सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति की धारदार हथियार से हत्या करते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो के साथ यह दावा किया जा रहा है कि एक मुस्लिम व्यक्ति की केवल इसलिए बेरहमी से हत्या कर दी गई क्योंकि उसने “जय श्री राम” का नारा लगाने से इनकार कर दिया था।

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सोशल साईट X पर वेरिफाइड यूजर SIADecoded ने वायरल वीडियो को शेयर कर लिखा कि “जय श्री राम” का नारा न लगाने पर बेरहमी से सिर कलम नवी हुसैन नाम का एक मुस्लिम व्यक्ति, अपने बच्चों के लिए नाश्ता खरीदने के लिए राहुल चौहान नाम के एक हिंदू व्यक्ति की दुकान पर गया। उस हिंदू व्यक्ति, राहुल चौहान ने उससे “जय श्री राम” कहने को कहा – यह एक ऐसा नारा है जिसे बोलने से मना करने पर, BJP/RSS समर्थित हिंदुत्ववादी समूहों द्वारा सैकड़ों मुसलमानों, ईसाइयों और अन्य लोगों की हत्या कर दी गई है, जबकि कई अन्य लोग लापता हो गए हैं। जब नवी हुसैन ने इस मांग को मानने से इनकार कर दिया, तो उस हिंदू व्यक्ति ने सड़क पर ही उस पर हमला कर दिया; सबके सामने उसका गला काट दिया, पीड़ित का सिर उसके शरीर से अलग कर दिया, और उसे सड़क के बीचों-बीच छोड़ दिया। क्या भारत में मुसलमानों को भी इसी के अनुरूप कदम उठाने चाहिए? यह आपसी फूट का ही नतीजा है।

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वहीं एक अन्य वेरिफाइड यूजर Revolt ने वायरल वीडियो को शेयर कर लिखा कि बिहार, इंडिया में हिंदुओं पर ज़ुल्म नवी हुसैन नाम का एक मुस्लिम आदमी अपने बच्चों के लिए खाना खरीदने के लिए राहुल चौहान नाम के एक हिंदू आदमी की दुकान पर गया। राहुल चौहान ने नवी हुसैन को “जय श्री राम” बोलने के लिए मजबूर किया, जो हिंदू इंडिया का एक टेररिस्ट नारा है। जब नवी हुसैन ने मना किया, तो हिंदू आदमी ने सड़क पर उस पर हमला किया, सबके सामने उसका गला काट दिया, पीड़ित का सिर धड़ से अलग कर दिया, और उसे सड़क के बीच में छोड़ दिया। इंडिया के साथ एक टेररिस्ट देश जैसा बर्ताव किया जाना चाहिए। #IndiaOut
फैक्ट चेक:

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वायरल वीडियो के साथ किये गए दावे की सत्यता जाँचने के लिए DFRAC ने दावे से जुड़े कीवोर्ड्स गूगल पर सर्च किये। इस दौरान हमें घटना से सबंधित टाईम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट में बताया गया कि बिहार के अररिया स्थित फोर्ब्सगंज शहर के व्यस्त मार्केटिंग यार्ड चौक पर कुछ ही मिनटों के अंतराल में दो युवकों की हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि उनमें से एक ने झगड़े के दौरान दूसरे का सिर काट दिया था, जिसके बाद भीड़ ने उसे पीट-पीटकर मार डाला। यह हिंसा बाज़ार क्षेत्र में जगह को लेकर हुए विवाद के कारण भड़की थी। “सत्तू” बेचने वाले रवि चौहान और पिकअप ड्राइवर नबी हुसैन उर्फ अली हुसैन के बीच अपनी-अपनी जगह तय करने को लेकर झड़प हो गई थी — चौहान अपनी लकड़ी की रेहड़ी लगाना चाहता था, जबकि हुसैन उसी जगह पर अपना वाहन पार्क करना चाहता था। जो बात शुरू में सिर्फ़ कहा-सुनी थी, वह जल्द ही जानलेवा बन गई। गुस्से में आकर, चौहान ने कथित तौर पर एक धारदार चाकू निकाला और हुसैन पर कई वार किए, जिसके बाद उसने सबके सामने उसका सिर काट दिया। पीड़ित की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका कटा हुआ सिर कुछ दूरी पर जा गिरा। इसके बाद, बताया जाता है कि आरोपी कुछ दूर तक कटा हुआ सिर हाथ में लेकर चलता रहा, फिर उसे ज़मीन पर रखकर भागने की कोशिश करने लगा। चश्मदीदों ने बताया कि हालांकि शुरू में लोग सदमे में आकर यह सब देखते रहे, लेकिन जल्द ही स्थानीय लोगों ने चौहान का पीछा किया और उसे पकड़ लिया। पुलिस के दखल देने से पहले ही भीड़ ने उसे बुरी तरह पीट दिया। पुलिस उसे तुरंत पास के अस्पताल ले गई, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।

इसके अलावा हमें घटना से जुड़ी अन्य मीडिया संस्थान एनडीटीवी इंडिया और इंडिया टुडे की रिपोर्ट मिली। जिसमे अररिया ज़िले के SP जितेंद्र कुमार के हवाले से बताया गया कि यह घटना सुबह के समय हुई, जब पिक-अप गाड़ी चलाने वाले नबी हुसैन का रवि चौहान से झगड़ा हो गया। SP ने बताया, “चौहान एक स्थानीय बाज़ार में सत्तू (भुने हुए चने का आटा) बेचा करता था। वहीं पर उसका हुसैन से झगड़ा हुआ और उसने एक कटार से हुसैन पर हमला कर दिया। पुलिस ने वह कटार ज़ब्त कर ली है।” उन्होंने आगे बताया, “वहां मौजूद लोगों ने चौहान को पकड़ लिया और तब तक उसकी पिटाई करते रहे, जब तक कि पुलिस की एक टीम ने उसे वहां से बचाया नहीं। घटना की ख़बर मिलते ही पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई थी। चौहान को अस्पताल ले जाया गया, जहां चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। दोनों मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है।”
निष्कर्ष:
वायरल वीडियो के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक और गलत है। यह घटना “जय श्री राम” का नारा न लगाने से जुड़ी नहीं है, बल्कि यह बाजार में जगह को लेकर हुए आपसी विवाद से उत्पन्न हिंसा का मामला है। वीडियो को सांप्रदायिक रंग देकर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे समाज में तनाव फैल सकता है।

