फैक्ट चेक: त्रिपुरा में बीएसएफ़ जवानों के हमलावरों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का भ्रामक वीडियो वायरल

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त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों पर हुए हमले के मामले में अब तक 18 आरोपियों को गिरफतार किया है। इनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है। वायरल वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि वीडियो बीएसएफ़ जवानों के हमलावरों के खिलाफ त्रिपुरा पुलिस की कार्रवाई का है।

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सोशल साईट X (पूर्व ट्विटर) पर वेरिफाइड यूजर जनार्दन मिश्रा ने वायरल वीडियो को शेयर कर लिखा कि “त्रिपुरा में कल BSF के जवानों पर कुछ जिहादियों द्वारा हमला किया गया, त्रिपुरा पुलिस द्वारा उनका इलाज 24 घंटे में शुरू।।”

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इसके अलावा कई अन्य यूजर ने भी ऐसा ही मिलता-जुलता दावा किया है। जिसे यहाँ पर क्लिक कर देखा जा सकता है।

फैक्ट चेक:

Source: Facebook

वायरल वीडियो के साथ किए गए दावे की जांच के लिए DFRAC ने वीडियो के कीफ्रेम को रिवर्स सर्च किया। इस दौरान हमें ऐसा ही एक वीडियो फेसबुक पर मिला। वीडियो को यूजर bdlive.com24 द्वारा 1 नवंबर, 2026 को शेयर किया गया था। यूजर द्वारा वीडियो को केप्शन देते हुए लिखा गया कि “एक पुलिस अधिकारी एक गारमेंट वर्कर को पकड़ने के लिए दौड़ते समय गिर गया।”

Source: The Daily Star

ऐसे में हमने घटना से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट की भी पड़ताल की। इस दौरान हमें बांग्लादेश के न्यूज़ पेपर डेली स्टार की एक रिपोर्ट मिली। 03 नवंबर 2026 को पब्लिश रिपोर्ट के अनुसार “ढाका में आज फिर सड़कों पर उतरने की कोशिश कर रहे आरएमजी (RMG) श्रमिकों की मीरपुर-11 में पुलिस से झड़प हो गई, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, आज सुबह मीरपुर में कारखाने हमेशा की तरह खुले और श्रमिक अपनी शिफ्ट में काम पर आ गए। हालांकि, सुबह 10:00 बजे के बाद कई कारखानों से श्रमिक बाहर निकलने लगे। करीब 10:30 बजे, वे मीरपुर-11 के पश्चिमी हिस्से की गलियों में इकट्ठा हुए और मुख्य सड़क तक पहुंचने की कोशिश की। पहले से ही अलर्ट पर मौजूद पुलिस ने श्रमिकों का पीछा किया, जिसके जवाब में श्रमिकों ने ईंट-पत्थर फेंके। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच करीब आधे घंटे तक भागदौड़ और झड़प चलती रही। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले और साउंड ग्रेनेड दागे, जिससे श्रमिकों को मुख्य सड़क और आसपास की गलियों से पीछे हटना पड़ा।

Source: Tbs News

इसके साथ ही हमें एक अन्य बांग्लादेशी न्यूज़ पोर्टल द बिजनेस स्टेंडर्ड की भी रिपोर्ट मिली। 01 नवंबर 2016 को पब्लिश इस रिपोर्ट में भी घटना की पुष्टि करते हुए बताया गया कि आज (1 नवंबर) मीरपुर में, कम से कम 30,000 टका मासिक वेतन की मांग कर रहे गारमेंट कर्मचारियों की पुलिस के साथ झड़प हो गई। इस घटना के बाद कम से कम 19 लोगों को हिरासत में लिया गया है। झड़प की वजह से दो घंटे तक यातायात और मेट्रो रेल सेवाएं बाधित रहीं। सुबह करीब 9:30 बजे जब मजदूरों ने मीरपुर-10 गोलचक्कर को जाम कर दिया, तो इस व्यस्त सड़क पर यातायात ठप हो गया, जिससे आने-जाने वालों, दफ्तर जाने वालों और छात्रों को काफी परेशानी हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से बार-बार सड़क खाली करने को कहा और उन्हें ऐसा करने के लिए सुबह 11 बजे तक का समय दिया। जब वे वहां से हटने को तैयार नहीं हुए, तो सुबह करीब 11:15 बजे पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक हटाने की कोशिश की, जिसके बाद झड़प शुरू हो गई।”

अंत में हमने वायरल वीडियो के संबंध में ढाका स्थित “द डिप्लोटिक” के संपादक  अदनान आलमदार से भी बातचीत की। उन्होने वायरल वीडियो के त्रिपुरा का होने से इंकार किया। उन्होने पुष्टि की कि वायरल वीडियो ढाका के मीरपुर में मासिक वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे गारमेंट कर्मचारियों की पुलिस के साथ झड़प का हैं।

निष्कर्ष:

DFRAC के फैक्ट चेक से साबित होता है कि वायरल वीडियो के साथ किया गया दावा भ्रामक है। क्योंकि वायरल वीडियो त्रिपुरा में बीएसएफ़ जवानों के हमलावरों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का नहीं बल्कि बांग्लादेश के मीरपुर का है। जहां हड़ताल कर रहे श्रमिकों के खिलाफ स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई की थी।

Claim Reviewत्रिपुरा में बीएसएफ़ जवानों के हमलावरों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का भ्रामक वीडियो वायरल
Claim Byसोशल मीडिया यूज़र्स
Fact Checkभ्रामक दावा

Source:

  1. फेसबुक वीडियो
  2. समाचार पत्र डेली स्टार की रिपोर्ट
  3.  समाचार पत्र द बिजनेस स्टेंडर्ड की रिपोर्ट
  4. द डिप्लोटिक के संपादक अदनान आलमदार का बयान