सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को नागालैंड का बताया जा रहा है। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि नागा जनजातियों के मानवाधिकारों के उल्लंघन के विरोध में नागालैंड में भारतीय सेना और सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ है।

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सोशल साइट X पर वेरिफाइड पाकिस्तानी यूजर ने वायरल वीडियो को शेयर कर लिखा कि मणिपुर के बाद, नागालैंड में भारतीय सेना और सरकार के खिलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की खबरें हैं, जिसमें बेकसूर नागा जनजातियों को निशाना बनाकर मानवाधिकारों का उल्लंघन किया गया है। नागालैंड और मणिपुर दोनों में भारत से आज़ादी की मांग को लेकर मज़बूत भारत विरोधी अलगाववादी आंदोलन हैं।

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इसके अलावा एक अन्य पाकिस्तानी यूजर सिमरन कश्मीरी ने भी वायरल वीडियो को शेयर कर ऐसा ही दावा किया है।
फैक्ट चेक:
वायरल वीडियो के साथ किए गए दावे की जांच के लिए DFRAC ने सबसे पहले वीडियो को की-फ्रेम में कन्वर्ट किया। इसके बाद अलग-अलग की-फ्रेम को रिवर्स इमेज सर्च किया गया। इस दौरान हमें फेसबुक पर एक समान वीडियो मिला। यह वीडियो 13 फरवरी 2026 को “मणिपुर अपडेट” नामक यूज़र द्वारा शेयर किया गया था।

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वीडियो के साथ दी गई जानकारी के अनुसार, नागालैंड के चुमौकेदिमा ज़िले के मेडज़िफेमा सब-डिवीजन के मोआवा गांव में अंगामी जनजाति और कुकी समुदाय के बीच ज़मीन विवाद को लेकर हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में संपत्ति को नुकसान पहुंचा, कई घरों में आग लगा दी गई और गाड़ियों को क्षति पहुंचाई गई। विज़ुअल्स में जले हुए घर और क्षतिग्रस्त वाहन दिखाई दे रहे थे। हालांकि, नुकसान का पूरा आकलन उस समय तक स्पष्ट नहीं था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नागालैंड पुलिस और अतिरिक्त बल मौके पर तैनात किए गए थे।

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आगे की जांच में हमें यूट्यूब पर 13 फरवरी 2026 को अपलोड की गई न्यूज़ चैनल North East Live की एक रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में वायरल वीडियो के दृश्य भी शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, नागालैंड के दीमापुर के बाहरी क्षेत्र में स्थित मोआवा गांव में दो गांवों के लोगों के बीच ज़मीन विवाद को लेकर झड़प हुई थी। इस दौरान कई घरों में आग लगा दी गई और कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। यह घटना चुमौकेदिमा ज़िले के मेडज़िफेमा सब-डिवीजन में हुई थी, जिसमें चक्रोमा पब्लिक ऑर्गनाइजेशन और मोआवा गांव के लोग शामिल थे।

Source: The Morung Exspress
इसके अतिरिक्त, हमें न्यूज़पेपर The Morung Express की रिपोर्ट भी मिली। इस रिपोर्ट में 13 फरवरी 2026 को मोआवा गांव में ज़मीन विवाद को लेकर हुए हिंसक टकराव की पुष्टि की गई है। कहीं भी भारतीय सेना के खिलाफ आज़ादी की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का उल्लेख नहीं किया गया है।
निष्कर्ष:
DFRAC के फैक्ट चेक से स्पष्ट होता है कि वायरल वीडियो को भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। यह वीडियो नागालैंड में भारतीय सेना या भारत से आज़ादी की मांग को लेकर हुए किसी विरोध प्रदर्शन का नहीं है। दरअसल, यह मामला दो समुदायों के बीच ज़मीन विवाद से जुड़ी स्थानीय हिंसा का है।

