क्या दलित नफरत के केंद्र में बदल रहा है इंस्टाग्राम?

सोशल मीडिया का शाब्दिक अर्थ एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होता है| जहां यह कई लोगों के लिए वरदान है, वही दूसरों के लिए अभिशाप बन सकता है। जैसा कि लोग कहते हैं कि सोशल मीडिया बेजुबानों को आवाज देता है , यह कुछ हद तक सच है| लेकिन यह हमारे समाज के विरोधी तत्वों को भी आवाज देता है। इन असामाजिक तत्वों के मन में ऐसी रूढ़िवादी विचारधारा हैं कि इसके नीचे या ऊपर कुछ भी उनके लिए काम नहीं करता है। वे सभी अलग-अलग समुदायों और लोगों के बीच नफरत फैलाने में व्यस्त हैं। सोशल मीडिया के जरिए यह अब बहुत आसान हो गया है। यह हमारे राष्ट्र के लिए बड़े ही दुख की बात है | जो युवा देश के लिए एक बड़ी संपत्ति हो सकते हैं, वे वास्तव में एक बोझ बनते जा रहे हैं। अगर देखा जाए तो जिस सदी मे हम रेह है जो की 21वी सदी है, ऐसी रूढ़िवादी मानसिकता के बारे में सोचना एक सकारात्मक स्थान में रहने वाले व्यक्ति के लिए मुश्किल है| लेकिन, यह मौजूद है और इसे तब तक मिटा नहीं सकता जब तक कि वे स्वयं उस पर निर्णय नहीं लेते। हुमे बहुत हैरानी हुई जब हमने इंस्टाग्राम पर समाज के विभिन्न वर्गों में नफरत फैलाने वाले बहुत सारे खातों को देखा, जैसे कि एक तरफ ऐसे खाते थे जो महिलाओं को नीचा दिखा रहे हैं, वहीं कुछ अन्य हैं जो बहुजन समाज/दलितों को नीचा दिखाते हैं। महिलाओं के खिलाफ नफरत इस तरह के खातों के यूजर्स के लिए जिनके हिसाब से महिलाओं को शिष्ट, शुद्ध, पतिव्रत, अच्छी तरह से तैयार होना चाहिए, संक्षेप में, सुंदरता के निर्धारित मानकों को पूरा करना चाहिए| उनके लिए “फेमिनिस्ट” शब्द हाराम है। हमने कई पोस्ट और मीम्स देखे हैं जहां इंस्टाग्राम पर महिलाओं का मजाक उड़ाया जाता है।   दलितों के खिलाफ नफरत नफरत फैलाने का स्तर महिलाओं तक ही सीमित नहीं है बल्कि दलितों को भी अपने घेरे में ले चुका है। यह बात जगजाहिर है  कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का हमारे संबविधा को तैयार करने मे एक महततावपूर्ण योगदान है| किन्तु उनको भी  सोशल मीडिया साइट्स पर ट्रोल किया जा रहा है । ये सभी प्रयास समाज के विभिन्न वर्गों में नफरत की अधिकतम मात्रा को खींचने के लिए हैं। लोग भीमराव के खिलाफ अपना आंदोलन दिखाते हैं क्योंकि वह वही थे जिन्होंने एससी / एसटी ( अनुसूचित जाति / जनजाति) आदि के लिए आरक्षण की वकालत की थी। इंस्टाग्राम पर तरह-तरह के अकाउंट बनाए जाते हैं जिससे पता चलता है कि लोगों के मन में कितनी नफरत है। भीमराव अंबेडकर ने एक नव बौद्ध आंदोलन शुरू किया था जिसके तहत उन्होंने 1956 में नवयान नामक बौद्धों के लिए नए स्कूल बनाए| बाद मे  लगभग आधा मिलियन दलित उनके साथ जुड़ गए और खुद को नवायान बौडिस्ट में परिवर्तित कर लिया| इस आंदोलन पर भी इंस्टाग्राम पर बहुत सारे मीम्स शेयर किए जाते हैं क्योंकि इस आंदोलन ने हिंदू धर्म को खारिज कर दिया| और न केवल भारत की जाति व्यवस्था को चुनौती दी बल्कि दलितों के अधिकारों को बढ़ावा दिया। मूलनिवासी शब्द दलितों को नीचा दिखाने के लिए कई मीम्स के रूप में भी फैलाया जा रहा है| कुछ खाते दलितों पर ब्राह्मण वर्चस्व दिखा रहे हैं और समाज में वैमनस्य पैदा कर रहे हैं। निष्कर्ष ऐसी तस्वीरों और मीम्स का मुख्य उद्देश्य नकारात्मकता फैलाना और सब समाज के विभिन्न वर्गों के बीच एक दीवार बनाती है। इसलिए समाज के राष्ट्रविरोधी तत्वों द्वारा निर्धारित एजेंडे को पूरा करना। हमारा सुझाव है कि ऐसे मुद्दों और इंस्टाग्राम पर उपयोगकर्ताओं की जांच करें ताकि ऐसी सभी अपमानजनक गतिविधियों को रोका जा सके | और एसे कदम उठाए जाए जिससे […]

