Manipur

प्रोपेगेंडा डिकोडः मणिपुर, कश्मीर और पंजाब पर पाकिस्तानी यूजर्स के नैरेटिव का विश्लेषण!

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युद्ध सिर्फ सीमाओं पर ही नहीं लड़े जाते। आधुनिक दौर में युद्ध का एक नया मैदान सोशल मीडिया बन चुका है, जहां गोलियों और बारूद की जगह मोबाइल फोन, कंप्यूटर और इंटरनेट सबसे बड़े हथियार हैं। इस युद्ध में सैनिकों की कतारें दिखाई नहीं देतीं, बल्कि स्क्रीन पर दिखाई देने वाली सूचनाएं, तस्वीरें, वीडियो और पोस्ट ही हथियार का काम करती हैं। इस तरह की सूचना युद्ध की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि आम सोशल मीडिया यूजर को अक्सर यह एहसास भी नहीं हो पाता है कि वह कब किसी सुनियोजित प्रोपेगेंडा का हिस्सा बन गया है। जिस पोस्ट को वह मात्र सामान्य सूचना समझकर शेयर, रीपोस्ट या कोट पोस्ट करता है, वह कई बार किसी विशेष नैरेटिव को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किए गए व्यापक डिजिटल अभियान का हिस्सा हो सकते हैं। ऐसे कंटेंट को इस तरह पेश किया जाता है कि वह पहली नजर में सामान्य, विश्वसनीय और तथ्यात्मक प्रतीत होते हैं, लेकिन उसकी गहराई में जाने पर धीरे-धीरे समझ आता है कि यह एक निश्चित सोच और धारणा स्थापित करने के लिए की गई सुनियोजित कोशिश है।

सूचना युद्ध की रणनीति केवल झूठी खबरें फैलाने तक सीमित नहीं रहती। कई बार वास्तविक घटनाओं को चुनिंदा तथ्यों, आधे-अधूरे संदर्भों, भावनात्मक भाषा और लगातार दोहराए जाने वाले नैरेटिव के जरिए इस तरह प्रस्तुत किया जाता है कि वे एक विशेष एजेंडे को मजबूती देने लगें। भारत के संदर्भ में मणिपुर, कश्मीर और पंजाब जैसे राज्य लंबे समय से सूचना युद्ध का प्रमुख केंद्र रहे हैं और इन राज्यों में होने वाली सामान्य घटनाओं को भी किसी खास एजेंडे के तहत पेश किया जाने लगता है। इन प्रोपेगेंडा कंटेंट में एकसमान शब्दावली, मिलते-जुलते दावे, एक जैसी फ्रेमिंग और लगातार दोहराए जाने वाले प्रोपेगेंडा नैरेटिव यह संकेत देते हैं कि डिजिटल स्पेस में केवल प्रतिक्रियाएं ही नहीं, बल्कि बड़ा प्रभाव दिखाने की संगठित कोशिश होती हैं।

DFRAC की यह विशेष रिपोर्ट ऐसे ही 11 सोशल मीडिया अकाउंट्स की गतिविधियों का विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इस रिपोर्ट में इन अकाउंट्स की पोस्टिंग प्रवृत्ति, शेयर किए गए कंटेंट, प्रमुख नैरेटिव, और डिजिटल गतिविधियों के पैटर्न का परीक्षण किया गया है। इस रिपोर्ट के प्रमुख बिन्दू इस प्रकार हैं।

1.डिजिटल प्रोपेगेंडा में सक्रिय यूजर्स
2.कहां से संचालित होते हैं ये अकाउंट्स?
3.भारत सरकार की कार्रवाई: अकाउंट्स विथहेल्ड और प्रतिबंध
4.मणिपुर पर प्रोपेगेंडा और नैरेटिव का विश्लेषण
5.कश्मीर और पंजाब पर अलगाववादी नैरेटिव
6.प्रोपेगेंडा यूजर्स का कंटेंट एनालिसिस
7.फेक और भ्रामक दावों का फैक्ट चेक

1. डिजिटल प्रोपेगेंडा नेटवर्क में सक्रिय यूजर्स

इस डिजिटल प्रोपेगेंडा नेटवर्क में शामिल 11 सोशल मीडिया यूजर्स अलग-अलग नामों और पहचान के साथ सक्रिय हैं। इनमें आएशा (AaishaaSoomro), जियो डिफेंस ब्रीफ (GeoDefenseBrief), आइरिस रेकॉन (IrisRecon), थ्रेट ऑब्जर्वर (ThreatObserver1), सुषमा (Sushmmty), साराह मैथ्यू (SarahMatth78633), कोमल तिवारी (Komal_Tiwarii), सिमरन प्रसंग सिंह (simra_nsinghX), कश्मीर इंग्लिश (KashmirEng), इंटेल स्कोप (intelscope_) और वॉर एनालिस्ट (War_Analysts) जैसे अकाउंट शामिल हैं।

2. कहां से संचालित होते हैं ये अकाउंट्स? 

