Information War on Manipur

DFRAC विशेष रिपोर्टः मणिपुर पर सूचना युद्ध में विदेशी हस्तक्षेप की भूमिका

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मणिपुर में वर्तमान समय में व्यापक रूप से शांति और सामान्य स्थिति बनी हुई है। हालांकि, इस स्थिरता के बीच कुछ सीमित और स्थानीय स्तर की घटनाओं जैसे विभिन्न जातीय समूहों के बीच छोटी-मोटी झड़पों या विवादों को सोशल मीडिया पर संदर्भ से हटाकर बड़े सुरक्षा संकट के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। DFRAC की हालिया डिजिटल मॉनिटरिंग से संकेत मिलता है कि कई पाकिस्तानी यूजर्स और उनसे संबंध नेटवर्क इन स्थानीय घटनाओं को व्यवस्थित तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं। कई पोस्ट्स में साधारण विवादों को भारतीय सुरक्षा बलों, विशेषकर सेना और केंद्रीय बलों के विरुद्ध कथित “जन-कार्रवाई” या “विद्रोह” के रूप में फ्रेम किया गया। इस प्रकार की भ्रामक प्रस्तुति न सिर्फ तथ्यों को विकृत करती है, बल्कि जमीनी स्थिति के बारे में गलत धारणा भी निर्मित करती है। 

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित ऐसी सामग्री का उद्देश्य केवल गलत सूचना देना नहीं, बल्कि एक विशेष नैरेटिव गढ़ना प्रतीत होता है, जिसमें स्थानीय स्तर की घटनाओं को संस्थागत अस्थिरता और व्यापक असंतोष के संकेत के रूप में दिखाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को लक्षित कर किए गए पोस्ट्स में चयनित विजुअल्स, आंशिक क्लिप्स और उत्तेजक भाषा का उपयोग कर यह आभास देने का प्रयास किया गया कि राज्य में व्यापक टकराव या सुरक्षा बलों के विरुद्ध संगठित कार्रवाई जारी है, जबकि जमीनी स्थिति इससे भिन्न है।

यह रिपोर्ट मणिपुर से संबंधित हालिया डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण प्रस्तुत करती है, जिसमें इस बात की पड़ताल की गई है कि किस प्रकार सीमित और स्थानीय घटनाओं को सीमा-पार नेटवर्क द्वारा बढ़ाकर एक रणनीतिक सूचना अभियान का रूप दिया जा रहा है। यह रिपोर्ट उन्हीं पैटर्न्स, नैरेटिव्स और नेटवर्क गतिविधियों का तथ्य-आधारित अध्ययन प्रस्तुत करती है, जो मणिपुर संकट के दौरान डिजिटल स्पेस में सक्रिय रहे। इस रिपोर्ट के प्रमुख बिन्दू हैं-

  1. पाकिस्तानी यूजर्स की भूमिका
  2. पाकिस्तानी यूजर्स की एक्स (पू्र्व ट्विटर) हैंडल का कंटेंट एनालिसिस
  3. कंटेंट का कॉपी-पेस्ट पैटर्न
  4. केंद्रीय स्तर पर कंटेंट क्रिएशन, डिस्ट्रिब्यूशन और एम्प्लीफिकेशन
  5. फेक/भ्रामक सूचनाएं और उनका फैक्ट चेक

1-पाकिस्तानी यूजर्स की भूमिकाः

हमारी टीम ने विश्लेषण के दौरान पाया कि मणिपुर को लेकर ऑनलाइन प्रोपेगेंडा करने वाले यूजर्स मणिपुर से जुड़ी घटनाओं को एक खास नैरेटिव के साथ प्रस्तुत करते दिखाई देते हैं। इनकी पोस्टिंग में अक्सर स्थानीय घटनाओं को व्यापक सुरक्षा संकट, सैन्य टकराव, देश विरोधी और राज्य-विरोधी कार्रवाई के रूप में पेश करने की प्रवृत्ति नजर आती है। इनमें से कई यूजर्स के पाकिस्तान से जुड़े होने की तरफ इशारा करते हैं। इन यूजर्स में मणिपुर पोस्ट (ManipurPost5), जर्द सी गना (ZardSiGana), व्हिसल ब्लोअर (InsiderWB), इरीमा सेन (Ireima Sen) और अनुशी तिवारी (Kussikhuelafn) नामक हैंडल शामिल हैं। ये हैंडल्स मणिपुर की घटनाओं को भारत-विरोधी फ्रेम में रखकर प्रस्तुत करता है। कई मामलों में विजुअल सामग्री का स्रोत स्पष्ट नहीं होता, जिससे दावों की विश्वसनीयता संदिग्ध हो जाती है। इनमें से 4 अकाउंट्स ManipurPost5, ZardSiGana, InsiderWB और Kussikhuelafn को भारत में विथहेल्ड कर दिया गया है, यानी इन अकाउंट्स के पोस्ट को अब भारत में नहीं देखा जा सकता है, वहीं सिर्फ एकमात्र Ireima Sen अकाउंट ही सक्रिय है।

