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फैक्ट चेकः कश्मीर और मुस्लिमों पर अंतर्राष्ट्रीय मीडिया द्वारा फैलाया गया झूठ

भ्रामक और तथ्यहीन खबरें ना सिर्फ सोशल मीडिया बल्कि मेनस्ट्रीम मीडिया द्वारा भी फैलाया जाता रहा है। लेकिन अब अंतर्राष्ट्रीय मीडिया द्वारा भी तथ्यहीन, गलत और भ्रामक खबरों को प्रसारित और प्रकाशित किया जा रहा है।


“कश्मीर” और “अल्पसंख्यक” ये दो मुद्दे भारत सहित पूरी दुनिया के लिए सबसे बेहतर न्यूज सामग्री होते हैं। यहां होने वाली हर छोटी-बड़ी घटना विवादास्पद होती है या उसे बना दी जाती है। और वह मीडिया के लिए यह टीआरपी हासिल करने के लिए सबसे मुफीद और बढ़िया सामग्री होता है। इसलिए ऐसी खबरों को सनसनीखेज बनाकर दर्शकों के सामने परोस दिया जाता है। अब इस खेल में राष्ट्रीय मीडिया के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय मीडिया भी शामिल हो गया है। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में शीर्षक “मुस्लिम पर्व पर भारतीय कश्मीर में कुर्बानी पर प्रतिबंध” से खबर प्रकाशित की गईं। इस खबर को कई विदेशी मीडिया हाउसों द्वारा प्रमुखता के साथ छापा गया।

फैक्ट चेकः

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में प्रकाशित इन खबरों का जब फैक्ट चेक किया गया तो सच्चाई सामने आई। दरअसल भारत में ईद-अल-अजहा पर जानवरों की दी जाने वाली कुर्बानी पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया था। दरअसल ईद-उल-अजहा पर दुनियाभर के मुसलमान जानवरों की कुर्बानी देते हैं। भारतीय अधिकारियों और जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा भी 16 जुलाई 2021 को स्पष्टीकरण दिया जा चुका है कि ईद के दिन कश्मीर में जानवरों की कुर्बानी पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। दरअसल यह भ्रामक खबर उस लेटर के बाद फैला जो भारतीय पशु कल्याण बोर्ड, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा अवैध तरीके से जानवरों का वध किए जाने के खिलाफ थी।
यहां रोचक तथ्य यह है कि जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा 16 जुलाई 2021 को इस मामले पर स्पष्टीकरण दिया जाता है जबकि अंतर्राष्ट्रीय मीडिया द्वारा इन खबरों को प्रमुखता से 17 जुलाई 2021 या उसके बाद उठाया जाता है। यहां सोचने वाली बात है कि जब भारतीय अधिकारियों द्वारा जानवरों की कुर्बानी पर प्रतिबंध होने का खंडन किया जा चुका है तब अंतर्राष्ट्रीय मीडिया द्वारा इन खबरों को प्रमुखता के साथ क्यों प्रकाशित किया गया।

Statement by Administration

सोचिए कि सोशल मीडिया पर फैले भ्रामक, तथ्यहीन और गलत खबरों की सच्चाई जानने के लिए लोग राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का सहारा लेते हैं, लेकिन जब इन्हीं मीडिया हाउसों द्वारा भ्रामक, तथ्यहीन और गलत समाचार प्रकाशित किया जाने लगे, तो दर्शकों को सही सूच