किसी भी डिजिटल प्रोपेगेंडा नेटवर्क को समझने के लिए केवल उसके कंटेंट का विश्लेषण पर्याप्त नहीं होता, बल्कि यह जानना भी महत्वपूर्ण होता है कि संबंधित अकाउंट्स स्वयं अपनी पहचान और लोकेशन के बारे में क्या जानकारी शेयर करते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर उपलब्ध प्रोफाइल विवरण, About Section, अकाउंट लोकेशन और कनेक्टेड डिवाइस जैसी सार्वजनिक जानकारियां किसी नेटवर्क को समझने में महत्वपूर्ण होता है। हमने विश्लेषण के दौरान इन 11 अकाउंट्स की प्रोफाइल के बारे उपलब्ध जानकारियों का विश्लेषण किया। जांच में पाया गया कि कुछ अकाउंट्स ने अपनी लोकेशन सीधे पाकिस्तान बताई है, जबकि कुछ अन्य अकाउंट्स ने प्रोफाइल में भारत या अन्य देशों का उल्लेख किया है, लेकिन उनके About Section में South Asia क्षेत्र से जुड़े संकेत दिखाई देते हैं। 

पाकिस्तान से संचालित प्रोपेगेंडा हैंडल्सः

हमने पाया कि GeoDefenseBrief, AaishaaSoomro, ThreatObserver1, Intelscope और War_Analysts ऐसे अकाउंट्स हैं, जिनकी प्रोफाइल में उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी पाकिस्तान से संबंध दर्शाती है। इनमें GeoDefenseBrief, AaishaaSoomro और War_Analysts ने अपनी प्रोफाइल लोकेशन में सीधे Pakistan अथवा Islamic Republic of Pakistan का उल्लेख किया है। वहीं ThreatObserver1 और Intelscope के अकाउंट के About Section में “Account based in Pakistan” प्रदर्शित होता है।

साउथ एशिया से जुड़े संकेत देने वाले प्रोपेगेंडा हैंडल्स:

आइरिस रेकॉन, सुषमा, साराह मैथ्यू, कोमल तिवारी, सिमरन प्रसंग सिंह और कश्मीर इंग्लिश ऐसे अकाउंट्स हैं, जिनकी प्रोफाइल में भारत, यूरोप अथवा अन्य स्थानों का उल्लेख मिलता है। हालांकि इन अकाउंट्स के About Section में उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी का विश्लेषण करने पर “Account based in South Asia” अथवा “Connected via South Asia Android App” जैसे संकेत दिखाई देते हैं।

उदाहरण के तौर पर आइरिस रेकॉन और सुषमा ने प्रोफाइल लोकेशन में India लिखा है, लेकिन उनके अकाउंट विवरण में South Asia आधारित जानकारी प्रदर्शित होती है। इसी प्रकार कोमल तिवारी, साराह मैथ्यू और सिमरन प्रसंग सिंह की प्रोफाइल में यूरोप अथवा भारत का उल्लेख होने के बावजूद, उनके About Section में South Asia Android App के माध्यम से कनेक्ट होने की जानकारी दिखाई देती है। वहीं कश्मीर इंग्लिश के अकाउंट पर भी “Account based in South Asia” प्रदर्शित होता है।  

3. भारत सरकार की कार्रवाई: अकाउंट्स विथहेल्ड और प्रतिबंध 

भारत सरकार समय-समय पर राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आवश्यक निर्देश जारी करती रही है। इसी क्रम में कई ऐसे अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिन्हें भारत में विथहेल्ड किया गया है। इन 11 अकाउंट्स का विश्लेषण करने पर यह सामने आया कि इनमें से कुछ अकाउंट्स भारत में विथहेल्ड हैं, जबकि कई अन्य अकाउंट्स अभी भी सक्रिय हैं।

