सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे एक खास दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। पोस्ट करने वाले यूजर्स का कहना है कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति एक मुस्लिम शख्स है, जो भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। जैसे ही उसने मूर्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, उसी समय वहां मौजूद एक गाय ने उस पर हमला कर दिया। वायरल पोस्ट में यह भी कहा जा रहा है कि वायरल वीडियो उसी स्थान पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज है।
मनोज श्रीवास्तव नामक एक यूजर ने इस वीडियो को शेयर कर लिखा, ‘*मोहम्मद ने* *भगवान कृष्ण की मूर्ति पर* *हमला करने की कोशिश की* *पूरी घटना CCTV में रिकॉर्ड* *हमले के समय वहां मौजूद* *भक्त गौ माता ने* *उसे जो सजा दी* *वह भी रिकॉर्ड हो गया*’

वहीं, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी इस वीडियो को मुस्लिम शख्स द्वारा श्रीकृष्ण की मूर्ति तोड़ने की कोशिश के दावे के साथ शेयर किया गया है। एक फेसबुक यूजर Ashok Pathak ने वीडियो शेयर कर लिखा, ‘*मोहम्मद ने* भगवान कृष्ण की मूर्ति पर हमला करने की कोशिश की पूरी घटना CCTV में रिकॉर्ड हमले के समय वहां मौजूद कृष्ण भक्त गौ माता ने उसे जो सजा दी, वह भी रिकॉर्ड हो गया*’

फैक्ट चेकः
DFRAC की टीम ने वायरल वीडियो की जांच में पाया कि यह किसी वास्तविक घटना का वीडियो नहीं है, बल्कि AI-जनरेटेड वीडियो को सांप्रदायिक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। हमारी टीम ने वीडियो को गौर से देखने पर पाया कि इस वीडियो में कई सारी विसंगतियां हैं, जो आम तौर पर एआई जनरेटेड वीडियो में होती हैं। जांच के दौरान हमने पाया कि श्रीकृष्ण की मूर्ति क्रॉस पैर की मुद्रा में है, लेकिन मूर्ति के पैर बिल्कुल सीधी दिखते हैं। इसके अलावा जब गाय ने उस शख्स पर हमला किया, तो फर्श टूटने का कोई बड़ा पत्थर नहीं था, लेकिन अचानक से एक बड़ा सा पत्थर वीडियो में दिखने लगता है।

अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए हमने वायरल वीडियो की जांच एआई-डिटेक्टर टूल्स हाइव मॉडरेशन और डीपफेक-ओ-मीटर पर की। हमारी जांच में परिणाम सामने आया कि वायरल वीडियो को एआई द्वारा बनाया गया है।

वायरल वीडियो के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए हमारी टीम ने एआई एक्सपर्ट मयंक शर्मा से संपर्क किया। मयंक ने हमें बताया कि वायरल वीडियो वास्तविक सीसीटीवी फुटेज नहीं लगता। वीडियो के फ्रेम्स का विश्लेषण करने पर हमें कई तकनीकी खामियां दिखाई देती हैं। उदाहरण के तौर पर हमलावर शख्स की शारीरिक गतिविधियों में स्वाभाविक संतुलन नहीं दिखता, और मूर्ति के पैरों की पोज़िशन भी असामान्य है, क्योंकि क्रॉस स्थिति के बावजूद दोनों पैर सीधे नजर आते हैं। इसके अलावा गाय की मूवमेंट और आसपास की रोशनी-छाया का पैटर्न भी प्राकृतिक नहीं प्रतीत होता है।
निष्कर्षः
DFRAC के फैक्ट चेक से साफ है कि सोशल मीडिया पर शेयर किया गया वीडियो श्रीकृष्ण की मूर्ति तोड़ने की कोशिश की वास्तविक घटना का नहीं है। यह एआई-जनरेटेड वीडियो है, जिसे सांप्रदायिक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।

