सोशल मीडिया पर एक वीडियो तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की महिला कार्यकर्ता का बताकर जमकर वायरल है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि मीडिया से बात करती महिला के सिर पर पट्टी बंधी है और वह किसी घटना के बारे में जानकारी दे रही है। इसी बीच वहां उपस्थित कुछ महिलाओं पट्टी को खींच दिया, जिसके बाद वहां मारपीट शुरु हो जाती है। यूजर्स इस वीडियो को शेयर करते हुए दावा कर रहे हैं कि टीएमसी की महिला कार्यकर्ता चोट लगने का ड्रामा कर रही थी, जिसे बीजेपी की महिला कार्यकर्ताओं ने एक्सपोज कर दिया।
इस वीडियो को शेयर करते हुए एक इंस्टाग्राम यूजर ने लिखा, ‘झूठी चोट लेकर मिडिया के आगे झूठ बोल रही थी ममता की बांग्लादेशी दिहाड़ी मजदूर। जनता ने खोल दी पोल’

एक्स पर एक यूजर ने इस वीडियो को शेयर कर लिखा, ‘TMC की एक सदस्य ने एक न्यूज़ रिपोर्टर को बताया कि BJP की महिलाओं ने उसे काट लिया था। इसके बाद, एक स्थानीय निवासी ने कैमरे के सामने उसके ज़ख्म को नकली साबित कर दिया। एकता कपूर को अपने सीरियल्स में TMC कार्यकर्ताओं को कास्ट करना चाहिए।’ (हिन्दी अनुवाद)

फैक्ट चेकः
DFRAC की टीम ने जांच में पाया कि वायरल वीडियो पश्चिम बंगाल में टीएमसी की किसी महिला कार्यकर्ता का नहीं है। यह वीडियो बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में अस्पताल कर्मचारी और मरीज के परिजनों के बीच विवाद का वीडियो है। जांच में हमने पाया कि वायरल वीडियो पर ‘मौर्य ध्वज एक्सप्रेस’ लिखा है। जिसके बाद हमारी टीम ने मौर्य ध्वज एक्सप्रेस के बारे में गूगल पर सर्च किया। हमें मौर्य ध्वज एक्सप्रेस के फेसबुक पेज पर यही विडियो पोस्ट मिला, जिसके साथ जानकारी दी गई है, ‘मुजफ्फरपुर के वीडियो बंगाल में भ्रामक तरीके से वायरल, गलत दावे से फैलाई जा रही अफवाह’
इसके अलावा मौर्य ध्वज एक्सप्रेस के फेसबुक पर इसी घटना का एक अन्य वीडियो 28 अप्रैल को पोस्ट मिला। जिसके साथ बताया गया है, ‘SKMCH में मरीज के परिजन ने किया बबा*ल तो नरसिंग स्टॉप ने ने इमरजेंसी में किया काम काज ठप।’ दरअसल मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH) के अस्पताल कर्मचारियों और एक मरीज के परिजनों के बीच विवाद हो गया था और दोनों पक्षों में हाथापाई भी हुई थी।
वहीं आगे की जानकारी के लिए हमारी टीम ने मौर्य ध्वज एक्सप्रेस के पत्रकार से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वायरल वीडियो पश्चिम बंगाल का नहीं है, बल्कि मुजफ्फरपुर की घटना का है। उन्होंने इस घटना में टीएमसी और बीजेपी का एंगल होने से भी इनकार किया है।
निष्कर्षः
DFRAC के फैक्ट चेक से साफ है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पश्चिम बंगाल में टीएमसी की महिला कार्यकर्ता का नहीं है। यह वीडियो बिहार के मुजफ्फरपुर में अस्पताल कर्मचारी और मरीज के परिजनों के बीच विवाद का है। इसलिए यूजर्स का दावा भ्रामक है।

