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बुधवार, सितम्बर 28, 2022
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फैक्ट चेक: इंडिया गेट पर 61,945 मुस्लिम शहीदों के लिखे हैं नाम, एक भी संघी नहीं?

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इंटरनेट पर एक दावा वायरल हो रहा है जिसमें लोग भारत के स्वतंत्रता संग्राम में हिंदुओं और मुस्लिमों की भागीदारी की तुलना कर रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स दावा कर रहे हैं कि दिल्ली के इंडिदिल्ली पर 95300 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखे गए हैं, जिनमें से 61945 मुस्लिम नाम हैं, जिसका मतलब है कि 65% स्वतंत्रता सेनानी मुस्लिम थे। तस्वीर के साथ एक सोशल मीडिया यूजर @im_innocentfeku ने लिखा, “पूरा देश # MuslimFreedomFighters का ऋणी है अगर इसे पसंद करते हैं या नहीं ।”
(“The whole Nation is indebted of #MuslimFreedomFighters if do like it Or dont.”)

इतना ही नहीं, कई रिपोर्ट्स में भी ऐसा ही दावा किया जा रहा है।

फैक्ट चेक:


DFRAC ने विश्लेषण में पाया कि वायरल तस्वीर में कई भ्रामक और असत्य तथ्य हैं। हमने नीचे प्रत्येक दावे की जांच की है।

झूठा दावा 1:
वायरल तस्वीर में एक उद्धरण लिखा है कि “भारतीय स्वतंत्रता संग्राम मुस्लिम खून से लिखा गया है।” और, लेखक का नाम जसवंत सिंह लिखा है।

फैक्ट चेक:
कीवर्ड सर्च करने पर DFRAC डेस्क ने पाया कि इस लाइन के लेखक जसवंत सिंह नहीं बल्कि प्रसिद्ध पत्रकार और लेखक खुशवंत सिंह हैं।

झूठा दावा 2:
India Gate, पर 95300 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखे हैं, जिनमें से 61,945 मुस्लिम हैं।

फैक्ट चेक:
Commonwealth war graves commission के अनुसार , प्रथम विश्व युद्ध में और एंग्लो-अफगान में अंग्रेजों के लिए लड़ते हुये शहीद होने वाल सैनिकों की याद में इंडिया गेट पर 13220 नाम लिखे गए हैं।

इसलिए, यह दावा कि इंडिया गेट युद्ध स्मारक में 61945 मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के नाम उत्कीर्ण हैं, झूठा है।
इसके अलावा, DFRAC विश्लेषण में पाया गया कि यह पहली बार नहीं है जब यह दावा वायरल हुआ है। 2019 में भी ऐसे पोस्ट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए थे।


झूठा दावा 3:
RSS के किसी भी प्रचारक का नाम India Gate में नहीं लिखा गया है ।

फैक्ट चेक:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में की थी और प्रथम विश्व युद्ध 1914-18 के बीच और तीसरा एंग्लो अफगान युद्ध 1919 में हुआ था।
इंडिया गेट पर लिखा नाम WW1 और तीसरे एंग्लो अफगान युद्ध में शहीद हुए सैनिक की याद में हैं। उस समय संगठन का अस्तित्व भी नहीं था। इसलिए, RSS से किसी का नाम नहीं लिखे जाने का दावा करना भ्रामक है।

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