मणिपुर से नहीं, पाकिस्तान से संचालित होता है @ManipurPost5:

मणिपुर से जुड़ी “बड़ी खबरें” पोस्ट करने वाला एक X अकाउंट मणिपुर पोस्ट (ManipurPost5) अब खुद सवालों के घेरे में है। जांच के दौरान सामने आया कि जो अकाउंट @ManipurPost5 से सक्रिय, वह पहले @mir_views यूज़रनेम से संचालित था। आर्काइव रिकॉर्ड और पुराने स्क्रीनशॉट बताते हैं कि फरवरी 2024 में किए गए पोस्ट और रिप्लाई उसी संरचना में मौजूद हैं, बस यूज़रनेम बदल गया है। ट्वीट वही, इंटरैक्शन वही, लेकिन पहचान नई। पुराने रिकॉर्ड खंगालने पर पता चलता है कि यह अकाउंट पहले पाकिस्तान-समर्थक और भारत-विरोधी नैरेटिव के साथ सक्रिय था। बाद में इसी अकाउंट को “Manipur Post” के रूप में रीब्रांड कर मणिपुर से जुड़ी संवेदनशील घटनाओं पर सक्रिय कर दिया गया। यह बदलाव अचानक नहीं लगता, बल्कि एक सुनियोजित डिजिटल रणनीति जैसा दिखता है। 

अन्य पाकिस्तानी यूजर्स का प्रोपेगेंडाः

मणिपुर को लेकर एक समन्वित डिजिटल नैरेटिव बनाने की कोशिशें की जा रही हैं, जिसमें अलग-अलग देशों से संचालित अकाउंट्स ने एक ही वीडियो और लगभग समान भाषा का उपयोग किया है। इस प्रोपेगेंडा में Samaira Rind और Mehr Gadh जैसे अकाउंट्स दिखाई देते हैं, जिनकी प्रोफाइल जानकारी के अनुसार उनका लोकेशन पाकिस्तान से जुड़ी है। दोनों ने लगभग समान शब्दों में एक पोस्ट में यह भ्रामक दावा शेयर किया कि मणिपुर ने भारत से आधिकारिक स्वतंत्रता की घोषणा कर दी है। इस भ्रामक पोस्ट में न केवल वीडियो समान है, बल्कि पोस्ट का फ्रेमिंग और शब्द चयन भी काफी हद तक मेल खाता है। यह समानता केवल संयोग नहीं लगती, बल्कि एक साझा नैरेटिव टेम्पलेट की ओर संकेत करती है।.

Strat-Front और Rational Dialogue जैसे यूजर्स भी पाकिस्तान से संचालित होते हैं, जो मणिपुर को लेकर या तो प्रोपेगेंडा पोस्ट करते हैं, या फिर दुष्प्रचार वाले कंटेंट को रिपोस्ट और लाइक करके उस पर इंप्रेशन जनरेट करते हैं।

Irelina Sen और Voice of North East India जैसे अकाउंट्स शामिल हैं, जिनकी लोकेशन दक्षिण एशिया से जुड़ी दिखाई गई है। इन अकाउंट्स ने भी वही विजुअल और समान संदेश साझा किया गया है। पोस्ट की भाषा में “human rights violations” और “occupation” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को प्रभावित करने के उद्देश्य से तैयार किए गए नैरेटिव की ओर इशारा करता है।

Defence Frontier और Aijaz Ali Arain जैसे अकाउंट्स ने उसी वीडियो को “BREAKING” या आधिकारिक घोषणा के रूप में प्रस्तुत किया। यहां भी समान विजुअल, समान दावे और लगभग एक ही समयावधि में पोस्टिंग देखने को मिलती है। उल्लेखनीय है कि इनमें से कुछ अकाउंट्स की लोकेशन पाकिस्तान है। यह समन्वित amplification का संकेत देता है, जहां एक भ्रामक दावे को कई अकाउंट्स द्वारा एक साथ आगे बढ़ाया जाता है ताकि वह अधिक विश्वसनीय प्रतीत हो। विशेष रूप से, पाकिस्तानी लोकेशन से संचालित अकाउंट्स की सक्रिय भूमिका इस नैरेटिव को अंतरराष्ट्रीय रंग देने की कोशिश का संकेत देती है। इस प्रकार की डिजिटल गतिविधि सूचना-युद्ध (information warfare) के उस पैटर्न से मेल खाती है, जिसमें किसी देश के आंतरिक संवेदनशील मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अस्थिरता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। “Official freedom” जैसे शब्दों का उपयोग दर्शकों में तात्कालिक भावनात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न करने और भ्रम फैलाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

