Alwar Temple

फ़ैक्ट चेक: अलवर मंदिर पर नीले झंडे लगाने की घटना हाल की नहीं, बल्कि 2024 की है

Fact Check hi Featured Misleading

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि राजस्थान के अलवर में एक प्राचीन मंदिर पर कुछ लोगों द्वारा नीला झंडा फहराकर धार्मिक उन्माद भड़काने की कोशिश की गई। इस वीडियो में कुछ लोगों को मंदिर परिसर में नीले झंडे के साथ देखा जा सकता है।

इस वीडियो को शेयर करते हुए एक यूजर ने लिखा, ‘भजनलाल शर्मा जी इन जहरीले लोगों पर ऐसा एक्शन लीजिए कि मिशाल बने बाबा साहेब के नाम जातिगत हुड़दंग अब चरमपंथी रूप लेता जा रहा है अलवर में मंदिर के गुंबद पर चढ़ाई करके नीले झंडे लगाना मंदिर पर हमला है अगर मंदिर इतना ही प्यारा है तो सर झुका कर जाओ तुम्हें कौन रोकता है’

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इसके अलावा फेसबुक और एक्स (पूर्व ट्विटर) पर भी कई अन्य यूजर्स द्वारा वीडियो को शेयर किया गया है, जिसे यहां, यहां, यहां और यहां देखा जा सकता है।

फैक्ट चेकः

DFRAC की टीम ने जांच में पाया कि अलवर में हाल-फिलहाल में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। वायरल वीडियो वर्ष 2024 में हुई पुरानी घटना का है। कीफ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें यह वीडियो एक यूट्यूब चैनल पर 18 अप्रैल 2024 को अपलोड मिला, जिससे यह साफ होता है कि वायरल वीडियो हाल-फिलहाल का नहीं है।

इसके अलावा आगे की जांच के लिए हमने अलवर के गूगल मैप मंदिर के लोकेशन को देखा। यह मंदिर अलवर के होप सर्कस पर स्थित है।

वहीं, राजस्थान पुलिस ने वायरल वीडियो के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह हाल-फिलहाल की घटना का वीडियो नहीं है, बल्कि दो वर्ष पुरानी घटना का वीडियो है। पुलिस ने वायरल दावों का खंडन करते हुए ट्विट में लिखा है, ‘फेक न्यूज से सावधान! ऐसी फेक न्यूज का राजस्थान पुलिस द्वारा खंडन किया जाता है। विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो साझा कर यह दावा किया जा रहा है कि अलवर में किसी प्राचीन मंदिर में तोड़फोड़ की घटना हुई है। तथ्य जांच में सामने आया कि वायरल किया जा रहा वीडियो करीब 2 वर्ष पुराना है। इस वीडियो का वर्तमान समय या हालिया घटना से कोई संबंध नहीं है। इस प्रकार की भ्रामक जानकारी से सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका रहती है। राजस्थान पुलिस की अपील है कि किसी भी खबर/वीडियो को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। अफवाह फैलाने या फेक न्यूज शेयर करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हमारा संकल्प है कि राजस्थान में शांति, सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।’

वहीं एक अन्य ट्वीट में अलवर पुलिस ने बताया है कि यह वीडियो दो साल पुरानी घटना का है और उस वक्त पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। पुलिस ने लिखा, ‘घटना दो साल पुरानी है जिसमें पुलिस कार्यवाही की जा चुकी है। झूठी खबर ना फलाए आपके खिलाफ भी नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी।’

निष्कर्षः

DFRAC के फैक्ट चेक से साफ है कि अलवर में हाल-फिलहाल में मंदिर पर नीला झंडा लगाए जाने की कोई घटना नहीं हुई है। पुलिस के मुताबिक यह वीडियो दो वर्ष पुरानी घटना का है, इसलिए यूजर्स का दावा भ्रामक है।