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पार्ट 1 : जाकिर नाईक का संगठन प्रतिबंधित लेकिन उसका मिशन अब भी जारी

भारत सरकार ने कट्टर सलाफ़ी स्कॉलर जाकिर नाईक के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को सबसे पहले 2016 मे प्रतिबंधित किया था उसके बाद अभी दुबारा से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रतिबंधित कर दिया है। 2016 के  बाद से जाकिर नाईक भारत से फरार है। भारत सरकार ने उसका चैनल, वेबसाइट, ट्विटर और फेसबुक अकाउंट को प्रतबंधित कर दिया। लेकिन आज भी भारत में उसका मिशन उसके समर्थकों द्वारा जारी है जो समाज मे कट्टर और उग्र इस्लाम जिसको सलाफ़ी या वहाबी विचारधारा भी कहते है के प्रसार मे लिप्त है।

कौन है जाकिर नाइक?

जाकिर नाईक का जन्म महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में 18 अक्टूबर 1965 को हुआ था। वह पेशे से एक एमबीबीएस डॉक्टर रहे है। इसके अलावा दुनिया भर में उनकी पहचान एक मुस्लिम धर्मगुरु, राइटर और स्पीकर की है। जाकिर नाईक इस्लाम धर्म के सबसे रूढ़िवादी पंथ वहाबियत को मानने वाले है। जो कुरान और हदीस की कठोर व्याख्या करता है। वह इस्लामिक रिसर्च फांउडेशन (आईआरएस) नामक संस्था भी चलाते है। संस्था का पीस टीवी नामक चैनल भी है। जिसके जरिये नाईक इस्लामिक शिक्षा प्रदान करने का दावा करते है। विश्वभर में उनके इस चैनल को हजारो लोगों के द्वारा देखा जाता है।

जाकिर नाइक पर कट्टर विचारधारा फैलाने का आरोप

1 जुलाई 2016 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुए बम ब्लास्ट के बाद जाकिर नाईक चर्चा में आए थे। जिसमें 29 लोग मारे गए थे। ब्लास्ट के बाद गिरफ्तार आरोपियों में से एक जाकिर नाईक से प्रभावित था। ब्लास्ट के बाद भारत में जाकिर नाईक के खिलाफ जांच शुरू हुई। जिसमे पाया गया कि उनके बयान आपत्तिजनक हैं और विभिन्न समुदायों के बीच नफरत फैलाते है। जांच के बाद जाकिर नाईक की संस्था को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया। इस दौरान वह भारत छोड़ मलेशिया फरार हो गया। भारत सरकार ने जाकिर नाईक के खिलाफ इंटरपोल नोटिस भी जारी किया हुआ है।

सोशल मीडिया पर जाकिर नायक का मिशन जारी 

जाकिर नाईक के भारत से फरार होने के बाद भी सोशल मीडिया विशेषकर ट्विटर पर उसके समर्थक उसकी विचारधारा को फैलाने में जुटे है। कई ऐसे अकाउंट है। जिनका विश्लेषण करने पर पता चलता है कि वे पूरे प्रयास के साथ इस काम को अंजाम दे रहे है। हमारी टीम ने जाकिर नाईक के फरार होने के बाद से कई ऐसे संगठनो की पड़ताल की और पाया कि ये सब आईआरएफ़ पर प्रतिबंध के बाद से ही अचानक काफी एक्टिव हो गए, हमने यहाँ पर कुछ का ट्विटर अकाउंट और उनकी पोस्ट का विश्लेषण किया है। जिसके अध्ययन से ये बात साफ जाहिर होती है ये सभी संगठन और व्यक्ति आईआरएफ़ और ज़ाकिर नायक की स्टाइल मे ही उसके मिशन के आगे बढ़ाने मे अग्रसर हैं।

AIDCA

AIDCA का पूरा नाम आल इंडिया दावा सेंटर एसोसिएशन है। ये खुद को धर्मार्थ संगठन (चेरिटेबल  ऑर्गेनाइजेशन) बताता है। संगठन का कार्यालय मुंबई में है। जहां से ये अपनी गतिविधियों को संचालित करता है। दावा का अर्थ इस्लाम मे दूसरे धर्म के लोगो को इस्लाम कि शिक्षाए बताना और उनको इस्लाम की तरफ बुलाना होता है। AIDCA का मुख्य उद्देश्य इसके फ़ेस बुक पेज़ के अनुसार लोगो मे  दावा का काम यानि इस्लाम की तरफ बुलाना है।

