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फैक्ट चेकः बनारस में सड़क पर नमाज पढ़ते मुस्लिमों पर योगी सरकार ने कराया लाठीचार्ज?

सोशल मीडिया अगर यूजर्स को अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए प्लेटफॉर्म देता है, तो यही प्लेटफॉर्म गलत सूचनाएं फैलाने वालों और नफरत फैलानों वालों को भी बराबर के मौके देता है। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो को शेयर करने वाले दावा कर रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के बनारस में मुस्लिम समुदाय के लोग सड़क पर नमाज पढ़ रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।

वीडियो को शेयर करने वाले इस लाठीचार्ज के लिए योगी सरकार और यूपी पुलिस को बधाई दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा- “बनारस में रोड पर नमाज पढ़ने का अंजाम देख लो। क्या ये और किसी के राज में संभव है। धन्यवाद योगी जी का।”

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फैक्ट चेकः

वायरल हो रहे इस वीडियो के फैक्ट चेक के लिए हमनें गूगल पर सर्च किया। लेकिन हमें गूगल पर कोई भी न्यूज बनारस में सड़क पर नमाज पढ़ रहे मुस्लिम समुदाय पर लाठीचार्ज का नहीं मिला। इसके बाद हमने वीडियो के कुछ फ्रेम्स को रिवर्स सर्च किया तो हमें 19 अक्टूबर 2021 को प्रकाशित क्विंट न्यूज का एक यूट्यूब लिंक मिला।

क्विंट द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो के कुछ फ्रेम्स वायरल हो रहे वीडियो से मैच करते हैं। इस खबर के मुताबिक मध्य प्रदेश के जबलपुर में बिना प्रशासन की इजाजत के मुस्लिम समुदाय द्वारा ईद-ए-मिलादुन्नबी का जुलूस निकाला गया था। जिसके बाद पुलिस-प्रशासन के लोगों के साथ मुस्लिम समुदाय की झड़प हो गई। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।

इसके बाद हमनें गूगल पर जबलपुर में पुलिस द्वारा ईद-ए-मिलादुन्नबी के जुलूस पर पुलिस की लाठीचार्ज किए जाने पर सर्च किया। हमें कई न्यूज वेबसाइटों द्वारा 19 अक्टूबर 2021 को प्रकाशित किए गए समाचार मिले। समाचार वेबसाइटों के मुताबिक शहर में धारा-144 लगी थी, इसलिए किसी को भी जुलूस या रैली निकालने की इजाजत नहीं थी।

 

निष्कर्ष:

वायरल हो रहे वीडियो के तथ्यों की जांच से पता चलता है कि वीडियो बनारस का नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के जबलपुर का है। जहां पुलिस द्वारा बिना इजाजत ईद-ए-मिलादुन्नबी का जुलूस निकालने पर लाठीचार्ज किया गया था। इसलिए सोशल मीडिया यूजर्स का दावा झूठा और भ्रामक है।