

वहीं प्रोफेसर सुधांशू त्रिवेदी नामक यूजर ने लिखा- “लोकसभा चुनाव में जीत के बाद मुस्लिम लोग मां बहन की गालियां देकर अश्लील इशारे कर रहे हैं… ताकथित राजपूत के नाम से पेज चलाने लोगो ने मुस्लिम कैंडिडेटों का खूब सपोर्ट किया था क्या ऐसी गंदी हरकतों पर इनका मुँह खुलेगा ? इनको अपने किए पर पश्चाताप होगा?”

फैक्ट चेकः
DFRAC की टीम ने वायरल वीडियो को गौर से देखा। हमने पाया कि वीडियो में अंबानगरी नामक बोर्ड दिख रहा है। इसके बाद हमारी टीम ने अंबानगरी के इस बोर्ड के संदर्भ में गूगल पर सर्च किया। हमें ‘मंडल न्यूज’ नामक एक वेबसाइट पर यही फोटो मिला। अंबानगरी के बोर्ड पर लिखा है, “राजकमल चौक, संकल्पना-प्रणित राजेंद्र सोनी, नगरसेवक म.न.पा. अमरावती”।

इसके बाद हमारी टीम ने गूगल मैप पर “राजकमल चौक, अमरावती” सर्च किया। हमने पाया कि वायरल वीडियो राजकमल चौक, अमरावती का है, जहां अंबानगरी का बोर्ड लगा है।

इसके अलावा हमारी टीम ने यह भी पाया कि अंबानगरी बोर्ड और पीछे दिख रही मूर्ति तथा आस-पास की दुकानें भी वायरल वीडियो से मैच कर रही हैं, जिसे यहां दिए ग्राफिक्स में देखा जा सकता है।

निष्कर्षः
DFARC के फैक्ट चेक से साफ है कि सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा किया गया दावा भ्रामक है। वायरल वीडियो पश्चिमी यूपी का नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र के अमरावती में कांग्रेस की जीत के बाद हुए जश्न का है।