पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नफरत भरे कंटेंट और सांप्रदायिक प्रोपेगेंडा में अचानक बढ़ोतरी देखी गई। हमारी जांच में सामने आया कि कई पाकिस्तानी और बांग्लादेशी यूजर्स ने भारतीय राजनीतिक घटनाओं को आधार बनाकर हिंदू-मुस्लिम तनाव भड़काने वाले पोस्ट, वीडियो और भ्रामक दावे शेयर किए। विश्लेषण में पाया गया कि कई पोस्ट्स में बंगाल चुनाव परिणामों को “हिंदू बनाम मुस्लिम” के रूप में पेश करने की कोशिश की गई। कुछ अकाउंट्स ने फर्जी वीडियो, पुरानी घटनाओं की तस्वीरें, वीडियो और एडिटेड क्लिप्स शेयर कर यह दावा किया कि चुनाव नतीजों के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई।
पाकिस्तानी-बांग्लादेशी यूजर्स की भूमिकाः
कई ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स सामने आए, जो पाकिस्तान और बांग्लादेश से संचालित या उनसे जुड़े दिखाई देते हैं। इन अकाउंट्स ने पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों के बाद सांप्रदायिक और भड़काऊ नैरेटिव को amplify करने में सक्रिय भूमिका निभाई। ग्राफिक्स में दिख रहे अकाउंट्स की प्रोफाइल डिटेल्स से पता चलता है कि इनमें से कई अकाउंट्स “Account based in Pakistan”, “Account based in Bangladesh” और “South Asia” जैसी लोकेशन से जुड़े हुए हैं।
विश्लेषण में यह भी सामने आया कि कुछ अकाउंट्स हाल के वर्षों में बनाए गए, लेकिन कम समय में ही उन्हें verified बैज मिल गया और उनकी गतिविधियां तेजी से बढ़ीं। उदाहरण के तौर पर “Zard si Gana”, “Habiba Fazal” और “BorderWatchPK” जैसे अकाउंट्स पाकिस्तान आधारित दिखाई देते हैं, जबकि “Ryan Rahman” जैसे अकाउंट्स बांग्लादेश से जुड़े नजर आते हैं। वहीं कुछ अकाउंट्स अपनी लोकेशन को “South Asia” बताकर क्षेत्रीय पहचान छिपाने की कोशिश करते दिखे।

कंटेंट का कॉपी-पेस्ट पैटर्नः
कई पाकिस्तानी और बांग्लादेशी अकाउंट्स एक जैसे पोस्ट, समान वीडियो और लगभग समान कैप्शन के साथ कंटेंट शेयर कर रहे थे। अलग-अलग अकाउंट्स द्वारा एक ही नैरेटिव को कॉपी-पेस्ट शैली में amplify किया गया। कई पोस्ट्स में शब्दों का क्रम, आरोपों की भाषा और इस्तेमाल किए गए विजुअल्स तक लगभग समान पाए गए। उदाहरण के तौर पर “Muslims and other places of worship…” जैसे वाक्य कई अकाउंट्स पर हूबहू दिखाई दिए। इसी तरह एक जैसे टेक्स्ट और वीडियो के साथ अलग-अलग अकाउंट्स से पोस्ट किया गया। इससे संकेत मिलता है कि यह केवल सामान्य सोशल मीडिया प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि coordinated messaging strategy का हिस्सा हो सकता है।

बंगाल चुनाव और मतगणना पर पोस्ट की संख्याः
पश्चिम बंगाल चुनाव और मतगणना के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में ऐसे पोस्ट शेयर किए गए, जिनमें चुनावी माहौल को सांप्रदायिक तनाव और हिंसा से जोड़कर पेश किया गया। दूसरे राज्यों की घटनाओं को बंगाल से जोड़कर सांप्रदायिक हमले, धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने तथा राजनीतिक हिंसा के दावे किए गए। “नीलाक्षी राणा” नामक यूजर सबसे अधिक सक्रिय रहा, जिसने कुल 57 पोस्ट किए। इसके अलावा “मणिपुर पोस्ट” ने 14, “जर्द सी गाना” ने 11, “रिवोल्ट” ने 10 और “खुशी अंबेडकर” ने 7 पोस्ट किए। इसके बाद अन्य यूजर्स ने भी कम मात्रा में पोस्ट शेयर किए, लेकिन उनमें ज्यादातर फेक और भ्रामक सूचनाएं ही थीं।

फेक और भ्रामक सूचनाएंः
सोशल मीडिया अकाउंट्स ने पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के बाद पुराने वीडियो, संदर्भहीन तस्वीरें और अपुष्ट दावों को नए घटनाक्रम से जोड़कर वायरल किया। इन भ्रामक पोस्ट्स के जरिए सांप्रदायिक तनाव और डर का माहौल बनाने की कोशिश की गई।
फेक और भ्रामक सूचना-1
एक वीडियो को पश्चिम बंगाल चुनाव में मुस्लिमों पर अत्याचार और हिंसा से जोड़कर शेयर किया गया। पोस्ट में दावा किया गया कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के आदेश के बाद सुरक्षा बलों की मौजूदगी में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हिंसा हुई और महिलाओं के साथ दुष्कर्म जैसी घटनाएं सामने आईं। हालांकि, जांच में पता चला कि वायरल वीडियो का दावा भ्रामक है। मूल वीडियो बांग्लादेशी मीडिया प्लेटफॉर्म “Law Tv News” पर पोस्ट किया गया था, जो बांग्लादेश चुनाव के दौरान का था।

फेक और भ्रामक सूचना-2
एक वीडियो के साथ दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल में चुनावों के बाद अल्पसंख्यक समुदायों की मस्जिद और चर्चों को निशाना बनाया गया है और उन्हें तोड़ा गया। वायरल वीडियो की जांच में पाया गया कि यह पश्चिम बंगाल का नहीं है। यह वीडियो उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के मुगलसराय का है, जहां मस्जिद कमेटी के सदस्यों द्वारा ही मीनार को हटाया गया था।

फेक और भ्रामक सूचना-3
एक वीडियो के साथ दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद मुस्लिमों के घरों को निशाना बनाए जाने के दावे के साथ पोस्ट शेयर किया गया। वायरल वीडियो की जांच में हमें जनवरी की कई मीडिया रिपोर्ट्स मिलीं, जिसमें इसे बांग्लादेश की घटना का बताया गया था।

फेक और भ्रामक सूचना-4
एक वीडियो में देखा जा सकता है कि मस्जिद के अंदर एक कई लोग नमाज पढ़ रहे हैं और उनके पीछे एक ग्रुप द्वारा वाद्य यंत्र बजाया जा रहा है। यूजर्स ने इस वीडियो को पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद की घटना का बताकर सांप्रदायिक दावे के साथ शेयर किया है। हालांकि, जांच में पाया गया कि यह पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद की घटना का वीडियो नहीं है। यह वीडियो 3 जुलाई 2025 से ही इंटरनेट पर मौजूद है।


