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बुधवार, सितम्बर 28, 2022
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क्या अनपढ़ थे मौलाना आज़ाद? कांग्रेस ने लगातार 5 मुसलमानों को बनाया था शिक्षा मंत्री? पढ़ें फ़ैक्ट-चेक

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सोशल मीडिया साइट्स पर दावा किया जा रहा है कि भारत के पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री और स्वतंत्रता सेनानी मौलाना आज़ाद समेत लगातार 5 मुसलमानों को शिक्षा मंत्री बनाया गया। साथ ही मौलाना के बारे में कई तरह के भ्रांतियां भी फैलाई जा रही हैं। 

पीएन रॉय नामक यूज़र ने ट्वीट किया- “भारत के आज़ाद होने के बाद मिशनरी स्कूलों पर पाबंदी लगानी चाहिए थी लेकिन एक अनपढ़ मदरसा छाप मौलाना आज़ाद समेत लगातार 5 मुसलमानों को शिक्षा मंत्री बनाया गया। मिशनरी स्कूलों और मदरसों को फलने फूलने की पूरी छूट दी गई और 1955 के बाद हिंदू स्कूल खुलने पर रोक लगा दी गई। सोनिया के आने के बाद स्कूलों को भी माइनोरिटी स्कूल का दर्जा दे दिया गया। बड़े पैमाने पर नार्थ ईस्ट और पूरे भारत में ईसाईकरण किया गया। 2014 के बाद मोदी के आने के बाद इस सिलसिले पर रोक तो नहीं लगी, लेकिन धीमा ज़रूर हो गया। नार्थ-ईस्ट के लोग ख़ासतौर से नागा वापस हिंदू हो रहे हैं।” 

गौरव महाजन ने भी इसी से मिलता जुलता ट्वीट किया, “हमारे देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जो खुद कभी स्कूल नहीं गये। मदरसे में तामील पाने वाले को नेहरू ने लगभग 10 सालों तक भारत का शिक्षा मंत्री बनाया। मौलाना आजाद ने गुरुकल पर रोक लगा कर मदरसों को इस्लामिक शिक्षा की छुट दे दी। कोंग्रेस हमेशा हिन्दू विरोधी रही है।”

फ़ैक्ट चेक: 

उपरोक्त दोनों ट्वीट में तीन दावे हैं। पहला दावा है कि मौलाना आज़ाद समेत लगातार 5 मुसलमानों को शिक्षा मंत्री बनाया गया, दूसरा; मिशनरी स्कूलों और मदरसों को फलने फूलने की पूरी छूट दी गई और 1955 के बाद हिंदू स्कूल खुलने पर रोक लगा दी गई और तीसरा दावा कि देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जो खुद कभी स्कूल नहीं गये। 

इन तीनों दावों का फ़ैक्ट-चेक करने के लिए हमने इंटरनट पर कुछ ख़ास की-वर्ड की मदद से एक सिंपल सर्च किया। सबसे पहले हमने ये जानने की कोशिश की क्या मौलाना आज़ाद अनपढ़ थे? 

हमने गूगल पर उर्दू में मौलाना की किताब “आज़ाद की कहानी आज़ाद की ज़ुबानी” सर्च की। हमें ये किताब साहित्यिक वबसाइट रेख़्ता पर मिली। इस किताब के इंट्रों में रेख़्ता द्वारा बताया गया है- “अबुल कलाम आज़ाद का जन्म 1888 में मक्का शहर में हुआ। उनका असल नाम मुहिउद्दीन अहमद था मगर उनके पिता मौलाना सैयद मुहम्मद ख़ैरुद्दीन बिन अहमद उन्हें फ़िरोज़ बख़्त के नाम से पुकारते थे। अबुल कलाम आज़ाद की माता आलिया बिंत-ए-मुहम्मद का संबन्ध एक शिक्षित परिवार से था। आज़ाद के नाना मदीना के एक प्रतिष्ठित विद्वान थे जिनकी प्रसिद्धी दूर-दूर तक थी। अपने पिता से आरम्भिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद आज़ाद मिस्र की प्रसिद्ध शिक्षा संस्थान जामिया अज़हर चले गए जहाँ उन्होंने प्राच्य शिक्षा प्राप्त की।”

