ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच युद्ध 28 फरवरी से ही जारी है। दोनों तरफ से हमले जारी हैं। ईरान भी लगातार मिसाइल हमले कर रहा है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक मिसाइल हमले का वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि ईरान ने इजराइल के मिलिट्री इंटेलिजेंस (AMAN) की बिल्डिंग पर हमला कर उसे तबाह कर दिया।
इस वीडियो को शेयर करते हुए एक यूजर ने लिखा, ‘इजरायली सुरक्षा की रीड़ की हड्डी माने जाने वाली मिलिट्री इंटेलीजेंस (AMAN) की बिल्डिंग पर ईरान ने एक के बाद एक दर्जनों मिसाइल दागे। इंशाअल्लाह ख़त्म हो जाएगा’

वायरल वीडियो को इजराइली मिलिट्री इंटेलिजेंस की बिल्डिंग पर ईरानी मिसाइल हमले का बताकर कई अन्य यूजर्स ने शेयर किया है, जिसे यहां, यहां, यहां और यहां देखा जा सकता है।
फैक्ट चेकः
DFRAC की टीम ने वायरल वीडियो की जांच में पाया कि यह वास्तविक वीडियो नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है। गहन विश्लेषण में कई स्पष्ट विसंगतियां सामने आईं, जैसे कि मिसाइल हमले के दौरान कई बार बिना किसी मिसाइल के दृश्य में आए ही विस्फोट होता है। इसके अलावा, इतने बड़े हमले के बावजूद आसपास की इमारतों को कोई नुकसान नहीं होना भी संदेह पैदा करता है। आम तौर पर इस तरह की असंगतियां AI-जनरेटेड वीडियो में देखने को मिलती हैं। इसके बाद, आगे की जांच के लिए हमारी टीम ने वीडियो की जांच एआई-डिटेक्टर टूल्स हाइव मॉडरेशन और detectvideo.ai पर की, जिसमें परिणाम सामने आया कि वायरल वीडियो AI-जनरेटेड है।

वहीं, हमने इजराइल के मिलिट्री इंटेलिजेंस (AMAN) की बिल्डिंग पर ईरानी हमले संदर्भ में गूगल पर कुछ कीवर्ड्स सर्च किया। हमें अल-अरबिया और WANA News की मीडिया रिपोर्ट्स मिलीं, लेकिन इसमें कहीं भी वायरल वीडियो या उसका स्क्रीनशॉट नहीं है। इसके अलावा हमें अल-जजीरा की 17 जून 2025 की एक रिपोर्ट मिली, जिसमें तेल अवीव के पास इजराइली खुफिया इमारतों पर और उनके आसपास हुए ईरानी हमले का वीडियो पोस्ट किया गया है। इस वीडियो में भी कहीं भी वायरल हिस्सा नहीं है।

आगे की जांच के लिए हमारी टीम ने एआई विशेषज्ञ मयंक शर्मा से संपर्क किया। मयंक शर्मा ने वायरल वीडियो का विश्लेषण करते हुए बताया कि इसमें कई ऐसे संकेत मौजूद हैं, जो इसे एआई-जनरेटेड कंटेंट साबित करते हैं। उनके अनुसार, वीडियो में विस्फोटों का पैटर्न असामान्य है, कई बार बिना किसी मिसाइल के दिखाई दिए ही धमाके होते नजर आते हैं, जो वास्तविक युद्ध फुटेज में संभव नहीं होता। मयंक शर्मा ने यह भी बताया कि फ्रेम दर फ्रेम देखने पर विजुअल्स में हल्की-हल्की गड़बड़ियाँ (visual inconsistencies) और अस्वाभाविक मोशन भी नजर आता है, जो आमतौर पर एआई-जनरेटेड वीडियो में पाया जाता है।
निष्कर्षः
DFRAC के फैक्ट चेक से साफ है कि इजराइली मिलिट्री इंटेलिजेंस की बिल्डिंग पर ईरानी मिसाइल हमले का बताकर सोशल मीडिया पर शेयर किया गया वीडियो AI-जनरेटेड है। इसलिए यूजर्स का दावा फेक है।

