दक्षिण एशिया में भारत-बांग्लादेश संबंध और सोशल मीडिया नैरेटिव: “Bangla Urdu” अकाउंट का विश्लेषण

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दक्षिण एशिया के राजनीतिक और ऐतिहासिक परिदृश्य में बांग्लादेश और भारत के संबंध एक विशेष स्थान रखते हैं, जो न केवल दक्षिण एशिया बल्कि वैश्विक भू-राजनीति को भी प्रभावित करते हैं। बांग्लादेश, भारत से केवल भौगोलिक निकटता के कारण ही नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, भाषा और संघर्ष की साझा विरासत के कारण गहराई से जुड़ा हुआ है। बांग्लादेश का जन्म 1971 में हुए बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के परिणामस्वरूप हुआ। स्वतंत्रता से पूर्व, बांग्लादेश के लोगों को राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक भेदभाव का सामना करना पड़ रहा था। इस कठिन समय में भारत ने न केवल उनके दर्द को समझा, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए लाखों बांग्लादेशी शरणार्थियों को अपने यहां आश्रय भी प्रदान किया। भारत ने पाकिस्तान सेना द्वारा किए जा रहे अत्याचारों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया और अंततः दिसंबर 1971 में सैन्य हस्तक्षेप करते हुए बांग्लादेश की स्वतंत्रता में निर्णायक भूमिका निभाई। स्वतंत्रता के बाद भी भारत ने बांग्लादेश का साथ नहीं छोड़ा। भारत उन पहले देशों में शामिल था, जिन्होंने बांग्लादेश को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी। समय के साथ दोनों देशों के संबंध और मजबूत होते गए। आज भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निरंतर सहयोग बढ़ रहा है। दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता, शांति और विकास के लिए मिलकर कार्य करते रहे हैं। लेकिन बीते कुछ समय से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तल्खियाँ देखने को मिल रही है। शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद भारत-बांग्लादेश के बीच तनाव चरम पर रहा है। इस तनाव को बढ़ाने में सोशल मीडिया की भी अपनी भूमिका रही है। सोशल मीडिया के जरिये फेक और हेट नरेटिव के जरिये भारत-बांग्लादेश के रिश्तों को नुकसान पहुंचाया गया।

Bangla Urdu | بنگلہ اردو

Source: XFacebook

बांग्ला उर्दू उन बांग्लादेशी सोशल मीडिया अकाउंट्स में से एक है, जिस पर भारत-बांग्लादेश संबंधों को प्रभावित करने वाले नैरेटिव को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। यह अकाउंट जुलाई 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन और शेख हसीना से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद सक्रिय हुआ। ऐसा प्रतीत होता है कि यह अकाउंट मुख्य रूप से उर्दूभाषी दर्शकों को लक्षित करता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) (पूर्व में ट्विटर) पर इसके 23,000 से अधिक फॉलोअर्स हैं, जबकि Facebook पर भी इसके 70,000 से अधिक फॉलोअर्स मौजूद हैं। यह अकाउंट स्वयं को एक न्यूज़ और मीडिया प्लेटफॉर्म के रूप में प्रस्तुत करता है, जो बांग्लादेश में लगातार बदलती परिस्थितियों पर ताज़ा खबरें, जानकारी और विश्लेषण प्रदान करने का दावा करता है।

DFRAC की इस रिपोर्ट में हम “बांग्ला उर्दू” का विश्लेषण निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर करेंगे।

  1. कश्मीर मुद्दे का भारत के खिलाफ उपयोग
  2. भारत की आंतरिक समस्याओं को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करना
  3. भारत के खिलाफ फेक, हेट और मिसलिडिंग कंटेंट
  4. एंटी-इंडिया और प्रोपाकिस्तान नरेटिव
  5. निष्कर्ष
  1. कश्मीर मुद्दे का भारत के खिलाफ उपयोग

कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच आजादी के बाद से ही एक संवेदनशील और विवादित मुद्दा रहा है। जहां पाकिस्तान लगातार कश्मीर पर अपना दावा करता आया है, वहीं भारत कश्मीर को अपना अभिन्न अंग मानता है। बांग्लादेश ने ऐतिहासिक रूप से इस मुद्दे पर पाकिस्तान के दावे का समर्थन नहीं किया और अधिकतर मामलों में भारत के पक्ष में संतुलित रुख अपनाया है। हालांकि, हाल ही में बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलाव के बाद सोशल मीडिया पर कश्मीर मुद्दे को नए तरीके से उठाया जाने लगा है।

