सोशल मीडिया पर एक पोस्टर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि एक मुस्लिम बेटी आयशा ने एचआईवी की दवा और वैक्सीन बनाकर लोगों को हैरान कर दिया है।

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सोशल साईट X पर वेरिफाइड यूजर रिजवान रज़ा ने वायरल पोस्टर को शेयर कर लिखा कि मुस्लिम बेटी ने बनाया HIV का Vaccine गरीबों के लिए फ्री #MuslimBeti #Hiv #MedicalBreakthrough #IslamicPride #ViralReels #viral
फैक्ट चेक:
वायरल दावे की जांच के लिए DFRAC ने संबंधित कीवर्ड सर्च किए। इस दौरान हमें ऐसी कोई विश्वसनीय खबर नहीं मिली, जिससे यह साबित हो कि किसी मुस्लिम लड़की आयशा ने एचआईवी का वैक्सीन खोजा हो या एचआईवी की दवा बनाई हो।

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आगे की जांच में एचआईवी वैक्सीन से जुड़ी आधिकारिक जानकारी एकत्रित की गई। इससे पता चला कि वर्तमान समय में दुनिया में ऐसी कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है जो HIV संक्रमण को रोक सके। हालांकि, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के समर्थन से वैज्ञानिक इस दिशा में शोध कर रहे हैं।

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इसके अतिरिक्त, हमें समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट मिली, जिसमें बताया गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गिलियड की दवा लेनाकैपाविर (Lenacapavir) — जो साल में दो बार लगने वाला इंजेक्शन है — को HIV संक्रमण की रोकथाम के एक प्रभावी साधन (tool) के रूप में सिफारिश की है। लेकिन इस संदर्भ में WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडनोम घेब्रेयसस ने स्पष्ट कहा है: “हालांकि HIV वैक्सीन अभी भी दूर की बात है, लेकिन लेनाकैपाविर अगली सबसे बेहतर चीज़ है।”
निष्कर्ष:
DFRAC के फैक्ट चेक से स्पष्ट होता है कि “मुस्लिम बेटी आयशा द्वारा एचआईवी वैक्सीन की खोज” का दावा पूरी तरह फेक है, क्योंकि अब तक HIV के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन विकसित नहीं हुई है।

