ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया है, जिससे दुनियाभर में पेट्रोलियम और गैस की सप्लाई पर असर पड़ रहा है। अमेरिका पर हॉर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक क्षतिग्रस्त अमेरिकी युद्धपोत का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसके साथ दावा किया जा रहा है कि ईरान के हमले में अमेरिकी नेवी का यह युद्धपोत क्षतिग्रस्त हुआ है। इस युद्धपोत पर US Navy लिखा हुआ देखा जा सकता है।
इस वीडियो को शेयर करते हुए Iranian Force नामक यूजर ने लिखा, ‘Breaking… अभी-अभी, U.S. Navy पर एक बड़े हमले की खबर मिली है। फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि ईरान की मिसाइल शक्ति दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।’ (हिन्दी अनुवाद)

वहीं कई अन्य यूजर्स ने भी इस वीडियो को इसी तरह के दावे के साथ शेयर किया है। कामेश कुमार नामक यूजर ने वीडियो को पोस्ट कर लिखा, ‘ईरान ने अमेरिकी नेवी के जहाज पर काई मिसाइल दागी जिसे उसमें भयंकर आग लग गई। अमेरिका अब इस युद्ध में हारता जा रहा है केवल ट्रंप के गलत नीति की वजह से अमेरिका का थू थू हो रही है।’

फैक्ट चेकः
DFRAC की टीम ने जांच में पाया कि वायरल वीडियो अमेरिकी नेवी की किसी क्षतिग्रस्त युद्धपोत का ओरिजिनल वीडियो नहीं है, बल्कि यह AI-जनरेटेड वीडियो है। हमारी टीम ने सबसे ईरानी हमले में अमेरिकी युद्धपोत के क्षतिग्रस्त होने के संदर्भ में गूगल पर कुछ कीवर्ड्स सर्च किया, लेकिन हमें किसी भी मुख्यधारा की मीडिया द्वारा प्रकाशित ऐसी कोई खबर नहीं मिली।
इसके बाद वीडियो की बारीकी से जांच करने पर हमने पाया कि इस वीडियो में जहाज की सतह, आग की लपटों और धुएं की गति में अस्वाभाविक पैटर्न दिखाई देता है। जहाज के ऊपरी हिस्से की संरचना, रडार और एंटेना जैसे उपकरणों के किनारों में हल्का ब्लर और विकृति दिखाई देती है, जो अक्सर एआई-जनरेटेड वीडियो में देखने को मिलती है। इसके बाद हमने इस वीडियो की AI-डिटेक्टर टूल्स हाइव मॉडरेशन और डीपफेक-ओ-मीटर (यूनिवर्सिटी एट बफेलो) की AVSRDD (2025) से जांच की। हमारी जांच में परिणाम सामने आया कि यह वीडियो एआई-जनरेटेड है।

वहीं हमारी टीम ने वीडियो के बारे में और ज्यादा विस्तृत जानकारी के लिए एआई विशेषज्ञ मयंक शर्मा से संपर्क किया। मयंक ने वीडियो का विश्लेषण करने के बाद बताया कि वीडियो में आग, धुएं और जहाज की संरचना के आसपास जो विजुअल आर्टिफैक्ट दिखाई देते हैं, वे एआई-जनरेटेड कंटेंट में अक्सर पाए जाते हैं। खासकर धुएं की बनावट, किनारों की असमानता और कुछ फ्रेम में डिटेल्स का अचानक बदलना इस बात का संकेत है कि यह फुटेज वास्तविक कैमरे से रिकॉर्ड नहीं बल्कि एल्गोरिदमिक रूप से तैयार किया गया हो सकता है।
हमारी टीम ने वीडियो पोस्ट करने वाले यूजर Iranian Force की जांच की। जांच में हमने पाया कि यह यूजर्स सोशल मीडिया पर लगातार फेक और भ्रामक सूचनाएं शेयर कर रहा है। इस यूजर ने खुद को ईरानी फोर्स की पहचान बताई और लोकेशन में अमेरिका का रहने वाला बताया है, लेकिन एक्स (पूर्व ट्विटर) पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह अकाउंट पाकिस्तान से संचालित हो रहा है, जिसे यहां दिए गए ग्राफिक्स में आसानी से देखा जा सकता है।

निष्कर्षः
DFRAC के फैक्ट चेक से साफ है कि सोशल मीडिया पर शेयर किया गया वीडियो ईरानी हमले में किसी अमेरिकी युद्धपोत के क्षतिग्रस्त होने का नहीं है। यह वीडियो AI-जनरेटेड है। इसलिए यूजर्स का दावा फेक है।