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चीनी सोशल मीडिया

चीनी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर विदेशी देशों को बना रहे हैं निशाना

सोशल मीडिया पर इन दिनों मार्केटिंग या ई-मार्केटिंग आम बात है। हम अक्सर अपने व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट को स्क्रॉल करते समय विभिन्न उत्पादों और सेवाओं से जुड़े ट्वीट और पोस्ट देखते हैं। इसके लिए कंपनियां विभिन्न अकाउंट हायर करती हैं। लेकिन चीन जैसे कुछ देशों द्वारा इसी अवधारणा का उपयोग विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए चीन के बारे […]

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DFRAC विश्लेषणः ‘दलितों’ के खिलाफ भारत का ‘अन-सोशल मीडिया’

सोशल मीडिया देश के वंचित समुदायों, दूर दराज के इलाक़ों में रहने वाले लोगों और ग़रीब तबकों के लिए एक कारगर औज़ार की तरह है, जिससे वह अत्याचारों और प्रताड़नाओं के ख़िलाफ़ अपने इंसाफ़ की लड़ाई को पुरजोर तरीक़े से लड़ रहे हैं। ग्रामीण अंचलों में पहले होने वाली घटनाएं पहले अख़बारों के क्षेत्रीय पन्नों […]

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EXCLUSIVE REPORT: बुल्ली बाई ऐप विवाद पर “सांप्रदायिक एजेंडे” का खुलासा

सोशल मीडिया पर नफरत का प्रसार और प्रचार आम बात हो चुकी है। हर दिन धर्म और जातियों को लेकर यहां गाली-गलौज, फूहड़ता और सांप्रदायिकता वाले कंटेंट को परोसा जा रहा है। यहां उन लोगों को टारगेट किया जाता है, जो इस नफरत के खिलाफ फैक्ट चेक, खोजी, सूचनात्मक और सच्चे मायनों में पत्रकारिता करते […]

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फैक्ट-चेक: आप विधायक के यूपी पुलिसकर्मी पर बाइक चुराने के दावे का जानिए सच

हाल ही में आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश बाल्यान ने यूपी पुलिस पर बाइक चोरी का गंभीर आरोप लगाते हुए एक विडियो शेयर किया। उन्होने ट्वीट कर कहा, “ये आज का मामला है, हापुड़ में @Uppolice का एक कॉन्स्टेबल बाइक चुराने की कोशिश करते हुए वीडियो में कैद हो गया है, योगी सरकार बनने […]

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DFRAC विशेषः हरिद्वार की “धर्म संसद” में दिए गए मुस्लिम विरोधी भाषणों का विश्लेषण

उत्तराखंड के हरिद्वार में खड़खड़ी स्थित वेद निकेतन आश्रम में 17 और 19 दिसंबर को हिंदुत्व संगठनों के चरमपंथियों का एक बड़ा कार्यक्रम ‘धर्म संसद‘ के नाम पर आयोजित हुआ। तीन दिनों के इस कार्यक्र्म में मुस्लिम और ईसाई विरोधी भावनाओं का एक असाधारण रूप देखा गया। जिसमे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हथियार उठाने और […]

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फैक्ट चेक: क्या अमेठी में कांग्रेस कार्यकर्ता ने पत्रकार के साथ बदसलूकी की है, जानें वायरल वीडियो का सच

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक न्‍यूज चैनल का पत्रकार कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी से सवाल पूछने की कोशिश करता है तो उसे एक कांग्रेसी कार्यकर्ता धमकी देते हुए कहता है कि सुनो सुनो सुनो ठोक के यहीं बजा दूंगा। मारूंगा तो गिर जाओगे। इस वीडियो को […]

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पार्ट 1 : जाकिर नाईक का संगठन प्रतिबंधित लेकिन उसका मिशन अब भी जारी

भारत सरकार ने कट्टर सलाफ़ी स्कॉलर जाकिर नाईक के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को सबसे पहले 2016 मे प्रतिबंधित किया था उसके बाद अभी दुबारा से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रतिबंधित कर दिया है। 2016 के  बाद से जाकिर नाईक भारत से फरार है। भारत सरकार ने उसका चैनल, वेबसाइट, ट्विटर और फेसबुक […]

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जयपुर डायलॉग्स द्वारा फैलाये जा रहे नफरत और सांप्रदायिकता का विश्लेषण

जयपुर डायलॉग्स फोरम एक गैर लाभकारी संस्था (एनजीओ) है जो कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 थिंक टैंक के तौर पर पंजीकृत है। एनजीओ का पंजीकरण 24-11-2016 को कराया गया था। पंजीकरण संख्या U85300RJ2016NPL056428 है। जयपुर डायलॉग्स फोरम के अध्यक्ष संजय दीक्षित, सचिव पंकज जोशी और कोषाध्यक्ष प्रकाश टेकवानी हैं। एनजीओ का दावा है कि […]

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