attack on US military base

फैक्ट चेकः जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य बेस पर हमले का वायरल वीडियो AI-जनरेटेड है

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सोशल मीडिया पर एक सैन्य बेस पर हमले का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो के साथ दावा किया गया है कि यह जॉर्डन और मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य बेस पर हमले से जुड़ा है। यूजर्स का यह भी दावा है कि इस वीडियो को चीन द्वारा जारी किया गया है।

इस वीडियो को शेयर करते हुए एक यूजर ने अरबी भाषा में कैप्शन लिखा, जिसका हिन्दी अनुवाद है, ‘चीन ने जॉर्डन और खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर असल में क्या चल रहा है, उससे जुड़ी जानकारियाँ लीक कर दी हैं—ऐसी जानकारी जो बेहद खतरनाक और खौफनाक है। यह ठीक वही विषय है जिसे अल जज़ीरा—और उसके साथ-साथ अन्य “अरब-हिब्रू” चैनल—जान-बूझकर छिपा रहे हैं; हम इसे यहाँ आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं।’

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फैक्ट चेकः

DFRAC की टीम ने वायरल वीडियो की जांच में पाया कि यह जॉर्डन और मध्य-पूर्व में स्थित किसी भी अमेरिकी बेस पर हमले का चीन द्वारा जारी किया गया फुटेज नहीं है। इस वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाया गया है। वीडियो को गौर से देखने पर हमने पाया कि 2 सैनिक अचानक से दृश्य से रहस्यमयी तरीके से हो जाते गायब हैं। एक सैनिक सैन्य सामग्री में समा जाता है, तो वहीं दूसरा सैन्य वाहन में गायब हो जाता है, जिसे यहां दिए ग्राफिक्स में देखा जा सकता है। यह दृश्य पैटर्न स्पष्ट करता है कि वायरल वीडियो AI-जनरेटेड है।

हमारी टीम ने वायरल वीडियो की जांच के लिए एआई डिटेक्टर टूल्स हाइव मॉडरेशन और detectvideo.ai पर जांच की। हाइव मॉडरेशन की जांच में परिणाम सामने आया कि यह वीडियो 59.5% एआई जनरेटेड है, वहीं detectvideo.ai की जांच रिजल्ट के मुताबिक वायरल वीडियो 72% एआई जनित है।

वहीं हमारी टीम ने इस वीडियो के संदर्भ में और ज्यादा जानकारी के लिए एआई एक्सपर्ट मयंक शर्मा से संपर्क किया। मयंक ने हमें बताया कि वीडियो AI-जनरेटेड है, क्योंकि इसमें कई विस्फोट ऐसे होते दिखते हैं, जहां मिसाइल का स्पष्ट ट्रैक या इम्पैक्ट पॉइंट नजर नहीं आता। यह रियल फुटेज में बहुत असामान्य होता है, लेकिन AI जनरेटेड वीडियो में यह आम गलती होती है। विस्फोट की दिशा, धुआं और मलबा का फैलाव वास्तविक भौतिक नियमों के अनुसार नहीं है। कई फ्रेम्स में धुआं अचानक गायब या असामान्य तरीके से बदलता दिखता है, जो वीडियो एआई जनित होने की ओर इशारा करता है।

निष्कर्षः

DFRAC के फैक्ट चेक से साफ है कि वायरल वीडियो AI-जनरेटेड है। इसलिए यूजर्स का दावा फेक है।