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फैक्ट-चेक: दैनिक जागरण अखबार की प्रतियां जलाए जाने की सच्चाई

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3 अक्टूबर 2021 को यूपी के लखीमपुर इलाके में एक बड़े हादसे की खबर वायरल हुई। आरोप लग रहे हैं कि केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा ने कथित तौर पर इलाके में विरोध कर रहे किसानों को अपनी गाड़ी से रौंद दिया। जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई लोग घायल हैं। इस घटना के बाद केंद्रीय मंत्री और उनके बेटे के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन हो रहा है। यह घटना दैनिक जागरण सहित देश के सभी अखबारों की फ्रंट पेज की मुख्य स्टोरी है।

दैनिक जागरण की कवरेज से सोशल मीडिया के यूजर्स खफा हैं। उनका आरोप है कि अखबार ने किसानों को कुचलने वाले मंत्री के बेटे पर दोष मढ़ने की बजाय किसानों पर ही दोष मढ़ दिया।

दैनिक जागरण का फ्रंट पेज

लोग दैनिक जागरण के बहिष्कार की अपील कर रहे हैं। तो वहीं कुछ दैनिक जागरण के खिलाफ पेपर को जलाए जाने की तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं। दैनिक जागरण अखबार को जलाए जाने की एक ही तस्वीर इस्तेमाल की जा रही है।

फैक्ट चेकः

तस्वीर को गूगल पर रिवर्स सर्च करने पर हमें 26 अप्रैल 2020 की एक फैक्ट-चेक रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट में, बूम वेबसाइट ने भारत में मीडिया का बहिष्कार करने के लिए जलाए जा रहे अखबारों की तस्वीरें मिलीं। जिसमें पाया कि ये तस्वीरें तब ली गईं जब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अखबार की प्रतियां जला दीं, क्योंकि दैनिक जागरण ने गलती से अखिलेश यादव की छवि का इस्तेमाल शराब के बारे में एक असंबंधित लेख में किया था। हालांकि बाद में अखबार ने इसके लिए माफी भी मांगी थी।

चूंकि दैनिक जागरण के अखबार को जलाए जाने की घटना 2020 की है। इसलिए इसका किसानों की हत्या किए जाने वाली घटना की कवरेज के बाद का नहीं है। हमारी पड़ताल के बाद यह साबित हो रहा है कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा भ्रामक है।

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