कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की तिहाड़ जेल से रिहाई के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो के जरिए दावा किया जा रहा है कि दोनों नेताओं को उनकी नग्न तस्वीरों और वीडियो के बदले रिहा किया गया है। साथ ही, कथित तौर पर धमकी दी गई कि यदि वे दोबारा विरोध प्रदर्शन करते हैं, तो उनकी निजी तस्वीरें और वीडियो सार्वजनिक कर दिए जाएंगे।

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सोशल साईट X (पूर्व ट्विटर) पर वेरिफाइड यूजर रेड वैनगार्ड ने वायरल वीडियो को शेयर कर लिखा कि “क्या CJP नेताओं को ब्लैकमेल किया गया?: हमने CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को तो छोड़ दिया, लेकिन उनकी नग्न तस्वीरें और वीडियो ले लिए। अगर वे दोबारा विरोध प्रदर्शन करते हैं, तो हम ये फुटेज ऑनलाइन जारी कर देंगे। उन्हें सरकार का विरोध करने की कीमत का अंदाज़ा नहीं है।”
फैक्ट चेक:

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वायरल वीडियो की सत्यता जांचने के लिए DFRAC ने वायरल वीडियो के कीफ्रेम को रिवर्स सर्च किया। इस दौरान हमें ऐसा ही मूल वीडियो यूट्यूब पर मिला। 19 मार्च 2019 को वीडियो को Ministry of Education Innovation Cell द्वारा शेयर किया गया।

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वीडियो को केप्शन देते हुए लिखा गया कि “श्री अजीत डोभाल, एनएसए, भारत सरकार के साथ नेतृत्व पर चर्चा [एमएचआरडी इनोवेशन सेल – आईआईसी]” वीडियो में कहीं पर भी एनएसए अजीत डोभाल का ऐसा कोई बयान नहीं दिया है।

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आगे की जांच में हमने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अस्तित्व में आने से जुड़ी जानकारी भी एकत्रित की। इस दौरान सामने आया कि “कॉकरोच जनता पार्टी’ एक राजनीतिक आंदोलन है, जिसकी स्थापना 16 मई 2026 को राजनीतिक संचार रणनीतिकार और कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने की थी। CJP ने भारत में ‘जनरेशन Z’ के बीच व्याप्त राजनीतिक और आर्थिक असंतोष को एक दिशा दी, जिसके चलते दिल्ली और अन्य शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए।”

ऐसे में हमने वायरल वीडियो की एआई डिक्टेक्टर टूल HIVE DETECT से जांच की। जांच के दौरान वायरल वीडियो में AI-जनरेटेड स्पीच होने की संभावना 67.1% सामने आई।

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इसके साथ ही हमने वायरल वीडियो की एआई डिक्टेक्टर टूल RESEMBLE AI से भी जांच की। जांच में सामने आया कि वायरल वीडियो का Audio Score 99.60 तथा Video Score 5.98 डीपफेक पाया गया।

हमने वायरल वीडियो की एआई डिक्टेक्टर टूल AI VIDEO DETECTOR से भी जांच की। वायरल वीडियो के एआई से निर्मित होने की संभावना 77 फीसद आई।
अंत में हमने वायरल वीडियो के संबंध में एआई एक्सपर्ट मयंक शर्मा से भी बातचीत की। उन्होने वीडियो का विश्लेषण कर बताया कि “वायरल वीडियो में AI तकनीक की सहायता से आवाज और विजुअल्स के साथ छेड़छाड़ किए जाने के स्पष्ट संकेत मिलते हैं।”

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इसके अलावा हमें प्रेस इन्फोर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) का भी वायरल वीडियो के संबंध में आधिकारिक खंडन मिला। जिसमे वायरल वीडियो को फेक और डिजिटली बदला हुआ बताया गया है।
निष्कर्ष:
DFRAC के फैक्ट चेक से साबित होता है कि वायरल वीडियो भ्रामक है। दरअसल अजीत डोभाल के सात साल पुराने वीडियो को एडिट करके उसके साथ कथित बयान जोड़ा गया है। मूल वीडियो में CJP नेताओं की रिहाई के बदले उनकी निजी तस्वीरें और वीडियो लेने या उन्हें ब्लैकमेल करने संबंधी कोई बयान नहीं है।
| Claim Review | क्या अजीत डोभाल ने CJP नेताओं को ब्लैकमेल करने की बात कबूली? |
| Claim By | सोशल मीडिया यूज़र्स |
| Fact Check | भ्रामक दावा |
SOURCES
- यूट्यूब पर अजीत डोभाल का मूल वीडियो
- HIVE DETECT
- RESEMBLE AI
- AI VIDEO DETECTOR
- AI एक्सपर्ट मयंक शर्मा से बातचीत
- PIB Fact Check का आधिकारिक खंडन
