GenZ Protest

फैक्ट चेकः बिहार में UGC नियमों के विरोध का वीडियो GenZ प्रदर्शन का बताकर भ्रामक दावा किया गया

Fact Check hi Featured Misleading

सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का पुतला फूंके जाने के एक वीडियो को देश में GenZ प्रदर्शन का बताकर शेयर किया जा रहा है। पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा हैंडल्स इस वीडियो को शेयर कर दावा कर रहे हैं कि कथित तौर पर GenZ-शैली के विरोध प्रदर्शन पूरे भारत में फैल रहे हैं, जिसमें प्रधानमंत्री के पुतले जलाए जा रहे हैं। भारतीय सेना और पुलिस को भ्रष्टाचार और हिंसा के लिए निशाना बनाया जा रहा है।

एक यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘भारत जल्द ही ढहने वाला है। भारत के युवा आंदोलन “कॉकरोच जनता पार्टी” द्वारा GenZ-शैली के विरोध प्रदर्शन पूरे भारत में फैल रहे हैं, जिसमें प्रधानमंत्री के पुतले जलाए जा रहे हैं और भारतीय सेना तथा पुलिस को भ्रष्टाचार और हिंसा के लिए निशाना बनाया जा रहा है। GenZ पार्टी भारत का सबसे लोकप्रिय आंदोलन बन गई है।’

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फैक्ट चेकः

DFRAC की टीम ने जांच में पाया कि वायरल वीडियो के साथ झूठा दावा किया गया है। यह वीडियो हाल-फिलहाल का नहीं है, बल्कि जनवरी में बिहार के आरा में यूजीसी के नए नियमों के विरोध में पीएम मोदी के पुतले के साथ हुए प्रदर्शन का है। वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें यह वीडियो एक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट मिला, जिसके साथ इसे आरा में हुए प्रदर्शन का बताया गया है। इस पोस्ट के जानकारी दी गई है, ‘UGC बिल के नियम, 2012 के मौजूदा नियमों की जगह ज़्यादा सख़्त उपाय लाना चाहते हैं, ताकि हाशिए पर पड़े तबकों के छात्रों—खास तौर पर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों—को शामिल किया जा सके। इसका मुख्य मकसद जाति-आधारित भेदभाव को रोकना और कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सभी के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना है। इससे BJP पार्टी के मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है। अब यह BJP बनाम BJP की लड़ाई बन गई है।’ (हिन्दी अनुवाद)

जांच के दौरान हमने पाया कि इस वीडियो को इससे पहले पेट्रोल-डीजल की किल्लत होने पर पीएम मोदी के खिलाफ प्रदर्शन का बताकर शेयर किया गया था। उस वक्त DFRAC की टीम ने इस वीडियो का फैक्ट चेक किया था, जिसे यहां क्लिक करके पढ़ा जा सकता है।

उस वक्त हमारी टीम आरा के स्थानीय मीडिया प्लेटफॉर्म Ara News के पत्रकार आमरेंद्र से संपर्क किया था। आमरेंद्र ने हमें बताया था कि वायरल वीडियो आरा का ही है, लेकिन यह हाल-फिलहाल का नहीं है। उन्होंने यह भी बताया था कि यह वीडियो जनवरी महीने में यूजीसी नियमों के खिलाफ आरा के चंदवा मोड़ पर पीएम मोदी का पुतला फूंके जाने का है।

वहीं हमारी टीम ने आरा पुलिस से भी संपर्क किया। पुलिस ने भी हमें बताया कि आरा में पीएम मोदी का पुतला फूंके जाने की हाल-फिलहाल में कोई घटना नहीं हुई है। पुलिस ने भी यही बताया कि वायरल वीडियो पुराना है।

निष्कर्षः

DFRAC के फैक्ट चेक से साफ है कि सोशल मीडिया पर शेयर किया गया वीडियो बिहार के आरा में प्रदर्शन का हाल-फिलहाल का वीडियो नहीं है। यह वीडियो यूजीसी के नियमों के खिलाफ जनवरी में हुए प्रदर्शन का है। इसलिए यूजर्स का दावा भ्रामक है।