सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया गया है कि 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की देशविरोधी गतिविधियों के कारण मान्यता रद्द करनी पड़ी थी। यह भी दावा किया गया है कि AMU पर यह प्रतिबंध 1972 तक जारी रहा, फिर इंदिरा गांधी ने इस प्रतिबंध को खत्म किया।
Anuj Shukla नामक यूजर ने लिखा, ‘आप मे से कितने लोग जानते है? 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द करनी पड़ी थी… कारण था…, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का धर्म के नाम पर देश से विद्रोह कर बैठना, पाकिस्तान के भारत पर हमलावर होते ही यूनिवर्सिटी देश के खिलाफ मुहिम चलाने लगी,,,, हिन्दू छात्र छात्राओं को चुन चुनकर परेशान किया गया विद्यालय छोड़ने को मजबूर किया गया, मुसलमानो को हिन्दुओं पर जहां तहां हमले के लिए उकसाया, देश से पहले मजहब को मानने वालों ने ऐसा ही किया व देश के अंदरूनी माहौल को ग्रहयुद्ध की तरफ ले जाना चाहा। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री को यूनिवर्सिटी पर बैन लगाना पड़ा,, जो 1972 में पाकिस्तान को हराने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने बर्खास्त किया। AMU अब तक देश को कई आतंकवादी दे चुका है, इंडियन मुजाहिद्दीन, और सिमी जैसे आतंकवादी संगठन इसही यूनिवर्सिटी की गोद से निकले सपोलें हैं। आज के समय और आज की सरकार में इस आतंकवाद की फैक्ट्री नुमा यूनिवर्सिटी को राष्ट्रहित में तत्काल बैन कर देना चाहिए, या फिर इसका अल्पसंख्यक कोटा खत्म करो और इसका नाम बदलकर अलीगढ़ हिन्दू यूनिवर्सिटी करो… क्योंकि बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी का कोई भी छात्र या संघठन आजतक आतंकवादी देशद्रोही नही हुआ। भारत को इस्लामिक आतंकवाद से बचाना है तो भारत मे इस्लाम को ठिकाने लगाना होगा?’

फैक्ट चेकः
DFRAC की टीम ने जांच में पाया कि यह दावा फेक है। AMU पर लाल बहादुर शास्त्री ने प्रतिबंध नहीं लगाया था। हमने AMU पर प्रतिबंध लगाए जाने के संबंध में कई कीवर्ड्स सर्च किए, लेकिन हमें AMU पर प्रतिबंध लगाए जाने की कोई सूचना नहीं मिली। हमें, द प्रिंट का एक लेख मिला, जिसमें 1964 में लाल बहादुर शास्त्री के एएमयू दीक्षांत समारोह में शामिल होने का उल्लेख किया गया है।

वहीं, इस मामले पर और ज्यादा जानकारी के लिए हमारी टीम ने AMU के पूर्व जनसंपर्क अधिकारी राहत अबरार से संपर्क किया। उन्होंने वायरल दावे को पूरी तरह से फेक करार दिया। उन्होंने कहा कि 1971 में वह AMU के छात्र थे, अगर AMU पर प्रतिबंध लगा होता है, तो फिर उस वक्त छात्र पढ़ कैसे रहे होते? उन्होंने आगे यह भी बताया कि 1971-72 में ही बिहार के मौजूदा राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान एएमयू छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए थे। ज़ी न्यूज़ की एक रिपोर्ट में भी यह उल्लेख किया गया है कि आरिफ मोहम्मद खान पहले एएमयू छात्रसंघ के जनरल सेकेट्री का चुनाव जीते, इसके बाद 1971-72 में एएमयू छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए।

निष्कर्षः
DFRAC के फैक्ट चेक से साफ है कि AMU पर लाल बहादुर शास्त्री ने प्रतिबंध नहीं लगाया था। इसलिए सोशल मीडिया यूजर का दावा फेक है।