भारत में विथहेल्ड किए गए अकाउंट्स:

जियो डिफेंस ब्रीफ, आइरिस रेकॉन, कोमल तिवारी, कश्मीर इंग्लिश और वॉर एनालिस्ट ऐसे अकाउंट्स हैं, जिन्हें भारत में विथहेल़्ड किया गया है। यह अकाउंट्स भारत सरकार की कानूनी मांग के अनुपालन में उपलब्ध नहीं है।

अभी भी सक्रिय प्रोपेगेंडा अकाउंट्स:

हमने पाया कि आएशा, साराह मैथ्यू, इंटेल स्कोप, थ्रेट ऑब्जर्वर, सिमरन प्रसंग सिंह, और सुषमा ऐसे अकाउंट्स हैं, जो रिपोर्ट लिखे जाने तक एक्स प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं। ये अकाउंट्स नियमित रूप से पोस्ट, रीपोस्ट और कोट पोस्ट के माध्यम से भारत से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं।

4. मणिपुर पर प्रोपेगेंडा और नैरेटिव का विश्लेषण 

मणिपुर से जुड़े कंटेंट के विश्लेषण में यह सामने आया कि कई सोशल मीडिया अकाउंट्स राज्य में हुई घटनाओं को केवल कानून-व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत नहीं करते, बल्कि उन्हें लगातार एक विशेष नैरेटिव के तहत फ्रेम करने का प्रयास करते हैं। इन पोस्टों में भारतीय सुरक्षा बलों और सरकारी संस्थाओं के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाए गए हैं और घटनाओं को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है कि भारत की संवैधानिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर अविश्वास का माहौल बनाया जा सके। इस प्रकार के नैरेटिव का विश्लेषण इस प्रकार है-

नैरेटिव-1: भारतीय सेना को नागरिकों के खिलाफ दिखाने की कोशिश

कई अकाउंट्स ने भारतीय सेना पर नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और ईसाई समुदाय के खिलाफ कार्रवाई करने के आरोपों को प्रमुखता से प्रसारित किया। इन पोस्टों में सेना की भूमिका को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करते हुए ऐसे दावे किए गए, जिनका उद्देश्य सुरक्षा बलों के प्रति अविश्वास पैदा करना और उन्हें मानवाधिकार उल्लंघन से जोड़ना प्रतीत होता है।

नैरेटिव-2: मणिपुर को भारत के कब्जे वाला क्षेत्र बताना

कुछ पोस्टों में मणिपुर को “Indian Occupation” जैसे शब्दों के साथ प्रस्तुत किया गया। यह फ्रेमिंग मणिपुर को भारत का अभिन्न हिस्सा मानने के बजाय उसे कथित कब्जे वाले क्षेत्र के रूप में दिखाने का प्रयास करती है। इस प्रकार का नैरेटिव अलगाववादी विमर्श को वैचारिक आधार प्रदान करने की रणनीति का हिस्सा दिखाई देता है।

नैरेटिव-3: धार्मिक उत्पीड़न की फ्रेमिंग

कई पोस्टों में मणिपुर में क्षेत्रीय संघर्ष के बजाय ईसाई समुदाय के खिलाफ संगठित कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश दिखाई देती है। इस प्रकार की फ्रेमिंग का उद्देश्य धार्मिक पहचान को केंद्र में रखकर भावनात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न करना और नकारात्मक नैरेटिव को मजबूत करना दिखाई देता है।

5. कश्मीर और पंजाब पर अलगाववादी नैरेटिव

सोशल मीडिया अकाउंट्स के कंटेंट विश्लेषण से पता चलता है कि कश्मीर को लेकर लगातार ऐसे नैरेटिव प्रसारित किए गए, जिनमें भारत की संप्रभुता और संवैधानिक स्थिति पर सवाल उठाने का प्रयास दिखाई देता है। कुछ पोस्टों में सीधे तौर पर “Kashmir belongs to Pakistan” जैसे दावे शेयर किए गए। इसके साथ ही कश्मीर को मणिपुर, पंजाब, असम और नागालैंड जैसे अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के साथ जोड़कर भारत में व्यापक अस्थिरता का चित्र प्रस्तुत करने की कोशिश भी देखने को मिली।