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“Bangla Urdu” अकाउंट के ट्वीट्स के विश्लेषण से पता चलता है कि कश्मीर को सीधे मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि भारत के खिलाफ एक नैरेटिव टूल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर: एक ट्वीट में बांग्ला उर्दू ने लिखा – “ढाका में प्रदर्शन के दौरान कश्मीर, पाकिस्तान और फिलिस्तीन के झंडे लहराए गए” वहीं एक अन्य में लिखा कि “छात्रों ने कश्मीर के समर्थन में नारे लगाए” इन ट्वीट्स में कश्मीर को एक प्रतीक (symbol) के रूप में इस्तेमाल किया गया है, जिससे भारत को एक ऐसे देश के रूप में दिखाया जा सके जो कथित रूप से अन्य क्षेत्रों में भी दमनकारी भूमिका निभा रहा है।

कुछ ट्वीट्स में कश्मीर को डर पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया गया है, जैसे: “अगर भारत हस्तक्षेप करेगा तो बांग्लादेश कश्मीर बन सकता है” “बांग्लादेश को कश्मीर बनने से बचाना होगा”  इन ट्वीट्स में कश्मीर को एक नकारात्मक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे लोगों में यह धारणा बनाई जाए कि भारत का प्रभाव बढ़ने पर बांग्लादेश की स्थिति भी वैसी ही हो सकती है।

  • भारत की आंतरिक समस्याओं को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करना

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“बांग्ला उर्दू” अकाउंट द्वारा भारत के आंतरिक मामलों को प्रभावित करने के प्रयास भी किए गए। इसके अंतर्गत भारत से जुड़ी घटनाओं और समस्याओं को न केवल चयनात्मक तरीके से उठाया गया, बल्कि उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया। भारत में मुस्लिमों के खिलाफ कथित रूप से हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा की गई हिंसा को प्रमुखता से दिखाते हुए, देश की छवि को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। ताकि ऐसा प्रतीत हो कि भारत में भारतीय मुसलमान देश में बहुत असुरक्षित महसूस कर रहे हो। इसके लिए भारत के खिलाफ फेक खबरें फैलाई गईं और वास्तविक घटनाओं को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।

  • भारत के खिलाफ फेक, हेट और मिसलिडिंग कंटेंट

फैक्ट चेक: क्या असम में मुसलमानों को ‘बांग्लादेशी’ बताकर गिराए गए घर? जानिए सच

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“बांग्ला उर्दू” द्वारा 26 सितंबर 2024 को एक वीडियो साझा किया गया, जिसमें एक धार्मिक ढांचे और कुछ मकानों को जेसीबी से गिराते हुए दिखाया गया। इस वीडियो के साथ दावा किया गया कि असम राज्य के लखीमपुर इलाके में एक मस्जिद को गिराया जा रहा है। साथ ही यह भी कहा गया कि एक मस्जिद, एक दरगाह, एक मदरसा और लगभग 2000 मुस्लिम परिवारों के घरों को ध्वस्त कर दिया गया तथा स्थानीय मुसलमानों को ‘बांग्लादेशी’ बताकर इलाके से निकाला जा रहा है।

फैक्ट चेक:

Source: NorthEast Now, HT

जांच में पाया गया कि वायरल वीडियो का असल संबंध लखीमपुर से नहीं, बल्कि असम के गोलपारा ज़िले के बंदरमाथा रिज़र्व फ़ॉरेस्ट से है। यहां लगभग 55–60 हेक्टेयर वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी। यह कार्रवाई गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश के बाद की गई, जिसमें रिज़र्व फ़ॉरेस्ट क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे।

फैक्ट चेक: उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में मुस्लिम भाई-बहन को स्कूल से घर लौटते समय पीटा गया?

