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शुक्रवार, दिसम्बर 9, 2022
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क्या सुल्ली डील्स एप के लिए जावेद आलम को फ्रेम किया जा रहा है?

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  • एक वायरल ट्वीट में दावा किया जा रहा है कि “सुल्ली डील” एप को यूपी के जावेद आलम नामक शख्स ने बनाया है जो एसेंचर में काम करता है.
  • GitHub पर सुल्ली डील नाम से एक अप्प्लिकेशन 4 जुलाई को अपलोड की गयी थी जिसमें मुस्लिम महिलाओं का ऑक्शन किया जा रहा था.
  • 20 अगस्त को बनाए गए हैंडल @sullidealsXpose ने 30 अगस्त को एक ट्विटर थ्रेड में कुछ स्क्रीनशॉट और चैट की रिकॉर्डिंग को सबूत की तरह दिखा कर यह दावा किया कि इस एप को जावेद आलम नामक शख्स ने बनाया है.
  • 22 जुलाई को एक हैंडल @dankchikitsak ने भी ऐसा ही दावा किया था और उसके ट्वीट में जावेद आलम की स्वीकारोक्ति का जिक्र था जिसे जारी नहीं किया गया. अभी ट्विटर ने इस हैंडल को सस्पेंड कर दिया है.
  • जावेद आलम के स्वीकारोक्ति वाले जिस कथित चैट का जिक्र 22 जुलाई को किया गया था उसे 30 तारिख को @sullidealsXpose ने डाला और उसमें चैट की तारिख 24 जुलाई थी.
  • हमारी पड़ताल में यह सामने आया है कि यह कहानी अपने कुछ उद्देश्य की पूर्ती के बनायी गयी है और यह दावा भ्रामक है.
  • ऐसा करके एक तरफ जावेद को इस पूरे मामले में फ्रेम किया जा रहा है दूसरी तरफ यह भी बताया जा रहा है कि सुल्ली डील नाम की एप जिसमें मुस्लिम महिलाओं की बोली लगायी जा रही थी उसे एक मुस्लिम ने ही बनाया था.

क्या है सुल्ली डील्स?

मुस्लिम महिलाओं को अपमानित करने के लिए सुल्ली शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। 4 जुलाई, 2021 को GitHub पर “सुल्ली डील्स” नाम से एक एप्प जारी हुआ जिसमें प्रोमिनेंट मुस्लिम महिलाओं के फोटो आदि का इस्तेमाल किया गया और उनकी बोली लगायी जाने लगी। इस घिनौने अप्लिकेशन के ऊपर सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ गया और फिर GitHub ने इस अप्लिकेशन को हटा लिया

इस वायरल ट्वीट में क्या दावा किया गया है?

SulliDealExpose नामक इस हैंडल ने 30 अगस्त को एक थ्रेड में कुछ स्क्रीनशॉट और रिकार्डेड विडियो के आधार पर यह साबित करने की कोशिश की है कि “सुल्ली डील्स” नामक एप्प का निर्माता जावेद आलम है.

https://twitter.com/sullidealsXpose/status/1432232278286024705
Archive

इस थ्रेड पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने भी प्रतिक्रिया दी है.

क्या है सच्चाई?

30 अगस्त को जिस थ्रेड के आधार पर जावेद आलम को सुल्ली डील के लिए फ्रेम करने की कोशिश की जा रही है, बिलकुल ऐसा ही थ्रेड 22 जुलाई को भी एक हैंडल ने किया था। इन दोनों Tweets की समानता और साक्ष्य के टाइमस्टैम्प ही इस दावे की पोल खोल रहे हैं.


