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भारत के भीतर दूर-दूर तक फैल रहे हैं रैंसमवेयर हमले

एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, फेसबुक हैकर्स और इंस्टाग्राम जैसे ऐप पर वरिष्ठ नागरिकों और मध्यम आयु वर्ग के लोगों को निशाना बना रहे हैं। रैनसमवेयर अटैक के जरिए हैकर्स इन लोगों को निशाना बना रहे हैं। रिपोर्ट में, टिकटॉक भी उन ऐप में से एक है जिसका इस्तेमाल हैकर्स द्वारा हमलों को शुरू करने के लिए कर रहे हैं।साइबर सुरक्षा कंपनी अवास्ट के एक शोधकर्ता के अनुसार, हैकर्स मुख्य रूप से 65 या उससे अधिक उम्र के लोगों और 30 से 45 वर्ष के बीच के लोगों को भी निशाना बना रहे हैं। इनमें भी खास तौर पर उन लोगों को निशाना बनाया जाता है जो आमतौर पर लैपटॉप या कंप्यूटर से इन ऐप्स में लॉग इन करते हैं। जबकि मोबाइल बैंकिंग ट्रोजन, एडवेयर, डाउनलोडर और फ्लूबोट एसएमएस स्कैम के जरिए अपने फोन से लॉग इन करने वाले अधिकांश आयु वर्ग के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
Instagram और TikTok का उपयोग एडवेयर ऐप्स या फ़्लेसवेयर को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके अलावा ऐसा लगता है कि हर उम्र के लोगों को फिशिंग अटैक और रोमांस स्कैम के जरिए निशाना बनाया जाता है।

दुनिया भर में रैंसमवेयर हमलों का वितरण

अवास्ट थ्रेट लैब्स के आंकड़ों के अनुसार, 2021 कंपनी के हर महीने में औसतन 1.46 मिलियन रैंसमवेयर हमलों को रोक रही है। हालांकि FluBot भारत सहित हर जगह दूर-दूर तक फैल रहा है।

रैंसमवेयर हमलों का रुझान

हैकर्स, पीड़ित के डिवाइस पर दुर्भावनापूर्ण और अन्य अवांछित ऐप्स इंस्टॉल करने के लिए सोशल इंजीनियरिंग रणनीति का उपयोग करते हैं। दुर्भावनापूर्ण लिंक वाला एक संदेश उपयोगकर्ताओं को Instagram और TikTok के माध्यम से भेजा जाता है। यूजर्स जैसे ही इस पर क्लिक करते हैं, उनके डिवाइस में मैलिशस ऐप इंस्टॉल हो जाता है और हैकर्स इसे आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं।
रैंसमवेयर उपयोगकर्ता के डिवाइस को नियंत्रित करता है और उसे लॉक कर देता है। इसके बाद हैकर्स उपयोगकर्ता को कई तरीकों से ब्लैकमेल करने के लिए करते हैं, और यूजर्स से पैसे की डिमांड करता है।