जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में भारतीय सेना के संयुक्त ऑपरेशन त्राशी-1 में तीन आतंकी मारे गए हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर कई पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा अकाउंट्स ने यह झूठ फैलाया कि भारतीय सेना ने कश्मीर में बेगुनाह लोगों पर रसायनिक हथियारों का प्रयोग किया है।
मणिपुर पोस्ट नामक यूजर ने लिखा, ‘मणिपुर ने कश्मीर में ह्यूमन राइट्स के उल्लंघन पर भारतीय सेना की आलोचना की! मणिपुर जॉइंट एक्शन कमेटी ने भारतीय सेना द्वारा कश्मीर के लोगों के खिलाफ केमिकल हथियारों के इस्तेमाल के बाद वहां के लोगों के प्रति गहरा दुख और संवेदना जताई है। जिनेवा कन्वेंशन और इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कानून के तहत केमिकल हथियारों का इस्तेमाल बैन है।’ (हिन्दी अनुवाद)

वहीं एक अन्य पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा अकाउंट जर्द सी गना नामक यूजर ने लिखा, ‘ब्रेकिंग न्यूज़। भारतीय सेना ने जम्मू और कश्मीर में बेगुनाह लोगों को निशाना बनाकर केमिकल वेपन का इस्तेमाल किया है, जिससे घर तबाह हो गए और लोग बुरी तरह जल गए। केमिकल वेपन का इस्तेमाल जिनेवा कन्वेंशन और UN ह्यूमन राइट्स कानूनों का उल्लंघन है।’

फैक्ट चेकः
DFRAC की टीम ने जांच में कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा रसायनिक हथियारों के प्रयोग के दावे को फेक पाया है। हमें किसी भी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की किसी भी रिपोर्ट में रसायनकि हथियारों के प्रयोग, घरों में आग लगने और लोगों के बुरी तरह झुलसने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली, क्योंकि अगर रसायनिक हथियारों का प्रयोग हुआ होता है और लोग प्रभावित हुए होते तो यह अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में होता। वहीं, जिस वीडियो को रसायनिक हथियारों के प्रयोग का बताकर शेयर किया जा रहा है, वह दरअसल किश्तवाड़ में भारतीय सेना का आतंकियों के खिलाफ चलाया गया संयुक्त ऑपरेशन त्राशी-1 का है।

हमें, कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF की संयुक्त टीम द्वारा ऑपरेशन त्राशी-1 चलाए जाने की मीडिया कवरेज मिली। इन रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इस ऑपरेशन के दौरान जैश-ए-मोहम्मद के 3 आतंकवादी मारे गए, जिसमें मोस्ट वांटेड कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल था। यह ऑपरेशन पूरी तरह से सफल रहा और इसमें कोई हताहत नहीं हुआ, सिर्फ स्निफर डॉग टायसन को चोट लगी, जिसने ऑपरेशन की शुरुआत की थी।

निष्कर्षः
DFRAC के फैक्ट चेक से साफ है कि कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना के संयुक्त ऑपरेशन त्राशी-1 के वीडियो को रसायनिक हथियारों के प्रयोग का बताकर फेक दावा किया गया है।