विश्लेषण में यह भी सामने आया कि कुछ अकाउंट्स ने भारत को आंतरिक संकट से जूझता हुआ देश बताते हुए यह संदेश देने का प्रयास किया कि विभिन्न राज्यों में अलगाववादी आंदोलन एक साथ उभर रहे हैं। कई पोस्टों में नक्शों, ग्राफिक्स और प्रतीकात्मक चित्रों का उपयोग कर भारत के विखंडन की कल्पना प्रस्तुत की गई। 

पंजाब से जुड़े कंटेंट के अध्ययन में यह सामने आया कि कई अकाउंट्स ने खालिस्तान समर्थक नैरेटिव को प्रमुखता से प्रसारित किया। कुछ पोस्टों में “Khalistan Zindabad”, “Long Live Khalistan” और “We stand with Khalistan” जैसे संदेश शेयर किए गए। इसके अलावा कुछ पोस्टों में ऐसे दृश्य और प्रतीकों का उपयोग किया गया, जिनका उद्देश्य खालिस्तान समर्थक भावनाओं को प्रोत्साहित करना और अलगाववादी विचारधारा को सामान्य राजनीतिक अभिव्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करना प्रतीत होता है।

6. प्रोपेगेंडा यूजर्स का कंटेंट एनालिसिसः

इन सोशल मीडिया अकाउंट्स के कंटेंट विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि अधिकांश अकाउंट्स की डिजिटल गतिविधियां मणिपुर, कश्मीर और पंजाब जैसे संवेदनशील विषयों के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं। इन अकाउंट्स द्वारा नियमित रूप से पोस्ट, रीपोस्ट और कोट पोस्ट के माध्यम से ऐसे कंटेंट को बढ़ावा दिया जाता है, जिनमें भारत की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक तनाव और राजनीतिक घटनाओं को प्रमुखता से उठाया जाता है।

यूज़रसोर्स (Platform)कंटेंट एक्टिविटीएनालिसिस / नेटवर्क प्रभाव
AaishaaSoomro@AaishaaSoomroभारत के संवेदनशील मुद्दों, विशेषकर मणिपुर, कश्मीर और पंजाब से जुड़े पोस्ट, रीपोस्ट एवं कोट पोस्ट साझा करना।भारत से जुड़े विवादित विषयों पर सक्रिय नैरेटिव को एम्प्लीफाई करने वाला अकाउंट। अन्य समान अकाउंट्स के कंटेंट के साथ विषयगत समानता दिखाई देती है।
GeoDefenseBrief@GeoDefenseBriefभू-राजनीति, रक्षा और सुरक्षा से जुड़े पोस्ट के साथ भारत-केंद्रित विवादित कंटेंट साझा करना।नैरेटिव को विश्वसनीय रूप देने का प्रयास। संवेदनशील घटनाओं पर लगातार सक्रियता।
Iris Recon @IrisReconरक्षा, संघर्ष और भारत से संबंधित घटनाओं पर नियमित पोस्ट एवं रीपोस्ट।सैन्य एवं सुरक्षा विश्लेषण की शैली अपनाकर विशेष नैरेटिव को आगे बढ़ाने वाला अकाउंट।
Threat Observer@ThreatObserver1संघर्ष, सैन्य गतिविधियों और भारत के आंतरिक मुद्दों से जुड़े पोस्ट।सुरक्षा एवं खुफिया विश्लेषण की छवि के माध्यम से कंटेंट को अधिक विश्वसनीय दिखाने की कोशिश।
Sushmmty@Sushmmtyमणिपुर, कश्मीर और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर नियमित पोस्ट एवं कोट पोस्ट।भावनात्मक और राजनीतिक नैरेटिव को एम्प्लीफाई करने वाला सक्रिय अकाउंट।
Sarah Matth @SarahMatth78633भारत से जुड़े विवादित मुद्दों पर पोस्ट, रीपोस्ट और प्रतिक्रियाएं।अन्य समान अकाउंट्स के कंटेंट को बढ़ाने (Amplify) और नैरेटिव प्रसार में सक्रिय भूमिका।
Komal Tiwarii@Komal_Tiwariiराजनीतिक घटनाओं और भारत के संवेदनशील विषयों पर पोस्ट साझा करना।विचारधारात्मक फ्रेमिंग के साथ नैरेटिव निर्माण में योगदान देने वाला अकाउंट।
simra_nsinghX @simra_nsinghXपंजाब एवं राजनीतिक घटनाओं पर पोस्ट और रीपोस्ट।पंजाब पर केंद्रित पोस्टिंग पैटर्न
KashmirEng @KashmirEngकश्मीर-केंद्रित पोस्ट, मानवाधिकार, सुरक्षा और राजनीतिक घटनाओं से जुड़ा कंटेंट।कश्मीर मुद्दे पर केंद्रित नैरेटिव तैयार करने का प्रयास।
intelscope_ @intelscope_रक्षा, इंटेलिजेंस और सैन्य घटनाओं के नाम पर पोस्ट साझा करना।सुरक्षा विश्लेषण की शैली के जरिए संवेदनशील घटनाओं को विशेष फ्रेम में प्रस्तुत करने वाला अकाउंट।
War_Analysts@War_Analystsयुद्ध, राष्ट्रीय सुरक्षा एवं भारत से जुड़े घटनाक्रम पर पोस्ट।रक्षा एवं सुरक्षा विश्लेषण के नाम पर विवादित नैरेटिव को प्रसारित करने वाला अकाउंट