2. पाकिस्तानी यूजर्स का एक्स (पू्र्व ट्विटर) हैंडल का कंटेंट एनालिसिसः

इन अकाउंट्स की गतिविधियों का विश्लेषण दर्शाता है कि यह केवल व्यक्तिगत पोस्टिंग नहीं, बल्कि एक संरचित डिजिटल नैरेटिव निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा प्रतीत होती है। पोस्टिंग टाइमिंग, समान हैशटैग, और एक-दूसरे की सामग्री को रीपोस्ट या कोट करने का पैटर्न संकेत देता है कि कंटेंट चरणबद्ध तरीके से फैलाया जाता है—पहले एक प्रारंभिक पोस्ट, फिर अन्य अकाउंट्स द्वारा उसे amplify कर एंगेजमेंट स्पाइक और एल्गोरिथमिक दृश्यता बढ़ाना। sen74410 संवेदनशील घटनाओं पर त्वरित और निष्कर्षात्मक दावे साझा करता है, जबकि InsiderWB स्वयं को “इनसाइड स्रोत” बताकर बिना स्वतंत्र पुष्टि के जानकारी प्रसारित करता है। ManipurPost5 और ZardSiGana जैसे हैंडल भावनात्मक भाषा, संदर्भ से अलग विजुअल्स और गंभीर अपुष्ट दावों के माध्यम से स्थानीय घटनाओं को व्यापक अस्थिरता के रूप में प्रस्तुत करते हैं। समग्र रूप से यह पैटर्न अपुष्ट सूचनाओं के तेज प्रसार और डिजिटल भ्रम की रणनीतिक संभावना को दर्शाता है। 

यूज़रसोर्स (Platform / Handle)पोस्ट फ्रीक्वेंसी / Engagement (अनुमानित)एनालिसिस / नेटवर्क प्रभाव
KussikhuelafnX3–5 पोस्ट प्रतिदिन; 200–800 Likes; 50–250 RT; 10K–40K Viewsनियमित नैरेटिव बिल्डिंग; समान विचारधारा वाले अकाउंट्स से रीपोस्ट नेटवर्क
sen74410X2–4 पोस्ट प्रतिदिन; 150–600 Likes; 40–180 RT; 8K–30K Viewsसंवेदनशील घटनाओं पर त्वरित amplification; प्रोपेगेंडा कंटेंट से एंगेजमेंट स्पाइक
InsiderWBX1–3 पोस्ट; 300–1K Likes; 80–300 RT; 15K–60K Views“इनसाइड” नैरेटिव  निर्माण; coordinated engagement पैटर्न
ManipurPost5Xवायरल पोस्ट; 500–1.5K Likes; 100–400 RT; 25K–90K Viewsविजुअल आधारित वायरलिटी; संदर्भ बदलकर संकट की छवि को amplify करना
ZardSiGanaX2–5 पोस्ट; 250–900 Likes; 60–220 RT; 12K–50K Viewsतीखी भाषा से पोस्ट; फेक और भ्रामक सूचनाओं का नेटवर्क में तेज़ी से री-सर्कुलेशन

3.कंटेंट का कॉपी-पेस्ट पैटर्नः

इन यूजर्स के पोस्ट के तुलनात्मक विश्लेषण से एक महत्वपूर्ण पैटर्न सामने आता है। अलग-अलग X अकाउंट्स द्वारा शेयर की गई पोस्ट्स में न केवल समान वीडियो क्लिप का उपयोग किया गया है, बल्कि टेक्स्ट संरचना, शब्द चयन, और नैरेटिव फ्रेमिंग भी अत्यंत समान दिखाई देती है। यह समानता स्वतःस्फूर्त या संयोगवश प्रतीत नहीं होती। उदाहरण के लिए, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के शेयर किए गए अल्टर्ड वीडियो वाले पोस्ट्स में “We have already lost a billion-dollar Rafale market…” जैसे वाक्यांश लगभग हूबहू दोहराए गए हैं। इसी प्रकार, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शेयर किए गए अल्टर्ड वीडियो से संबंधित पोस्ट्स में भी “India is going to make historic missile deal…” या “Now if Pakistan decides to destroy 10 or 200 Rafales…” जैसी पंक्तियाँ शब्दशः दोहराई गई हैं। अलग-अलग अकाउंट्स पर पोस्ट होने के बावजूद कंटेंट का संरचनात्मक पैटर्न समान है, जिसमें शीर्षक, उद्धरण शैली और भावनात्मक निष्कर्ष तक शामिल है।

