सोशल मीडिया पर मस्जिद तोड़े जाने की एक वीडियो शेयर की जा रही है। इस वीडियो के साथ पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी समर्थित हिन्दुओं द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों की मस्जिदों, चर्चों और अन्य इबादतगाहों को तोड़े जाने का दावा किया गया है। इस वीडियो को पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा हैंडल्स द्वारा शेयर कर मानवाधिकारों के उल्लंघन से जोड़ा जा रहा है।
इस वीडियो को शेयर करते हुए एक पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा यूजर ने अंग्रेजी भाषा में कैप्शन लिखा, जिसका हिन्दी अनुवाद है, ‘भारत में मानवाधिकारों का उल्लंघन। पश्चिम बंगाल में चुनावों के बाद, हिंदू BJP समर्थकों द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित मस्जिदों, चर्चों और अन्य पूजा स्थलों को नष्ट किया जा रहा है। भारत में अल्पसंख्यक समुदाय यातना और हिंसा का सामना कर रहे हैं। जागो!!’

फैक्ट चेकः
DFRAC की टीम ने जांच में पाया कि वायरल वीडियो पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं द्वारा मस्जिद तोड़े की घटना का नहीं है। यह वीडियो उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के मुगलसराय का है, जहां जामा मस्जिद के कुछ हिस्से को मस्जिद कमेटी के सदस्यों द्वारा तोड़ा गया। हमें यह वीडियो एक यूट्यूब चैनल पोस्ट मिला।
वहीं आगे की जांच में हमें ज़ी सलाम और दैनिक भास्कर सहित अन्य मीडिया रिपोर्ट्स भी मिलीं। ज़ी सलाम की रिपोर्ट में बताया गया है, ‘उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई का डर है. इस कार्रवाई के डर से मुस्लिम समाज ने खुद ही जामा मस्जिद के तीन ऐतिहासिक मीनारों को ध्वस्त कर रहा है. प्रशासन ने तीन दिन की मोहलत दी थी। PWD ने इस जामा मस्जिद को सरकारी जमीन (सड़क) की भूमि पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया था और अतिक्रमण वाले हिस्से को हटाने के लिए तीन दिन की मोहलत दी थी. PWD के नक्शे के मुताबिक मस्जिद का कुछ हिस्सा सार्वजनिक भूमि और सड़क के दायरे में आ रहा था.’

इन मीडिया रिपोर्ट्स में मस्जिद कमेटी के सेक्रेटरी मोहम्मद मोबीन का बयान भी प्रकाशित है, ‘कथित अतिक्रमण को हटाने के लिए बहुत कम समय दिया गया। अगर हम खुद इसे नहीं हटाते, तो बुलडोजर चलता जिससे पूरी इमारत को खतरा हो सकता था। भारी मन से हमें अपनी तीन मीनारों को भी तोड़ना पड़ रहा है।’
वहीं हमारी टीम ने वायरल वीडियो के संदर्भ में मुगलसराय निवासी नाजिम खान और मोहम्मद आसिफ से संपर्क किया। दोनों ने वायरल वीडियो के मुगलसराय जामा मस्जिद के होने की पुष्टि की है।
निष्कर्षः
DFRAC के फैक्ट चेक से साफ है कि सोशल मीडिया पर शेयर किया गया वीडियो पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं द्वारा मस्जिद तोड़े जाने का नहीं है। यह वीडियो उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में जामा मस्जिद के मीनारों को मस्जिद कमेटी द्वारा तोड़े जाने का है। इसलिए यूजर्स का दावा भ्रामक है।