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“बांग्ला उर्दू” द्वारा 09 अक्टूबर 2024 को एक वीडियो साझा किया गया, जिसमें बीच सड़क पर बाइक रोककर एक युवक और युवती के साथ कुछ लोग मारपीट करते नजर आते हैं। इस वीडियो के साथ दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद ज़िले में मुस्लिम भाई-बहन को स्कूल से घर लौटते समय बेरहमी से पीटा गया। साथ ही पोस्ट में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का आरोप लगाते हुए लोगों से उन्हें बचाने की अपील की गई।

फैक्ट चेक:

Source: ABP News, X

जांच में पाया गया कि वायरल वीडियो का गाज़ियाबाद से कोई संबंध नहीं है। यह घटना उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के थाना धौलाना क्षेत्र की है, जो हापुड़ में स्थित है। यह घटना 28 सितंबर 2024 की बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक युवक को एक युवती के साथ पकड़े जाने पर युवती के परिजनों (भाइयों) द्वारा उसकी पिटाई की गई थी।

फैक्ट चेक: AI के जरिए तैयार फर्जी वीडियो से भारतीय सेना की छवि बिगाड़ने की कोशिश

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“बांग्ला उर्दू” अकाउंट द्वारा 28 मार्च 2026 को एक वीडियो साझा किया गया, जिसमें कथित भारतीय सैनिकों को अजीब और अव्यवस्थित कलाबाजियां करते हुए दिखाया गया है। वीडियो के जरिए भारतीय सेना का मजाक उड़ाने की कोशिश की गई।

फैक्ट चेक:

जांच में सामने आया कि वायरल वीडियो वास्तविक नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया प्रतीत होता है। AI डिटेक्शन टूल Hive Moderation के विश्लेषण में इस वीडियो के AI-जनित होने की संभावना लगभग 55.5% पाई गई। इसके अलावा, वीडियो में दिख रहे दृश्यों में कई अस्वाभाविक गतिविधियां, शरीर की असंतुलित हरकतें और दृश्य असंगतियां भी देखी गईं।

  • एंटी-इंडिया और प्रोपाकिस्तान नरेटिव

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“बांग्ला उर्दू” ने भारत के खिलाफ नरेटिव फैलाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। इसके लिए “इंडिया आउट” जैसे अभियानों को भी बढ़ावा दिया गया। साथ ही, कुछ पोस्ट्स में पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच नज़दीकी को इस तरह दिखाया गया, जिससे भारत के मुकाबले दोनों देशों की करीबी को उभारा जा सके।

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इसके लिए ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों का भी सहारा लिया गया, ताकि यह दिखाया जा सके कि बांग्लादेश का झुकाव पाकिस्तान की ओर है। इतना ही नहीं, क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल का इस्तेमाल कर भी भारत से दूरी और पाकिस्तान के साथ नज़दीकी को प्रतीकात्मक रूप में पेश करने की कोशिश की गई।

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वहीं, भारतीय राजनेताओं, सैन्य अधिकारियों और राजनयिकों के बयानों को भी इस तरह प्रस्तुत किया गया, जिससे पाकिस्तान और बांग्लादेश की नज़दीकी को स्थापित किया जा सके। साथ ही, भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित टकराव के संदर्भ में बांग्लादेश को पाकिस्तान समर्थक के रूप में दर्शाने का प्रयास भी देखने को मिलता है।

Source: X, X, X

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इसी क्रम में, बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के मुद्दे को लेकर भारत में उठे विवाद के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री द्वारा संयुक्त राष्ट्र शांति सेना की तैनाती की मांग को भी बढ़ा-चढ़ाकर एक बड़े विवाद के रूप में प्रस्तुत किया गया।

निष्कर्ष

“बांग्ला उर्दू” अकाउंट के विश्लेषण से यह सामने आता है कि भारत से जुड़े कई मुद्दों को चयनात्मक, बढ़ा-चढ़ाकर और कुछ मामलों में भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया गया। कश्मीर जैसे संवेदनशील विषयों का प्रतीकात्मक उपयोग, आंतरिक घटनाओं की अतिरंजित प्रस्तुति और एंटी-इंडिया नैरेटिव के माध्यम से एक विशेष धारणा बनाने की कोशिश दिखाई देती है। साथ ही, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और खेल जैसे माध्यमों के जरिए पाकिस्तान और बांग्लादेश की नज़दीकी को उभारते हुए भारत की छवि को तुलनात्मक रूप से नकारात्मक दिखाने का प्रयास भी देखा गया। कुल मिलाकर, इस प्रकार का कंटेंट जनमत और द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। इसलिए जहां एक ओर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, वहीं सरकार को भी ऐसे भ्रामक नैरेटिव्स पर समय रहते प्रभावी निगरानी और कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।