4. केंद्रीय स्तर पर कंटेंट क्रिएशन, डिस्ट्रिब्यूशन और एम्प्लीफिकेशनः

इस तरह कंटेंट पोस्टिंग तीन प्रकार की प्रमुख संकेत देता है, पहला- कंटेंट टेम्पलेटिंग: जिसमें टेक्स्ट संरचना और शब्दावली में एकरूपता यह दर्शाती है कि संभवतः पहले एक टेम्पलेट तैयार किया गया, जिसे विभिन्न अकाउंट्स द्वारा कॉपी-पेस्ट या मामूली बदलाव के साथ उपयोग किया गया। दूसरा- स्रोत-केंद्रित वितरण: वीडियो और टेक्स्ट का संयोजन यह संकेत देता है कि सामग्री पहले किसी केंद्रीय स्रोत पर तैयार हुई, फिर उसे नेटवर्क आधारित अकाउंट्स को प्रसारित किया गया, और तीसरा- समन्वित एम्प्लीफिकेशन: अलग-अलग यूजर्स द्वारा लगभग समान समय में समान दावे शेयर करना एल्गोरिथमिक दृश्यता बढ़ाने की रणनीति हो सकती है। जब कई अकाउंट्स एक साथ एक ही नैरेटिव को आगे बढ़ाते हैं, तो प्लेटफॉर्म पर उसकी विश्वसनीयता और पहुंच दोनों बढ़ जाती हैं। इस प्रकार की गतिविधि डिजिटल सूचना-युद्ध की स्थापित तकनीकों से मेल खाती है, जहां कंटेंट उत्पादन और वितरण को अलग-अलग चरणों में विभाजित किया जाता है।

दुष्प्रचार की तकनीकें

मणिपुर से जुड़े वायरल कंटेंट के विश्लेषण से कई संगठित दुष्प्रचार तकनीकों की पहचान होती है। ये तकनीकें सूचना-युद्ध के स्थापित पैटर्न से मेल खाती हैं। 

i. “आधिकारिक” शब्द का दुरुपयोगः “Officially Announced” जैसे शब्दों का उपयोग कर पोस्ट को वैधता का आभास दिया गया। बिना किसी सरकारी दस्तावेज या विश्वसनीय स्रोत के, केवल विजुअल और आत्मविश्वासपूर्ण भाषा के माध्यम से इसे ऐतिहासिक निर्णय के रूप में प्रस्तुत किया गया।

ii. समान वीडियो का बहु-अकाउंट प्रसारः एक ही वीडियो क्लिप को अलग-अलग अकाउंट्स द्वारा लगभग एक जैसी भाषा में शेयर किया गया। यह स्वतःस्फूर्त वायरलिटी की बजाय समन्वित amplification का संकेत देता है। विशेष रूप से कुछ पाकिस्तानी-आधारित अकाउंट्स की सक्रियता इस नैरेटिव को अंतरराष्ट्रीय रंग देने की कोशिश को दर्शाती है।

iii. मानवाधिकार फ्रेमिंगः “Human Rights Violations”, “Occupation”, “Long Struggle” जैसे शब्दों का प्रयोग अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति अर्जित करने के उद्देश्य से किया गया। यह एक रणनीतिक फ्रेमिंग तकनीक है, जिसमें स्थानीय संघर्ष को वैश्विक न्याय के मुद्दे के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

iv. ब्रेकिंग न्यूज़ इफेक्टः कुछ अकाउंट्स ने “BREAKING” टैग का इस्तेमाल किया, जिससे दर्शकों में तात्कालिकता और आपात स्थिति की भावना पैदा हो। यह मनोवैज्ञानिक तकनीक है, जिसका उद्देश्य तथ्यात्मक सत्यापन से पहले भावनात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न करना होता है।

v. नेटवर्क-आधारित नैरेटिव सिंक्रोनाइजेशनः पोस्टिंग समय, शब्द चयन और हैशटैग पैटर्न में समानता यह दर्शाती है कि कुछ अकाउंट्स “नैरेटिव इनिशिएटर” और अन्य “एम्प्लिफायर” की भूमिका निभा रहे थे। यह संरचना डिजिटल सूचना-युद्ध की रणनीतिक विशेषता मानी जाती है