इसके तीन प्रमुख उद्देश्य है।

1) दावा केंद्रों के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा करना।

2) साझा मंचों में संसाधन साझा करने को सक्षम बनाना।

3) दावा गतिविधियों को बढ़ाने में सहयोग करना।

सोशल मीडिया विशेषकर ट्विटर पर AIDCA के अकाउंट  सक्रिय है। ये सभी जाकिर नाईक के समर्थन में ट्वीट करते हुए पाये गए है।

  • @AIDCAofficial के ट्वीट

Tweet – 1 Tweet – 2

@AidcaMedia के ट्वीट

Tweet – 1

Tweet – 2

Tweet – 3

Tweet -4

 

उपरोक्त ट्वीट से पता चलता है कि AIDCA भारत में ज़ाकिर नाईक के समर्थन में कैम्पेन चलाने में अग्रणी रहा।

AIDCA के टाइमलाईन का विश्लेषण

  • पोस्ट टाईम लाइन

AIDCA मीडिया की ट्विटर टाइमलाइन से पता चलता है कि ये अकाउंट 14 अप्रैल 2020 से 19 अप्रैल 2020 तक सक्रिय था।

  • वर्डक्लाउड

वर्डक्लाउड दिखाता है कि AIDCA मीडिया के ट्वीट्स में ज्यादातर ISIS, जाकिर नाइक, मुस्लिम, भारत, आदि शब्दो का प्रयोग किया गया है।

  • अकाउंट मेंशन

नीचे दिया गया ग्राफ़ उन अकाउंट की जानकारी देता है, जिनको एआईडीसीए मीडिया द्वारा ज़्यादातर टैग या मेंशन किया गया था। @Aidcaofficial को 246 बार, उसके बाद @AidcaMedia और @peace_moin को 197 और 76 बार टैग किया गया।

  • हैशटैग का इस्तेमाल

नीचे दिए गए ग्राफ़ से पता चलता है कि AIDCA मीडिया द्वारा 170 से अधिक बार #ISISMadeInUSA, इसके बाद #कुर्बानी को 72, और #ZakirsLetterToIndians को 28 बार प्रयोग किया गया।

  • एआईडीसीए मीडिया के फोलोवर

AIDCA मीडिया के 2,500 से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। जिनमे कुछ बड़े फॉलोअर्स भी शामिल हैं – @milligazette, @PeaceMoin, @yehlog, @advfaizsyed

मुहम्मद आमिर कश्मीरी

मुहम्मद आमिर कश्मीरी इस्लामिक बिरादरी कश्मीर के अध्यक्ष, समाचार पत्र “द इस्लामिक रिवाइवल” के संपादक, इस्लामिक ग्लोबल स्कूल कश्मीर के अध्यक्ष, और रेडियो सावत-उल-इस्लाम के निदेशक है। वह भविष्य में -उल-इस्लाम की और से एक इस्लामिक रिवाइवल टीवी चैनल स्थापित करने का इरादा रखते हैं। इसके अलावा उनकी मेडिकल और इंजीनियरिंग स्ट्रीम सहित उच्च शिक्षा के लिए संस्थान स्थापित करने की भी योजना है।

  • सौतउलइस्लाम रेडियो स्टेशन:

मुहम्मद आमिर ने कश्मीरी युवाओं को रेडियो के माध्यम से वहाबी शिक्षा देने के लिए इस्लामिक ऑनलाइन रेडियो ‘सौत-उल-इस्लाम’ शुरू करने का दावा किया। रेडियो स्टेशन पहली बार 2017 में लाइव हुआ था। इस दौरान उन्हे रेडियो को बंद करने की धमकी भी मिली थी।

मुहम्मद आमिर कश्मीरी के ट्वीट

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मुहम्मद आमिर की टाइम लाइन का विश्लेषण

  • टाइमलाइन

मोहम्मद आमिर की टाइमलाइन बताती है कि वह ट्विटर पर काफी एक्टिव रहते हैं। उन्होंने 13 अक्टूबर, 2021 को सबसे ज्यादा ट्वीट पोस्ट किए हैं।

  • वर्डक्लाउड

वर्डक्लाउड दिखाता है कि मुहम्मद आमिर के ट्वीट में ज्यादातर कश्मीर, भारत, श्रीनगर, कश्मीरी, मारे गए, इस्लाम, आदि  शब्दों का इस्तेमाल किया गया।

  • अकाउंट मेनशन:

नीचे दिया गया ग्राफ़ उन अकाउंट को दिखाता है जिनका टैग या मेंशन किया गया। मोहम्मद आमिर द्वारा सबसे अधिक बार @revivalnews1 को 150 से अधिक बार, उसके बाद @PeaceMoin को 95 और @MirwaizKashmir को 45 बार टैग किया गया।

