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फैक्ट-चेक: भाजपा विधायक के विवादित बयान के वीडियो को असम के मुख्यमंत्री का बयान बताकर वायरल किया


8 सितंबर, 2021 को, “सुबाश सिंह आज़ाद” नाम के एक ट्विटर यूजर ने मीडिया को बाईट देते हुए एक नेता का वीडियो ट्वीट किया। यूजर ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा कि “आसाम के मुख्यमंत्री का सबसे छोटा भाषण जिसमे की उन्होंने सब कुछ कह दिया! समझिये।ये नया भारत है।”
इस वीडियो में, दिख रहा शख्स उन लोगों पर निशाना लगा रहा है जो भारत में रहकर पाकिस्तान ज़िंदाबाद का नारा लगाते हैं। वीडियो में दिख रहा शख्स ऐसे लोगों की आलोचना करते हुए कहता है कि जो लोग तालिबान की प्रशंसा कर रहे हैं वे वहां नहीं टिकेंगे। इस भाषण में उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि भारत में रहने वालों को बाबासाहेब अम्बेडकर के संविधान का पालन करना चाहिए, न कि उनके अपने नियमों का।

सुभाष सिंह की ट्विटर पर पोस्ट

इस वीडियो को 38,000 से अधिक बार देखा जा चुका है और हजारों लोगों ने इसे रीट्वीट और लाइक किया है।

दूसरे यूजर का भी यही दावा

इस वीडियो को इसी दावे के साथ पिछले दो दिनों के अंतराल में ट्विटर पर सैकड़ों यूजर द्वारा साझा किया गया था।

तथ्यों की जांच:

अपनी पड़ताल में हमने पाया कि मीडिया को बाईट देने वाला शख्स असम का मुख्यमंत्री नहीं है क्योंकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा हैं, और उनका चेहरा, मोहरा, नयन, नक्श इस शख्स बिल्कुल जुदा हैं। हम आपकी सुविधा के लिये असम के मौजूदा मुख्यमंत्री की तस्वीर भी नीचे प्रकाशित कर रहे हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की तस्वीर


इसके बाद हमने इस वीडियो की पड़ताल की, और पता लगाने की कोशिश की यह वीडियो कहां से आया है, हमने वीडियो के मुख्य फ़्रेमों को रिवर्स सर्च किया और पाया कि यह वीडियो भोपाल से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा है। भाजपा विधायक ने ही ये बातें कही थीं, रामेश्वर शर्मा भोपाल से भाजपा विधायक हैं।

आईएनएच न्यूज द्वारा पोस्ट किए गए भाषण की क्लिप

हिमंत बिस्वा सरमा अपने भाषणों को लेकर अक्सर खबरों में रहते हैं, उनका चेहरा भी जाना पहचाना है। लेकिन इसके बावजूद यह देखकर आश्चर्य हुआ कि कितने लोगों ने इस दावे को आँख बंद करके कॉपी-पेस्ट किया और बिना सत्यापित किए या जाने रामेश्वर शर्मा को असम का मुख्यमंत्री बता दिया। ऐसा सिर्फ एक खास तरह के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया गया। यह पैटर्न एक विचारधारा विशेष को बल देने और एक संप्रदाय विशेष के ख़िलाफ नफरत फैलाने के लिये अपनाया जाता है।