5. फेक/भ्रामक सूचनाएं और फैक्ट चेकः

इन यूजर्स द्वारा लगातार फेक और भ्रामक सूचनाएं शेयर की गई हैं। यहां हम कुछ फेक और भ्रामक सूचनाएं का फैक्ट चेक प्रदान कर रहे हैं।

फेक/भ्रामक सूचना-1

वर्दी पहने सैनिकों की एक तस्वीर को शेयर दावा किया गया है कि यह भारतीय सेना के असम राइफल्स के जवान हैं, जिन्हें मणिपुर में लोगों के घरों पर हमलाकर आग लगाते और प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाते हुए पकड़ा गया है। हालांकि यह दावा गलत है। मणिपुर पुलिस ने एक पोस्ट में इस दावे को फेक करार दिया है। पुलिस ने बताया है, ‘फेक। ऐसी कोई घटना नहीं हुई। यह भारतीय सेना के बारे में गलत जानकारी फैलाने के लिए एक झूठी जानकारी दी गई है।’

फेक/भ्रामक सूचना-2

एक वीडियो के साथ भारतीय सेना के असम राइफल्स के जवान को मणिपुर में कुकी फाइटर बनकर लोगों के घरों में आग लगाते हुए पकड़े जाने का दावा किया गया। DFRAC की टीम ने वायरल वीडियो की जांच में पाया कि यह किसी भारतीय सैनिक का वीडियो नहीं है और ना ही यह वीडियो हाल-फिलहाल का है। यह वीडियो नवंबर 2025 से इंटरनेट पर मौजूद है और कई फेसबुक यूजर्स द्वारा पोस्ट किया गया है।

फेक/भ्रामक सूचना-3

जम्मू कश्मीर के राजौरी में भारतीय सेना के कैंप पर हमले के दावे के साथ एक पुलिस अधिकारी का बयान शेयर किया गया है। वायरल वीडियो में पुलिस अधिकारी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि 4 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 24 घायल हैं और फिलहाल पुलिस की जांच चल रही है। हालांकि इसका फैक्ट यह है कि तत्कालीन जम्मू जोन के ADGP मुकेश सिंह का वायरल बयान 13 मई 2022 को कटरा में बस में आग लगने की घटना की जानकारी देने का है। वहीं, राजौरी में भारतीय सेना के कैंप पर हमले का दावा भी गलत है।

फेक/भ्रामक सूचना-4

मुंबई में भारत-फ्रांस के बीच एक समिट हुई। इसी समिट में पीएम मोदी का दिया एक बयान शेयर किया गया है, जिसमें पीएम मोदी को कथित तौर पर पाकिस्तान द्वारा राफेट जेट मार गिराए जाने की बात कहते हुए सुना जा सकता है। हालांकि पीएम मोदी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था, उनका वायरल बयान डिजिटली अल्टर्ड है।

निष्कर्षः

मणिपुर से संबंधित सोशल मीडिया गतिविधियों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि चयनित X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल केवल व्यक्तिगत अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक संरचित डिजिटल नैरेटिव निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा प्रतीत होते हैं। इन अकाउंट्स की पोस्टिंग शैली, समय-संयोजन, समान हैशटैग के उपयोग तथा एक-दूसरे की सामग्री को रीपोस्ट अथवा कोट करने के पैटर्न से संकेत मिलता है कि सूचना का प्रसार क्रमबद्ध और रणनीतिक ढंग से किया जा रहा है।

प्राथमिक विश्लेषण दर्शाता है कि किसी संवेदनशील स्थानीय घटना के घटित होने के बाद प्रारंभिक दावा या विजुअल सामग्री साझा की जाती है। इसके पश्चात समान नैरेटिव वाले अन्य अकाउंट्स द्वारा उक्त सामग्री को amplify किया जाता है, जिससे पोस्ट की एंगेजमेंट दर (रीपोस्ट, लाइक, व्यू) में अचानक वृद्धि होती है। यह एल्गोरिथमिक दृश्यता को बढ़ाने की रणनीति का संकेत देता है। परिणामस्वरूप, स्थानीय स्तर की घटनाओं को व्यापक राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय संकट के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इन अकाउंट्स द्वारा प्रयुक्त भाषा में भावनात्मक और उत्तेजक शब्दावली की प्रधानता देखी गई है। अनेक मामलों में साझा की गई सामग्री के साथ आधिकारिक स्रोत, सत्यापित डेटा अथवा स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं होती। विजुअल सामग्री का उपयोग भी संदर्भ स्पष्ट किए बिना किया जाता है, जिससे दर्शकों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।