने एक “सिलाई मशीन” और 10,000 रूपये दिए थे। जिसने निर्भया के साथ इतना गंदे तरीके से बलात्कार किया वो नाबालिग कैसे ???? क्योंकि मोहम्मद अफरोज. आप नेता MLA मुस्लिम वक्फ बोर्ड के Delhi चेयरमैन अमतुल्लाह खान का चाचा का लड़का था केजरीवाल ने मुस्लिम वक्फ  बोर्ड के वकीलो की टीम ने दाव पेच खेलकर डाक्टरी झूठी ऊमर का मेडिकल सर्टिफिकेट बनाकर बचा लिया”

फ़ैक्ट चेक

उपरोक्त दावे की जांच-पड़ताल के लिए हमने गूगल पर कुछ की-वर्ड की मदद से सर्च किया। हमें इस बाबत अलग अलग मीडिया हाउसेज़ द्वारा पब्लिश कई रिपोर्ट्स मिले।

बीबीसी हिंदी की एक रिपोर्ट के अनुसार निर्भया केस के कुल 6 दोषी थे। 

बस ड्राइवर राम सिंह और उसका छोटा भाई, मुकेश सिंह। इनका परिवार 20 वर्ष पहले राजस्थान से दिल्ली आया था। इनका घर दक्षिण दिल्ली के रविदास झुग्गी झोपड़ी कॉलोनी में था। इनके अलावा जिन्हें कोर्ट ने दाषी क़रार दिया उनमें विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर, पवन गुप्ता और एक नाबालिग़ था। 

BBC Hindi

इनमें से राम सिंह ने सज़ा काटने के दौरान जेल में आत्महत्या कर ली थी और नाबालिग़ को तीन साल के लिए बाल-सुधार गृह भेज दिया गया था। भारतीय क़ानून के तहत किसी भी नाबालिग़ को दी जाने वाली ये सज़ा की सबसे ज़्यादा मियाद है। उसका नाम ज़ाहिर करने पर क़ानूनी रोक है, इसलिए उसके नाम और पतो को गुप्त रखा गया है। 

वन इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में हिंदुस्तान टाइम्स के हवाले से लिखा है कि- “नाबालिग के पुनर्वास प्रोसेस में शामिल रहे एक अफसर ने बताया कि उसको हमेशा मारे जाने का डर लगा रहता था। इसलिए उसे साउथ इंडिया में कहीं शिफ्ट किया गया। वह अभी एक जाने-माने रेस्टोरेंट में काम कर गुजर-बसर करता है। जिस शख्स ने उसे काम पर रखा है, उसे भी जूवेनाइल के पुराने इतिहास के बारे में नहीं बताया गया है।अधिकारी का कहना है कि आफ्टर केयर प्रोग्राम के तहत हम लोग उसकी पहचान को पब्लिक नहीं कर सकते। उसको प्रोटेक्ट करना हमारा काम है।” 

निष्कर्ष

DFRAC के इस फ़ैक्ट चेक से स्पष्ट है कि निर्भया केस में नाबालिग़, हिंदू था या मुस्लिम, उसके नाम व पता को क़ानून के तहत गुप्त रखा गया है, कोई नहीं जानता कि वो कौन है? अगर कोई उसे जान भी जाए और उसके नाम व पता को उजागर करे तो ये अपराध होगा, इसलिए सोशल मीडिया यूज़र्स का दावा फ़ेक और भ्रामक है। 

दावा: निर्भया केस में सबको फांसी हुई लेकिन एक राक्षस #मोहम्मद_अफरोज बच गया

दावाकर्ता: सोशल मीडिया यूज़र्स

फ़ैक्ट चेक: फ़ेक

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