7. फेक और भ्रामक सूचनाएंः

सूचना युद्ध में सबसे प्रभावी हथियार केवल झूठी खबरें नहीं होतीं, बल्कि आधे-अधूरे तथ्य, संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किए गए वीडियो, पुरानी तस्वीरें और भ्रामक दावों के साथ तैयार किया गया प्रोपेगेंडा भी होता है। हम यहां ऐसे ही कई फेक और भ्रामक सूचनाओं का फैक्ट चेक प्रदान कर रहे हैं।

फेक और भ्रामक न्यूज-1

मणिपुर को लेकर एक पोस्ट में दावा किया गया है कि मणिपुर के नेताओं ने भारतीय सेना द्वारा कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के बाद आधिकारिक रूप से भारत से आज़ादी की घोषणा कर दी है। हमने फैक्ट चेक में पाया कि वायरल वीडियो वर्तमान घटनाओं से जुड़ा नहीं है। यह वीडियो वर्ष 2019 का है और हालिया हिंसा से संबंधित नहीं है।

फेक और भ्रामक न्यूज-2

एक पोस्ट में दावा किया गया है कि भारतीय डिप्लोमैट्स से नार्वे में मणिपुर, पंजाब और कश्मीर को लेकर मानवाधिकारों पर सवाल पूछे गए। फैक्ट चेक में इस दावे को भ्रामक पाया गया। ओरिजिनल वीडियो में नार्वे की पत्रकार ने मणिपुर, कश्मीर और पंजाब का कोई जिक्र नहीं किया था।

फेक और भ्रामक न्यूज-3

एक पोस्ट में दावा किया गया कि भारतीय सेना ने मणिपुर के उखरुल में एकमात्र स्थानीय अस्पताल को जला दिया और सेना के जवान लगातार घर जला रहे हैं। फैक्ट चेक में इस दावे को भ्रामक पाया गया। दरअसल जो वीडियो शेयर किया जा रहा है, वह पुराना है और NSCN-IM के उस ऑफ़िस से जुड़ा है, जिसमें मार्च 2026 में आग लगा दी गई थी।

फेक और भ्रामक न्यूज-4

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती का एक बयान शेयर कर दावा किया गया कि उन्होंने कथित तौर पर कहा कि कश्मीर, पंजाब और मणिपुर को आजाद करना चाहिए। हमने जांच में पाया कि यह दावा झूठा है और वायरल वीडियो डिजिटली अल्टर्ड है।

फेक और भ्रामक न्यूज-5

एक कार में आग के वीडियो के साथ दावा किया गया कि दिल्ली में रॉ के अधिकारी की टारगेट किलिंग हुई है। फैक्ट चेक में इस दावे को भ्रामक पाया गया। दरअसल यह वीडियो दिल्ली के उत्तम नगर में एक कार में आग लगने की घटना का है और इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ था।

निष्कर्ष:

इन 11 सोशल मीडिया अकाउंट्स की डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण करने पर यह सामने आया कि ये अकाउंट्स मणिपुर, कश्मीर और पंजाब के संवेदनशील मुद्दों पर लगातार सक्रिय हैं। अकाउंट्स की लोकेशन, पोस्टिंग पैटर्न, कंटेंट गतिविधियों और शेयर किए गए नैरेटिव का विश्लेषण से साफ होता है कि ये यूजर्स प्रोपेगेंडा के लिए भारतीय पहचान लिए हुए हैं, जबकि वह भारत के बाहर से संचालित होते हैं।