22 जुलाई को @dankchikitsak नाम के एक ट्विटर हैंडल ने एक ट्विटर थ्रेड बनाया जिसमें ऐसे ही दावे किये गए. हमने जांच में पाया कि यह ट्विटर हैंडल अब सस्पेंड हो चुका है पर हमारे पास इसके द्वारा किये गए ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट और आर्काईव कॉपी मौजूद है।

24 जुलाई को dopolitics.in नाम की वेबसाइट ने इन ट्वीट्स को आधार बना कर स्टोरी की है इस थ्रेड से एक कदम आगे बढ़ कर उन्होंने यह भी दावा किया है कि जावेद आलम ने सुल्ली डील्स वाली एप को बनाने की बात स्वीकार कर ली है। हालाँकि उन्होंने अपनी स्टोरी में इसका कोई साक्ष्य उपलभ्द नहीं कराया है

https://twitter.com/DOpolitics_in/status/1418851245507350537

विचारणीय है कि इसी वेबसाइट के एडिटर अजीत भारती ने इस एप के GitHub पर अपलोड होने के बाद इसे “प्रमोट” भी किया था।

22 जुलाई से 24 जुलाई तक के ट्वीट्स और आर्टिकल में कहीं भी सुल्ली डील की स्वीकारोक्ति वाला स्क्रीनशॉट/विडियो नहीं डाला गया है पर सभी जगह यह दावा किया गया है कि जावेद ने एक मुस्लिम महिला के साथ “बातचीत” में स्वीकार किया है कि सुल्ली डील को उसने ही बनाया है।

कब आया बातचीत वाला स्क्रीनशॉट?

30 अगस्त को किये ट्वीट थ्रेड में @sullidealsXpose ने टेलीग्राम की बातचीत का स्क्रीनशॉट और उसका विडिओ जारी किया है जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि जावेद नाम के व्यक्ति ने एक मुस्लिम महिला से बातचीत में स्वीकार किया है कि सुल्ली डील नामक अप्लिकेशन उसने बनाया है। ज्ञात रहे कि 22 जुलाई के ट्वीट में भी एक मुस्लिम लड़की से स्क्रीनशॉट/विडियो मिलने का हवाला दिया गया था और जिसे जारी नहीं किया गया था.

टेलीग्राम चैट का टाइमस्टाम्प: 30 अगस्त वाले थ्रेड में एक टेलीग्राम चैट के डाले स्क्रीनशॉट का टाइमस्टाम्प ही इस पूरे प्रकरण पर संदेह पैदा कर रहा है. इस स्क्रीनशॉट में 24 जुलाई शाम 6 बजे के बाद की बातचीत है जबकि इस बातचीत का दावा तो 22 जुलाई को ही कर दिया गया था. जाहिर है उस वक़्त इसे जारी नहीं किया गया और इस बातचीत को बाद में “तैयार” किया गया है. इसके अलावा “जावेद आलम” के मोबाइल नंबर, पता आदि के सभी स्क्रीनशॉट जारी किये गए हैं पर बहुत चतुराई से टेलीग्राम वाले फोन नंबर का कोई स्क्रीनशॉट नहीं डाला गया है.

एक बार सभी घटनाक्रम को एक बार फिर देखिये:

इस टाइमस्टाम्प से साफ जाहिर है कि इन सारे साक्ष्यों को जावेद नामक व्यक्ति को फ्रेम करने के लिए तैयार किया गया है।

राइट विंग वेब साइट OpIndia जो फेक न्यूज़ चलाने के लिये जानी जाती है उसने भी @SulliDealsXpose नाम के ट्विटर हैंडल के थ्रेड पर जावेद का नाम लेकर स्टोरी कर दी है।

यह भी पढे : EXCLUSIVE REPORT: बुल्ली बाई ऐप विवाद पर “सांप्रदायिक एजेंडे” का खुलासा

@SulliDealsXpose इसी महीने (अगस्त, 2021) ट्विटर पर खुला है और ये सिर्फ एक ही ट्विटर हैंडल @HatePatroller को फॉलो करता है।

 

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DFRAC Editor
DFRAC Editorhttps://dfrac.org
Digital Forensics, Research and Analytics Centre (DFRAC) is a non-partisan and independent media organisation which focuses on fact-checking and identifying hate speech. With the popularisation of the internet came the challenge of information overload and often times, our feeds are overpopulated with conflicting, incendiary and false information which is increasingly becoming difficult to ignore and not believe in

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