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फैक्ट-चेक: क्या बंगाल की काली मंदिर पूजा को रुकवाने के लिए मुस्लिमों ने प्रदर्शन किया?

फेसबुक पर पिछले कुछ हफ्तों से एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर लोगों आक्रोशित भीड़ है। इस भीड़ को मुस्लिम समुदाय का बताया जा रहा है। वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि मुस्लिमों द्वारा मंदिर में काली पूजा को रुकवाने के लिए प्रदर्शन कर रहा है। पोस्ट के कैप्शन में लिखा है, “कोलकाता के काली मंदिर में पूजा बंद करने के लिए प्रदर्शन कर रहे हजारों मुसलमान। यह वही जगह है जहां संतों ने पूजा की है। अब ये मुसलमान इस मंदिर को बंद करने की मांग कर रहे हैं। हमारे देश में क्या हो रहा है। हम कहाँ हैं? भारतीयों को अपनी नींद से जगाने की जरूरत है और देखें कि क्या हो रहा है।”

वीडियो को फेसबुक पर कई बार पोस्ट किया गया।

उपयोगकर्ता द्वारा इसी दावे के साथ पोस्ट किया गया वीडियो

फैक्ट चेक:

हालांकि, वीडियो के मुख्य फ्रेम पर रिवर्स इमेज सर्च करने के बाद, हमने पाया कि वीडियो को एक बांग्लादेशी मीडिया चैनल द्वारा पोस्ट किया गया था। जिसे जजाकल्लाह मीडिया कहा जाता है।

वीडियो के कैप्शन में लिखा है, ‘फेनी की बड़ी मस्जिद में झड़प। यह नमाज के बाद हुआ। इस संघर्ष में हिंदू और मुसलमान शामिल थे।”

घटना को फेनी में स्थानीय समाचारों द्वारा भी कवर किया गया था जिसने इस तथ्य की पुष्टि हो रही है कि यह घटना बांग्लादेश में हुई थी, न कि भारत में।

इसलिए, यह दावा भ्रामक है। क्योंकि कोलकाता के काली मंदिर में चल रही पूजा को रुकवाने के लिए मुस्लिमों द्वारा कोई भी प्रदर्शन नहीं किया गया। सोशल मीडिया पर नफरत और घृणा फैलाने के लिए इस वीडियो को कुछ दक्षिणपंथियों द्वारा प्रसारित किया जा रहा है।