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बुधवार, सितम्बर 28, 2022
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फैक्ट चेकः क्या अखिलेश सरकार में ‘मुस्लिम’ और योगी सरकार में ‘हिन्दू संस्कृति’ की निकली झांकी?

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उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों को लेकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए तमाम तरह के फेक न्यूज सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं। इन फेक न्यूज में विभिन्न संप्रदायों के बीच नफरत फैलाने वाली बातें लिखी रहती हैं, जिससे किसी समुदाय या फिर पंथ को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।

26 जनवरी को अभी पूरे देश ने गणतंत्रता दिवस मनाया। राजपथ पर निकलनी वाली परेड में विभिन्न राज्यों की झांकियां निकाली गईं। इन झांकियों में इन राज्यों की संस्कृतियों और सभ्यताओं को प्रदर्शित किया जाता है। उत्तर प्रदेश की झांकी को लेकर सोशल मीडिया पर दो फोटो का एक कोलाज वायरल कर पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार और वर्तमान योगी की सरकार के बीच तुलना की जा रही है।

वायरल हो रहे इस कोलाज में दिख रहा है कि एक फोटो में मजार या दरगाह है। वहीं फ्रंट पर मुस्लिम की तरह की दिख रहा पुतला दुआ मांगते दिखाया गया है। वहीं दूसरी फोटो में एक ऋषि महात्मा का पुतला दिख रहा है। सोशल मीडिया के यूजर्स दावा कर रहे हैं कि दरगाह या मजार वाली झांकी अखिलेश सरकार के वक्त की है, जबकि ऋषि महात्मा वाली झांकी योगी सरकार की है।

फेसबुक पर सोशल मीडिया यूजर स्वराज भारत नाम के यूजर ने लिखा- “समाजवादी राज में देवबंद को उत्तर प्रदेश की झांकी के तौर पर राजपथ पर पेश किया जाता था। वह देवबंद जो सऊदी अरब की हनफी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है, उस हनफ़ी विचारधारा को अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश की विचारधारा बताकर राजपथ पर पेश करते रहे। वहीं योगीराज में राजपथ पर गणतंत्र दिवस में उत्तर प्रदेश की क्या झांकी होती थी वह देखिये। बस हम यही चाहते हैं कि यही बदलाव कायम रहे अब फिर से यूपी में जिहादी वादी लोग सत्ता में ना आने पाए।”

पोस्ट का लिंक

फेसबुक पर कई अकाउंट द्वारा इस कोलाज को इन्हीं दावों के साथ पोस्ट किया गया है।

फैक्ट चेकः

सबसे पहले हमने मुस्लिम वाले फोटो की सच्चाई जानने की कोशिश की। गूगल पर इस फोटो को रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें न्यूज-18 का एक लेख मिला, जिसे 26 फरवरी 2015 को प्रकाशित किया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक यह झांकी यूपी की नहीं बिहार की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक- “बिहार राज्य की एक झांकी में एक मुस्लिम व्यक्ति को प्रार्थना करते हुए दिखाया गया है। पटना में मनेर के सूफी मंदिर को बिहार की झांकी में दर्शाया गया था, जो अपने बौद्ध तीर्थ स्थलों के लिए बेहतर जाना जाता है। जैसे ही पृष्ठभूमि में आमिर खुसरो के सूफी पद ‘छप तिलक सब छिनी रे’ की धुन बज रही थी, फ्लोट में मनेर में 17वीं सदी के संत मखदूम शाह दौलत की समाधि दिखाई गई।”

पोस्ट का लिंक

 

इस फैक्ट चेक से साबित होता है कि यह झांकी यूपी की नहीं बल्कि बिहार की है। आपको यह भी बता दें कि जिस वक्त ये झांकी प्रदर्शित की गई थी, उस वक्त बिहार में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार की थी, जिसके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे, जो अभी भी एनडीए गठबंधन में बतौर बिहार के सीएम हैं।

वहीं दूसरी फोटो को गूगल पर रिवर्स सर्च करने पर हमें दैनिक भास्कर की खबर का एक लिंक मिला। इस खबर के मुताबिक गणतंत्र दिवस 2021 की राजपथ पर हुई परेड में अयोध्या के राम मंदिर मॉडल की झांकी निकाली गई थी और इसे पहला स्थान भी मिला था।

रिपोर्ट का लिंक

 

इससे पहले 2021 में इन दोनों फोटो के कोलाज को वायरल कर अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ के बीच तुलनात्मक तरीके से पेश किया गया था। उस वक्त भी अखिलेश यादव को मुस्लिम परस्त बताते हुए बिहार की झांकी को यूपी का बताया गया था। इस कोलाज को तमाम फैक्ट चेक करने वाली वेबसाइटों ने इसे भ्रामक और झूठा करार दिया गया था।

निष्कर्षः

फैक्ट चेक से कई तथ्य निकलकर सामने आते हैं-
1- मुस्लिम की तरह दिख रही झांकी बिहार की नीतीश सरकार की थी, जिसे 2011 में राजपथ पर दिखाया गया था। नीतीश के साथ बीजेपी का गठबंधन है। इसका अखिलेश यादव की सपा सरकार से कोई ताल्लुक नहीं है।
2- दूसरी फोटो यूपी की ही है, जिसमें अयोध्या के राम मंदिर को दिखाया गया है। इसे यूपी सरकार की तरफ से पेश किया गया था।
3- दूसरी फोटो की झांकी इस साल गणतंत्र दिवस की नहीं बल्कि 2021 के गणतंत्र दिवस की है।

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