सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में मुस्लिमों को सामान लेकर जाते हुए देखा जा सकता है। यूजर्स इस वीडियो को शेयर कर दावा कर रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए देश छोड़कर भाग रहे हैं।
सोशल मीडिया पर लगातार फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाएं फैलाने वाले यूजर दिलीप कुमार सिंह ने वीडियो को शेयर कर लिखा, ‘Breaking News पश्चिम बंगाल के रेलवे स्टेशन्स पर भारी भीड़… चुनाव परिणाम देखते ही घुसपैठिए खुद ही बंगाल छोंड़कर बांग्लादेश भागने लगे… हिन्दुओं सावधान… ये दरिंदे शैतान आपके शहर भी आ सकते हैं… इन राक्षसों को देखते ही नज़दीकी पुलिस को सूचित करें.!!’

वहीं, चंदा मीणा नामक यूजर ने लिखा, ‘भाजपा के बंगाल में जीतते ही अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए व रोहिंग्या मुसलमान वापस बांग्लादेश अपनी जान बचा के भागते हुए’

फैक्ट चेकः
DFRAC की टीम ने जांच में पाया कि वायरल वीडियो पश्चिम बंगाल के किसी रेलवे स्टेशन का नहीं है। यह बांग्लादेश के बरीशाल जिले के चारमोनाई महफिल का पुराना वीडियो है। वीडियो के की-फ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च करने पर इससे मिलता जुलता वीडियो हमें एक फेसबुक अकाउंट 16 दिसंबर 2025 को पोस्ट मिला। इस पोस्ट के साथ बांग्ला भाषा में कैप्शन लिखा गया है, जिसका हिन्दी अनुवाद है, ‘चरमोनाई महफ़िल के अंतिम क्षणों में, हज़ारों मुस्लिम श्रद्धालु लॉन्च में सवार हो रहे हैं।’
वहीं जांच के दौरान फेसबुक पर शेयर किए गए वीडियो में हमें एक बिल्डिंग दिखाई दी। इस बिल्डिंग के बारे में गूगल पर सर्च करने पर हमने पाया कि यह बरीशाल चारमोनाई में अल-करीम जामे मस्जिद है। दरअसल चारमोनाई, दक्षिण-मध्य बांग्लादेश के बरीशाल संभाग में स्थित बरीशाल ज़िले का एक प्रशासनिक संघ है।

हमें चारमोनाई महफिल के बारे में बांग्लादेश की कंट्री टुडे और amaderbarisal.com कई मीडिया रिपोर्ट्स मिलीं, जिसमें बताया गया है, ‘इस महफ़िल की शुरुआत 1924 में हुई थी। समय के साथ, यह महफ़िल और यह आध्यात्मिक आंदोलन देश का प्रमुख आध्यात्मिक आंदोलन बन गया। इस आंदोलन के प्रमुख मौलाना सैयद मुहम्मद फ़ज़लुल करीम रहिमुल्लाह ने 1987 में इस्लामिक शासनतंत्र आंदोलन के नाम से प्रत्यक्ष राजनीतिक गतिविधियाँ शुरू कीं, जिसे अब इस्लामिक आंदोलन बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है। बांग्लादेश की आध्यात्मिकता और राजनीति में इस महफ़िल और आंदोलन का एक मजबूत स्थान है।’
वहीं इस संदर्भ में आगे की जानकारी के लिए हमारी टीम ने पश्चिम बंगाल के पत्रकार आर्कादिप्ता घोष से संपर्क किया। उन्होंने वीडियो को देखने बाद कहा कि बंगाल में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।
निष्कर्षः
DFRAC के फैक्ट चेक से साफ है कि सोशल मीडिया पर शेयर किया गया वीडियो भारत का नहीं है। यह बांग्लादेश के बरीशाल में चारमोनाई महफिल का पुराना वीडियो का है। इसलिए यूजर्स का दावा भ्रामक है।

