Markandey Katju

फैक्ट चेकः सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज मार्कंडेय काटजू ने इस्लाम कुबूल नहीं किया, फेक दावा वायरल

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सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और भारतीय प्रेस परिषद के पूर्व चेयरमैन जस्टिस मार्कंडेय काटजू के बारे में सोशल मीडिया खासतौर पर फेसबुक पर दावा किया जा रहा है कि उन्होंने रमज़ान के महीने में इस्लाम कुबूल कर लिया है।

फेसबुक पर एक पोस्ट में दावा किया गया है, ‘भारतीय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने पाकिस्तान के ’24 डिजिटल’ चैनल पर एक विशेष लाइव इंटरव्यू के दौरान सार्वजनिक रूप से इस्लाम धर्म को अपनाने की घोषणा की है। पत्रकार सज्जाद पीरज़ादा के साथ हुई इस दिल को छू लेने वाली बातचीत में, उन्होंने ‘शहादा’ (ईमान की गवाही) पढ़ा और पैगंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त करते हुए, इस धर्म को अपनाने तक के अपने सफ़र के बारे में बताया।’

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फैक्ट चेकः

DFRAC की टीम ने जांच में पाया कि यह दावा फेक है और मार्कंडेय काटजू ने इस्लाम कुबूल नहीं किया है। जांच के दौरान हमें मार्कंडेय काटजू का एक ट्वीट मिला, जिसमें उन्होंने बताया है, ‘कुछ पाकिस्तानी मीडिया ने झूठा प्रचार किया है कि मैं मुसलमान बन गया हूँ। इसलिए, मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ। मैं एक पक्का नास्तिक हूँ, लेकिन मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूँ।’

एक अन्य पोस्ट में मार्कंडेय काटजू ने कहा, ‘यह फ़र्ज़ी ख़बर है। मैंने इस्लाम नहीं अपनाया है। मैं एक पक्का नास्तिक हूँ।’

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वहीं, हमारी टीम ने इस मामले पर और ज्यादा जानकारी के लिए मार्कंडेय काटजू से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि उनके इस्लाम अपनाने की खबर पूरी तरह से फेक है। उन्होंने इस्लाम नहीं अपनाया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह हमेशा से सभी धर्मों का सम्मान करते रहे हैं।

जस्टिस काटजू पिछले कई सालों से रमज़ान के महीने में एक दिन रोज़ा रखते आ रहे हैं। एक लेख में उन्होंने लिखा है, ‘पिछले 25-30 वर्षों से मैं रमजान के पवित्र महीने में एक दिन का रोज़ा रखता आ रहा हूँ। आज, 13 मार्च 2026 को भी मैं ऐसा ही कर रहा हूँ। मैं नास्तिक हूँ और तकनीकी रूप से हिंदू हूँ, तो मैं ऐसा क्यों करता हूँ? क्या यह पाखंड ढोंग है, नाटक है, स्टंट है या कोई चाल है? ऐसा नहीं है। यह भारतीय जनता को एकजुट करने के उद्देश्य से किया गया एक बहुत ही गंभीर प्रतीकात्मक कार्य है।’

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निष्कर्षः

DFRAC के फैक्ट चेक से साफ है कि सोशल मीडिया पर मार्कंडेय काटजू के इस्लाम अपनाने का फेक दावा किया गया है। काटजू ने DFRAC से बात करते हुए इन खबरों को फेक करार दिया है। इसलिए यूजर्स का दावा गलत है।