  • हैशटैग का इस्तेमाल

नीचे दिए गए ग्राफ़ से पता चलता है कि मोहम्मद आमिर द्वारा सबसे अधिक बार कौन से हैशटैग का उपयोग किया गया। #कश्मीर का सबसे अधिक 122 बार उपयोग किया गया, उसके बाद #कश्मीरी, #श्रीनगर और #फ़िलिस्तीन में क्रमशः 22, 16 और 13 बार उपयोग किया गया।

  • मुहम्मद आमिर के फॉलोवर

मोहम्मद आमिर के ट्विटर अकाउंट पर 2200 से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। उनका फॉलो करने वालों में @SleepSkee, @MuhammadSmiry, @TurgayEvren1, आदि शामिल है।

यासिर अराफ़ात

यासिर अराफ़ात पैगाम एनजीओ में संस्थापक है। वह खुद को एक सामाजिक कार्यकर्ता बताते है। वह अपनी पैगाम एनजीओ के माध्यम से कुछ सामाजिक कार्य करते है। उनकी टाइमलाइन का विश्लेषण कर हमने पाया कि वह ज़ाकिर नाईक के पक्के समर्थक है। उनके ज़्यादातर ट्वीट और पोस्ट कथित रूप से कुरान और हदीस के हवाले से होते है।

यासिर अराफ़ात के ट्वीट

Tweet – 1 Tweet – 2
Tweet – 3 Tweet -4
Tweet – 5 Tweet – 6

 

यासिर अराफ़ात की टाइमलाईन का विश्लेषण

  • टाईमलाइन:

YasirPost की टाइमलाइन बताती है कि वह ट्विटर पर काफी एक्टिव रहते हैं, जनवरी 2020 से जुलाई 2020 तक उन्होने सबसे ज्यादा ट्वीट किए।

  • वर्डक्लाउड:

वर्डक्लाउड दिखाता है कि यासिर पोस्ट के ट्वीट्स में ज्यादातर मुस्लिम, भारत, पुलिस, कांग्रेस, आदि शब्दों का इस्तेमाल किया गया।

  • मेंशन अकाउंट:

नीचे दिया गया ग्राफ उन अकाउंट को दिखाता है जिनका उल्लेख यासिर पोस्ट द्वारा अधिकतम बार किया गया। @YasirPost ने खुद को 380 से अधिक बार टैग किया, उसके बाद @PeaceMoin और @007AliSohrab को क्रमशः 190 और 39 बार टैग किया।

  • हैशटैग का इस्तेमाल:

नीचे दिए गए ग्राफ़ से पता चलता है कि यासिर पोस्ट ने सबसे अधिक बार कौन से हैशटैग का उपयोग किया। जिसमे #Ia_ilaha_illallah को 68 से अधिक बार, इसके बाद #Islamophobia_in_india को 56 बार और  #muslimphobia_in_india को 42 से अधिक बार उपयोग किया।

  • यासिर के फोलोवर

यासिर पोस्ट के ट्विटर अकाउंट पर 61 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। उनको फॉलो करने वालो में @nekoja_nekoja_, @Ahmedkabbash1, @shama7764 जैसे बड़े अकाउंट भी शामिल हैं।

निष्कर्ष:

टेरर फंडिंग से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग तक के आरोपो का सामना कर रहे जाकिर नाईक के भारत से फरार होने के बाद भी उसका मिशन अब भी जारी है। भारत से फरार होने से पहले जाकिर नाईक द्वारा अपनी कट्टर विचारधारा को फैलाने के लिए देश के कौने-कौने में कई संगठनों की एक चैन बनाई गई थी। जो उसके समर्थन में उसके जाने के साथ ही सक्रिय हुई।

इन संगठनों ने देश भर में जाकिर नाईक के समर्थन में मुहिम चलाई। उसके समर्थन में सोशल मीडिया पर बकायदा कैम्पेन चले। #ZakirsLetterToIndians, #Islamophobia_in_india, #muslimphobia_in_india जैसे हेशटेग का बड़ा प्रयोग किया गया।  ताकि जाकिर नाईक की मुस्लिम समुदाय में मजलूम अर्थात पीड़ित की छवि बन सके और इसे भारत में मुस्लिमों पर अत्याचार के रूप में संदर्भित किया जा सके। उपरोक्त विश्लेषण से भी ये ही साबित होता है।

  • ज़ाकिर नाईक के उपरोक्त समर्थक ट्विटर अकाउंट सभी एक-दूसरे को फॉलो करते है।
  • इन अकाउंट ने कई ट्वीट में एक दूसरे को मेंशन किया। कई ने एक-दूसरे के ट्वीट रीट्वीट भी किए।