आगे और जानकारी देते हुए बताया गया है कि- “अरब से प्रवास करके हिंदुस्तान आए तो कलकत्ता को अपनी कर्मभूमि बनाया। यहीं से उन्होंने अपनी पत्रकारिता और राजनीतिक जीवन का आरंभ किया। कलकत्ता से ही 1912 में ‘अल-हिलाल’ के नाम से एक साप्ताहिक निकाला। यह पहला सचित्र राजनैतिक साप्ताहिक था और इसकी मुद्रित प्रतियों की संख्या लगभग 52 हज़ार थी। इस साप्ताहिक में अंग्रेज़ों की नीतियों के विरुद्ध लेख प्रकाशित होते थे, इसलिए अंग्रेज़ी सरंकार ने 1914 में इस साप्ताहिक पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद मौलाना ने ‘अलबलाग़’ नाम से दूसरा अख़बार जारी किया। यह अख़बार भी आज़ाद की अंग्रेज़ विरुद्ध नीति पर अग्रसर रहा।”

क्या भारत में लगातार पांच शिक्षा मंत्री मुस्लिम हुए? ये जानने के लिए हमने की-वर्ड “लिस्ट ऑफ़ एजुकेशन मिनिस्टर ऑफ़ इंडिया” की मदद से एक सिंपल सर्च किया। हमने पाया कि ये दावा ग़लता है क्योंकि मौलाना के बाद दूसरे शिक्षा मंत्री केएल (कालू लाल) श्रीमाली थे। इनके बाद लगातार तीन मुस्लिम शिक्षा मंत्री हुए हैं।  

क्या मिशनरी स्कूलों और मदरसों को फलने फूलने की पूरी छूट दी गई और 1955 के बाद हिंदू स्कूल खुलने पर रोक लगा दी गई थी? 

इसका फ़ैक्ट-चेक करने के लिए ख़ास की-वर्ड और की-फ़्रेज़ के माध्यम से सर्च किया पर हमें कहीं ऐसा कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिला। अलबत्ता वेबसाइट आवाज़ द् वाइस पर पब्लिश एक लेख में बताया गया है कि देश के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद ने मौलाना आज़ाद की वक्तव्य कला पर चर्चा करते हुए कहा था,‘‘उन्होंने अपनी तकरीरों से देश में जागरुकता की ऐसी लहर दौड़ाई कि चारोंं तरफ़ आज़ादी का तूफ़ान उमड़ आया हो।’’ मौलाना आज़ाद, मज़हब के नाम पर अलगाववाद को बढ़ावा देने वाली हर गतिविधि के ख़िलाफ़ थे।

भारत रत्न मौलाना आज़ाद ‘जामिया मिलिया इस्लामिया’ जैसी आला दर्जे की यूनिवर्सिटी के संस्थापक सदस्य रहे। मौलाना आज़ाद ने स्वतंत्र भारत में शिक्षा का आधुनिक ढांचा खड़ा किया। उन्होंने देश में शिक्षा के अलावा सांस्कृतिक नीतियों की भी नींव रखी। चित्रकला, मूर्तिकला और साहित्य के विकास के लिए मौलाना आज़ाद ने ललित कला अकादेमी, संगीत नाटक अकादेमी और साहित्य अकादेमी की स्थापना की। उन्होंने साल 1950 में ‘इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस’ की स्थापना की, जिसका मुख्य काम अन्य देशों के साथ सांस्कृतिक संबंधों को बनाना और बढ़ाना था। मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय एकता की एक अनूठी मिसाल थे। भारतीय संविधान में धर्म निरपेक्षता, धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांतों को जुड़वाने में उनकी अहम भूमिका रही।

क्या मौलाना आज़ाद कभी स्कूल नहीं गये और मदरसे में तामील पाई? 

मौलाना आज़ाद कभी स्कूल नहीं गये सच है, पर मदरसे में तालीम पाई ये ग़लत है। मिस्र की मौजूदा बड़ी यूनिवर्सिटी अल-अज़हर गये थे। मौलाना आज़ाद के बारे में विकीपीडिया पेज के अनुसार उनकी शिक्षा घर पर ही हुई थी, जैसे ट्यूशन जो ख़ास टीचर्स द्वारा संपन्न होती है। (Azad was home-schooled and self-taught.)

निषकर्ष:

DFRAC के इस फ़ैक्ट चेक से स्पष्ट है कि मौलाना आज़ाद ने घर पर ही तालीम पाई थी और उनके शिक्षा मंत्री रहते किसी हिंदू स्कूल पर पाबंदी नहीं लगाई गई थी और मौलाना के बाद दूसरे शिक्षा मंत्री केएल श्रीमाली हुए हैं, इसलिए यूज़र्स द्वारा किया जा रहा दावा बेबुनियाद और भ्रामक है। 

दावा: अनपढ़ मदरसा छाप मौलाना आजाद समेत लगातार 5 मुसलमानों को शिक्षा मंत्री बनाया गया

दावाकर्ता: सोशल मीडिया यूज़र्स 

फ़ैक्ट चेक: भ्रामक 

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