सोशल मीडिया पर इंडिया टीवी की एक न्यूज क्लिप वायरल हो रही है। इस क्लिप में एंकर को यह न्यूज पढ़ते हुए देखा जा सकता है कि असम बीजेपी में बगावत हुई है और आरएसएस ने बीजेपी से अपने हाथ खींच लिए हैं। इस न्यूज क्लिप में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का पीएम मोदी को लिखे एक कथित पत्र का जिक्र करते हुए सूचना दी गई है कि आरएसएस ने असम के मौजूदा नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं और पीएम मोदी से पूछा है कि क्या असम में बीजेपी अब कांग्रेसियों की पार्टी बनती जा रही है।
इस वीडियो को शेयर करते हुए Ajit Singh Deol नामक यूजर ने लिखा, ‘*BIG BREAKING* *RSS प्रमुख मोहन भागवत का ऐलान, असम में बीजेपी के लिए काम नहीं करेगा स्वयं सेवक संघ* भागवत ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर कहा- पुराने कांग्रेसियों ने BJP पर कर लिया है कब्जा, इसलिए इस बार सत्ता के लिए नहीं, BJP को बचाने के लिये हिमंता बिस्वा सरमा का विरोध करेगा संघ। *पूरी खबर देखें*’

फैक्ट चेकः
DFRAC की टीम ने वायरल वीडियो की जांच के लिए सबसे पहले इंडिया टीवी के यूट्यूब चैनल पर सर्च किया, क्योंकि वायरल वीडियो में एंकर मीनाक्षी जोशी के साथ कई अन्य पैनलिस्ट भी देखे जा सकते हैं। हमने पाया कि इन पैनलिस्ट के साथ इंडिया टीवी के यूट्यूब चैनल पर इस डिबेट का वीडियो 15 मार्च को अपलोड किया गया है। हमने 41ः43 मिनट लंबे इस पूरे वीडियो को देखा। हमने पाया कि इस डिबेट में कहीं भी वायरल हिस्सा नहीं है और ना ही आरएसएस-बीजेपी को लेकर ऐसी कोई खबर दी गई है। यह चर्चा पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के ऐलान से पहले की है।
वहीं इस मामले पर कुछ और सर्च करने पर हमने पाया कि असम के आरएसएस महानगर संघचालक गुरुप्रकाश मेधी ने वायरल फेक पत्र के खिलाफ गुवाहाटी के पान बाजार स्थित साइबर सेल में एक शिकायत दर्ज करवाई है। हमने गुरुप्रकाश मेधी से संपर्क किया। उनकी टीम द्वारा हमें जानकारी दी गई कि इस मामले पर गुवाहाटी के अलावा दिल्ली के रोहिणी में भी एक शिकायत दर्ज करवाई गई है। यह शिकायत अक्षय कुमार अग्रवाल द्वारा रोहिणी के सेक्टर-17 स्थित साइबर पुलिस सेल में दर्ज करवाई गई है।

अपनी शिकायत में मेधी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दुरुपयोग कर कथित तौर पर तैयार की गई एक फेक और भ्रामक पोस्ट को प्रसारित कर गलत तरीके से आरएसएस से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने पत्र को झूठा, दुर्भावनापूर्ण, लोगों को गुमराह करने वाला और संगठन की छवि को धूमिल करने वाला करार दिया। उन्होंने इस मामले पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
निष्कर्षः
DFRAC के फैक्ट चेक से साफ है कि सोशल मीडिया पर इंडिया टीवी के डिजिटली अल्टर्ड वीडियो को पीएम मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से जोड़ते हुए भ्रामक दावा किया गया है। आरएसएस के कई नेताओं ने इस फर्जी पत्र को लेकर शिकायत दर्ज करवाई है। इसलिए यूजर्स का दावा गलत है।

